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बैंक में बड़ी रकम न मिलने से उत्पन्न हो रही समस्या

नोटबंदी जैसे हालात फिर हो सकते हैं। जिले के बैंकों में कैश की कमी के चलते उपभोक्ताओं को भारी परेशानियां उठानी पड सकती है। फिलहाल बैंकों में थोड़ा बहुत निकासी हो रही है। कैश नहीं आया तो एक-दो दिन में निकासी बंद हो सकती है। कैशलेस लेन-देन ही होगा।

स्टेट बैंक कर्वी सहित विभिन्न बैंकों के उपभोक्ताओं की भीड़ को निराश होकर बैंकों से लौटते देखा गया। लोगों का कहना था कि मन मुताबिक हमारे खाते से हमारा ही पैसा नहीं निकाला जा रहा है। बैंक कर्मचारी भरे गये निकासी फार्म को अस्वीकृत कर दे रहे हैं। कर्मचारी अपने मुताबिक अल्प धनराशि फार्म में अंकित कराकर रुपये की निकासी कर रहे हैं। यदि किसी को एक लाख की जरूरत है तो उसके एवज में 25 से 50 हजार रुपये ही निकाले जा रहे हैं। इस बात को लेकर उपभोक्ताओं और बैंक कर्मचारियों में खासी बहस हो रही है। बैंक कर्मचारी उपभोक्ताओं को बैंक में अधिक धनराशि न उपलब्ध होने का हवाला देकर संतुष्ट करने का प्रयास करते हैं।

पांच माह पहले देश में हुई नोटबंदी के दौरान ऐसे हालात पैदा हुये थे। जब उपभोक्ता अपना ही पैसा अपनी मनमर्जी के नहीं निकाल पा रहे थे। कुछ ऐसे ही हालात फिर बन रहे हैं। अधिकांश बैंकों के एटीएम का संचालन रुपये के अभाव में बंद होने की कगार पर पहुंच गये हैं। एटीएम से निराश उपभोक्ता बैंक शाखाओं की ओर रुख कर रहे हैं। वहां भी उन्हें नोटबंदी के दौरान हुई परेशानी जैसी स्थिति से गुजरना पड रहा है। बड़े नोट तो मिल ही नहीं रहे, छोटे नोट व सिकके देकर उपभोक्ताओं को संतुष्ट कर रहे हैं।

स्टेट बैंक कर्वी शाखा के मुख्य प्रबंधक डीके निगम ने बताया कि रिजर्ब बैंक से बडे नोट नहीं आ रहे। इस कारण कैश की किल्लत उत्पन्न हो गई है। इसी तरह उपभोक्ताओं द्वारा जमा की गई धनराशि दूसरे उपभोक्ताओं को थोडा़-थोडा निकासी की जा रही है। एटीएम का भी संचालन लगातार नहीं कर पा रहे।

About the Reporter

  • राजकुमार याज्ञिक

    चित्रकूट जनपद के ब्यूरो चीफ एवं भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ के जिलाध्यक्ष राजकुमार याज्ञिक चित्रकूट जनपद के एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। पत्रकारिता में स्नातक श्री याज्ञिक मुख्यतः सामाजिक व राजनीतिक मुद्दों पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं।, .



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