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चोर मानसिकता भ्रष्टाचार की बड़ी वजह

जीवन में कल बड़ा महत्वपूर्ण होता है। कल ही हमारे देश और समाज का इतिहास है। कल से भविष्य तय होता है और मानसिकता के स्तर का भी पता चलता है। ऐसा ही एक कल मेरे जीवन में कल आया। मैं विवेक तिवारी के साथ सौरभ जायसवाल की राॅयल इनफील्ड की एजेंसी में बैठा हुआ था। 

एकाएक एक आदमी की एंट्री होती है , वो आटो ड्राइवर था। वो आटो का बीमा कराना चाहता था। बीमा करवाने के लिए जानकारी लेते हुए बैक डेट में बीमा हो जाने की बात कहने लगा ऊपर से तुर्रा ये कि कुछ पैसा वो अलग से दे देगा। हम सभी अचंभित हुए कि इसे बैक डेट से बीमा चाहिए। 

मेरे मुख से अनायास निकल पड़ा कि देखिए भ्रष्टाचार की मानसिकता यही है ! आम आदमी ही भ्रष्ट है और जब आम आदमी भ्रष्ट हो तब नेता और अफसरों के भ्रष्ट होने पर आश्चर्य कैसा ? ये चोर मानसिकता है जो भारत के जन - जन में व्याप्त है। नेता और अफसर भी हमारे बीचे से बनते हैं। हम उनसे पैसे के बदले व्यक्तिगत लाभ के लिए बैक डेट में बीमा हो जाने की तरह बात करते हैं। 

उस आटो ड्राइवर को पता ही नहीं था कि गाड़ियों का बीमा अब आनलाइन हो चुका है। जिससे बैक डेट की सुविधा का अंत हो चुका है। फिर भी भारत की जनता जुगाड़ के बारे में सोचती है। उसे उम्मीद थी कि शायद कुछ जुगाड़ अभी भी हो जाए ! 

उस आटो ड्राइवर की पल भर की पेशकश से भारत में व्याप्त कमीशनखोरी / घूसखोरी और निर्माण कार्यों के भ्रष्टाचार की कहानी स्वयं समझ में आने लगती है। एक नेता से ईमानदार होने की उम्मीद क्यों करें ? जब जनता के रूप में डेट आफ बर्थ से लेकर बैक डेट से बीमा तक में चोर की मानसिकता काम कर रही है अर्थात कोई छोटा चोर है तो कोई बड़ा चोर है। 

कुछ ईमानदार और संवेदनशील लोगों की वजह से इस देश और समाज की नींव नहीं हिलती वरना कब की ये राष्ट्र नामक इमारत ढह जाए। वक्त अभी भी है कि स्वयं में परिवर्तन के साथ हर प्रकार के भ्रष्टाचार का अंत करने हेतु प्रयास करना चाहिए। इस देश में पर्यावरण , भ्रष्टाचार , कमीशनखोरी , स्वास्थ और शिक्षा जैसे तमाम महत्वपूर्ण जमीनी मुद्दों पर काम करने की जरूरत है। यह सरकार और संस्थागत के संयुक्त प्रयास से ही संभव हो सकेगा वरना अंदुरूनी हालात बड़े भयावह हैं जिन्हें देखने के लिए सूक्ष्म दृष्टि चाहिए वैसे ही जैसे अर्जुन को भगवान को देखने के लिए दिव्य दृष्टि चाहिए थी। 

About the Reporter

  • सौरभ चन्द्र द्विवेदी

    समाचार विश्लेषक के रूप में बुन्देलखण्ड के मुद्दों पर पैनी नजर रखने में माहिर हैं सौरभ द्विवेदी। विगत 10 वर्षों से भी अधिक समय से पत्रकारिता से जुड़े रहकर समाज व राजनीति पर सैकड़ों लेख लिखे और विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित भी हुए।, स्नातक

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