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आसरा के ठेकेदार ने गरीबों को कर दिया बेआसरा

समाजवादी सरकार की आसरा आवास योजना सीएनडीएस के लापरवाह प्रशासन और कमाई ठेकेदार की सांठ-गांठ के कारण गरीबों के लिये मुशीबत बन गई है। पक्के आवास बनाने का सपना दिखा ठेकेदार ने गरीबों के आशियाने ध्वस्त करा दिये और अब बनाने में वसूली के लिये तरह तरह से उत्पीडन किया जा रहा है। अकेले धनुषधारी व हटवारा मुहल्लों में दो दर्जन से अधिक आवासों की छत जान बूझकर पैसा वसूलने के फेर में नही डाली जा रही है। इससे गरीबों को जहां चिलचिलाती धूप में सिर छिपाने को जगह नही मिल रही वहीं बरसात में गृहस्थी बचाने का कोई आसरा भी नही दिख रहा है।

गौरतलब है कि कस्बे में आसरा योजना के लगभग 900 आवास बनाने का काम सीएनडीएस को सौंपा गया हैं संस्था के परियोजना प्रबंधक बीपी सिंह व विभाग के पेटी ठेकेदार की सांठ-गांठ के चलते चिन्हित गरीबों के पुराने आवास ध्वस्त कर जमीन तो समतल करा दी गई पर उन्हें शीघ्र नया आवास उपलब्ध कराने में कोई सक्रियता नही दिखाई जा रही। योजना के नियमों के मुताबिक एक आवास के लिये 3 लाख 80 हजार रुपये की लगात तय की गई है।

लाभार्थी को केवल 25 वर्ग मीटर समतल जमीन देनी है। इसके लिये ठेकेदार ने जल्द काम कराने का झांसा दे उनके पुराने मकान तो ध्वस्त करा दिये पर अब काम पूरा कराने में निरन्तर हीलाहवाली की जा रही है। यही नही गरीबों से निर्माण पूरा करने के लिये कमीशन के रुप में मोटी रकम मांगी जाती है जो पैसा नही देते उनसे श्रमिक के रुप में काम लिया जा रहा है।
जबकि परियोजना की गाईड लाईन में स्पष्ट किया गया है कि कोई भी व्यक्ति अपने आवास के निर्माझा में अगर श्रम करेगा तो उसे भी अन्य मजदूरी की तरह दैनिक पारीश्रमिक दिया जायेगा। धनुषधारी मुहाल के लाभार्थी अजय सिंह, विजय बहादुर, लाल बहादुर, रामस्वरुप सोनी, राम जानकी, मीरा व हटवारा के पप्पू मोदी आदि बताते है कि उनके आवास की दीवारे महीनों पूर्व तैयार कर ली गई थी पर अब तक टेटर नही डाला गया। दीवारों की चुनाई में भी विभाग के मसाला बनाने के एक छह के मानक में एक दस व 12 का मसाला लगाया गया है। काम में बिलम्ब होने का कारण है कि वह स्टीमेट के मुताबिक काम कराना चाहते है जो लाभार्थी का अधिकार भी है पर ठेकेदार इसके मुताबिक कार्य करने को तैयार नही। धांधली के इस गतिरोध के चलते ठेकेदार दो महीने से निर्माण कार्य ठप किये हुये है।

 

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