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पनामागेट: नवाज समेत कई देशों के बड़े सियासी परिवारके खिलाफ जांच के लिए JIT बनाई

पनामागेट के नाम से चर्चित पनामा पेपर्स लीक से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले पर पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने नवाज शरीफ और उनके परिजनों की विदेशों में संपत्तियों के मामले की जांच के लिए जॉइंट इनवेस्टिगेशन टीम (JIT) के गठन का आदेश दिया है। JIT को 60 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करनी होगी। नवाज शरीफ भी JIT के सामने पेश होंगे। जांच रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश होने के बाद मामले की कोर्ट में फिर से सुनवाई होगी। JIT जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होगी।

पनामा पेपर्स लीक से कई देशों में सियासी हलचल मच गई। जिन 143 राजनेताओं के बारे में इसमें जिक्र किया गया है उनमें से 12 तो अपने देशों के राष्ट्राध्यक्ष थे। आइसलैंड और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री(नवाज शरीफ), यूक्रेन के राष्ट्रपति, सऊदी अरब के शाह और डेविड कैमरन के पिता का नाम प्रमुख था। इनके अलावा लिस्ट में व्लादिमीर पुतिन के करीबियों, अभिनेता जैकी चैन और फुटबॉलर लियोनेल मेसी का नाम भी था। हालांकि इन हस्तियों ने ऐसा कर कोई गैर-कानूनी काम किया है, इस बारे में पेपर्स में कुछ नहीं कहा गया है। आईसलैंड के PM ने तो अपने परिवार के बारे में खुलासे के बाद इस्तीफा दे दिया। तब से नवाज शरीफ को घेरने में विपक्षी दल लगे हुए हैं।

सत्ताधारी पीएमएल-एन ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। दूसरी तरफ विपक्षी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी ने नवाज शरीफ से नैतिकता के आधार पर इस्तीफे की मांग की है। पीटीआई के प्रवक्ता ने कहा कि नवाज के पीएम रहते जेआईटी स्वतंत्र तौर पर जांच नहीं कर सकती।

पनामा पेपर्स लीक में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और उनके परिजनों पर विदेशों में अघोषित संपत्तियां रखने का आरोप लगा था। सुप्रीम कोर्ट ने 23 फरवरी को भ्रष्टाचार से इस जुड़े मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखा था। फैसले के मद्देनजर इस्लामाबाद में कड़ी सुरक्षा का इंतजाम किया गया था।

इस्लामाबाद समेत पूरे पाकिस्तान में इस फैसले का सांसें रोककर इंतजार हो रहा था। राजधानी इस्लामाबाद के रेड जोन को 'रेड अलर्ट' पर रखा गया था। रेड जोन और आस-पास के इलाकों की सुरक्षा और शांति बनाए रखने के लिए करीब 1,500 पुलिसवाले, रैंजर्स और फ्रंटियर कॉन्स्टेबुलरी के जवानों को तैनात किया गया है।

स्पेशल ब्रांड के अधिकारियों समेत पुलिस अधिकारियों को खुफिया सूचना जुटाने और उसके लिहाज से समय पर कार्रवाई करने के लिए तैनात किया गया था। रेड जोन के सभी एंट्री पॉइंट्स पर कड़ी सुरक्षा जांच की जा रही थी। सिर्फ स्थानीय लोगों, सरकारी अधिकारियों समेत संबंधित लोगों को ही एंट्री दी गई।

पनामा पेपर्स की जांच कर रहे पत्रकारों ने पाया कि मोसेक फोंसेका कंपनी पूरी दुनिया में कम से कम दो लाख कंपनियों से जुड़ी हुई है जो इसके लिए एजैंट का काम करते हैं और पैसा एकत्र करते हैं। कंपनियों से सीधे सौदेबाजी करने की बजाय यह उन्हें सलाह देती है। कई स्थान पर यह दलाली भी करती है। तमाम कोशिशों के बाद भी यह साफ नहीं हो पाया कि इन कंपनियों के छिपे हुए मालिक कौन हैं। ज्यादातर में लोगों ने किसी दूसरे को नामांकित किया हुआ है। इस मामले में सबसे ज्यादा कंपनियां चीन व हांगकांग की पाई गईं। पैसा जमा करने के लिए सबसे सुरक्षित देश स्विट्जरलैंड व हांगकांग माने गए। इसके बाद पनामा का नंबर आता।