?> संस्कार देना माता-पिता का कर्तव्यः मां कनकेष्वरी देवी बुन्देलखण्ड का No.1 न्यूज़ चैनल । बुन्देलखण्ड न्यूज़ बांदरी के पुलिस थाना मैदान में आयोजित की जा रही श्रीम"/>

संस्कार देना माता-पिता का कर्तव्यः मां कनकेष्वरी देवी

बांदरी के पुलिस थाना मैदान में आयोजित की जा रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवे दिन परम पूज्य मां कनकेष्वरी देवी ने कहा कि प्रत्येक माता-पिता का कर्तव्य है कि वे अपने बच्चों को संस्कार दें। संस्कार जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। यदि आपकी संतान गलत रास्ते पर जाती है तो उसे कम से कम तीन बार अवष्य समझाएं। प्रेम और स्नेह से उसे सही रास्ते पर लाने का प्रयास करें। इसके बाद भी यदि संतान सही रास्ते पर नहीं आए तो फिर इसमें आपका दोष नहीं है। प्रारब्ध के कारण भी दिषाहीन संतानें घर में जन्म लेतीं हैं। विषमता से घर में अषांति पैदा होती है। बच्चों को ऐसे भी अपमानित न करें कि उसके घाव उसे जीवन भर सालते रहें।

भाव से मिलते हैं भगवान: मां कनकेष्वरी देवी ने कहा कि भाव बिना बाजार मंे कोई भी वस्तु नहीं मिलती। ऐसे में बिना भाव के भगवान कैसे मिल सकते हैं। बिना देखे व्यक्ति के मन में भाव नहीं बनता है। यदि दुकान में कोई वस्तु लटक रही है और वो पसंद आ गई तो हमारा मन उसको खरीदने का बन जाता है। पर श्रीमद्भागवत के दसवें स्कंद में आता है कि भागवत उस भाव को प्रदान करती है। भाव से ही भगवान का अनुभव किया जाता है। भगवान को तुलसीदल और बिल्वपत्र अर्पित करने से हमारी धर्मभावना में वृद्धि होती है। पुष्प अर्पित करने से समृद्धि मिलती है। फल चढ़ाने से जिस प्रकार के मनोरथ हों वे पूरे हो जाते हैं। पर यह सब दिव्य सामग्री मीठे भाव से अर्पित की जाना चाहिए।

हम स्वयं को भूल जाते हैं: मां कनकेष्वरी देवी ने कहा कि इंसान माया के चक्कर में उलझकर स्वयं अपने के लिए भूल जाता है। यदि इंसान को यह बात समझ में आ जाए कि पूरा जगत परमात्मा बनाने वाला है। जगत परमात्मा का स्वरूप है, तो वह अपना कल्याण कर सकता है। इंसान को कभी किसी से बेदभाव नहीं करना चाहिए। किसी से द्वेष न करे, दुख न पहुंचाए। न जाने इंसान को किस रूप में नारायण मिल जाएं।

भजन में एकाग्रता नहीं: मां कनकेष्वरी देवी  ने कहा कि आज इंसान भक्ति तो करता है पर सच्चे मन से नहीं । तुम भजन करते भी तो एकाग्रता से नहीं करते।तुम भजन भगवान के लिए नहीं अपने लिए करते हो। भक्ति - भजन करने से अपनी आत्मा को विकास हो जाता है। हमें नीति के रास्ते पर चलकर ही सच्चे सुख की प्राप्ति हो सकती है। अनीति का मार्ग पतन का मार्ग है। अनीति पर चलने वाला कितना भी बड़ा बन जाए पर सुखी नहीं हो सकता। देखने में आता है कि ज्यादातर बड़े घरों के लोग ही आत्महत्याएं करते हैं। हत्याएं भी करोड़पतियों के यहां होती हैं जबकि झोपड़ियों में रहने वाले लोग ज्यादा आनंद से रहते हैं।

दूर-दूर से आए कथा श्रवण करने: बांदरी में आज साप्ताहिक हाट का दिन होने के कारण कथा का श्रवण करने दूर-दूर से लोग आए। लोगों ने चिलचिलाती धूप की परवाह नहीं की। कथा का श्रवण करने मुख्य यजमान गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह, भाजपा मोर्चा की जिलाध्यक्ष श्रीमती सरोज सिंह, मंत्री प्रतिनिधि लखन सिंह ,सरपंच संध के जिलाध्यक्ष सतेंद्र सिंह, जिलापंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि अषोक सिंह बामोरा, म.प्र. तुलसी साहित्य अकादमी के अध्यक्ष पं. महेषदत्त त्रिपाठी समेत मालथौन, रजवांस, बरौदियाकलां, बांदरी के बड़ी संख्या में कार्यकर्ता व धर्मप्रेमी मौजूद थे। कथा के बाद मुख्य यजमान गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह, भाजपा मोर्चा की जिलाध्यक्ष श्रीमती सरोज सिंह ने श्रीमद्भागवत की आरती की।