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पर्दा प्रथा की जुबानी मोक्ष की हकीकत

दो - तीन दिन से साधू - संत / सन्यासी की तरह सुबह पांच बजे स्वयं नींद खुल जाती है। मेरे समय के लगभग घंटे - दो घंटे पूर्व ही। फिर स्वयं ही कड़क चाय बनाता और पी कर बाहर टहलने निकल जाता। आज एक देशी कुत्ते से भेंट हुई। वो पहले मेरी ओर आया , मैंने उसे मुहब्बत से समझा एक तरफ कर दिया। 

होटल में कुछ परिचितों के साथ खड़ा था। सड़क के दूसरी ओर से घूंघट काढ़े कोई महिला आ रही थी। वो अपनी रफ्तार में चली जा रही थी। कुत्ता सड़क के दूसरे किनारे था। 

कुत्ता महिला को देखकर भौंकने लगा। मैंने परिचित व्यक्ति से कहा , देख लो इस कुत्ते को भी घूंघट पसंद नहीं है। इसके भौकने का मतलब ही है कि यह पर्दा क्यों ? वह भी सड़क के किनारे इतना गहरा घूंघट , जिस सड़क से पल - पल में तेज रफ्तार से ट्रक निकलते हैं। थोड़ी सी चूक हुई कि दुर्घटना घट सकती है। 

बात - बात में महाभारत के उस दृश्य में पहुंच गया। जो बचपन में टीवी पर देखा और सुना था। बड़े बुजुर्गों ने बताया भी था कि धृतराष्ट्र अंधे थे। इसलिये उनकी पत्नी गांधारी ने आंखो पर पट्टी बांध रखी थी। मरते दम तक की उनकी प्रतिज्ञा थीं। फिर भी चेहरा खुला रहता था। 

लेकिन वह तो कुछ नहीं था। जो आज के जमाने में है। इस्लाम धर्म की औरतों का पर्दा किसी से छिपा नहीं है। ऐसे ही हिन्दू धर्म में भी आज भी पर्दा चारदीवारी से लेकर सड़क में चलने तक है। यह पर्दा किसलिए ? कोई चेहरा ना देख ले ? अगर सड़क पर नजर धोखा खा गई तो दुनिया से उठ सकती हैं ? 

ये भी सत्य है कि कोई भी बात सही समय पर सही पटल पर रखनी चाहिए। वैसे सोशल मीडिया पर पर्दादारी नहीं है , सिवाय अपवाद स्वरूप एंजल प्रिया के ! लेकिन यहाँ बात रखने से प्रसार छोटे कस्बे - गांव तक हो सकता है। इस अनावश्यक पर्दे पर चर्चा हो सकती है। 

यह भी सत्य है कि जब किसी ने ठान लिया हो नहीं बदलना तो विकराल गर्मी में काला लिबास तलुवे से लेकर सर के ऊपरी हिस्से तक शोभायमान रहता है। औरतों पर यह एक तरह का भारी - भरकम मनोविज्ञान है वरना जेल में रहना कौन पसंद करता ? चलते हुए साफ नजरों से कौन नहीं देखना चाहता ? 

समझने योग्य है कि आप ड्राइव कर रहे हों और कुहरा पड़ रहा हो , वो सामने कांच पर जम गया तो चलना मुश्किल हो जाता है। आप सर्च लाइट भी लगाते हो और एक औरत जिंदगी भर अपनी जिंदगी सर्च नहीं करने पाती। हाँ जीवन एक अस्तित्व है और अपनी जिंदगी का अस्तित्व औरत हो या पुरूष सभी को महसूस करना चाहिए। चूंकि पुराणों के मुताबिक मोक्ष सभी को चाहिए तो पर्दे और दुनियाभर के तमाम गैरजरूरी बंधन , आडंबर आदि की वजह से मोक्ष तो नहीं मिलता।

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