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जिले का नाम रोशन करने वाला हीरा विभाग अव्यवस्थाओ का शिकार 

चार सिपाही, तीन कार्यालय कर्मचारीयो के भरोस चल रहा विभाग

अधिकारी, निरीक्षक विहीन हीरा कार्यालय

विश्व भर में हीरा के नाम से जाने जाना वाला विभाग अव्यवस्थाओ का शिकार हुआ है जबकी उक्त विभाग में करोडो के हीरे जमा होते है तथा शासन को करोडो का राजस्व प्राप्त होता है उक्त विभाग की हालत वर्तमान समय में बदतर बनी हुई है जहां एक ओर विभाग में अधिकारी कर्मचारीयों की भारी कमी है वहीं दुसरी ओर धीरे धीरे क्षेत्र की उथली हीरा खदाने बंद होती जा रही है इस ओर किसी भी जनप्रतिनिधी द्वारा ध्यान नही दिया जा रहा।

जबकी देश में पन्ना जिला ही एक मात्र स्थान है जहां पर जेम क्वाल्टी का विश्व प्रसिद्ध हीरा मिलता है। विभाग में वर्षो से हीरा अधिकारी निरीक्षक के पद खाली पडे है खदानो में ड्युटी देने वाले मात्र चार सिपाही पदस्थ है धीरे धीरे रिटायर्ड होने के बाद नये सिपाहीयों की भर्ती नही की गई तथा कार्यालय में भी मात्र तीन कर्मचारी पदस्थ है आज से लगभग 15 वर्ष पूर्व पन्ना तहसील अन्तर्गत दर्जनो स्थानो पर हीरा की उथली खदाने संचालित होती थी।

जिसमें प्रमुख स्थान मनौर, महुआ टोला, गहलोत का शेहा, बरम की कुईया, सेहा सालिकपुर, खिन्नी घाट, सकरिया, चौपडा सहित अनेक स्थानो पर हीरा की खदाने संचालित होती थी जिसमें हजारो लोगो को रोजगार मिलता था उक्त खदाने धीरे धीरे बन्द होती गई तथा राजस्व की अधिकांश जमीन वन विभाग द्वारा अपने कब्जे में कर ली गई जिससे शासकीय भूमि पर हीरा खदाने संचालित नही हो रही है।

मात्र वर्तमान समय में दो स्थानो पर ही हीरा खदाने चल रही है जिसमें कृष्णा कल्याणपुर, पटी बजरीया तथा सकरिया ग्राम के चौपडा मे हीरा की शासकीय जमीन पर खदाने संचालित हो रही है। शेष उथली खदाने लोगो की निजी जमीन पर चल रही है। वन विभाग द्वारा लगातार राजस्व की जमीन पर अतिक्रमण किया गया जिससे हीरा कारोबार बन्द होता गया। स्थानीय जन प्रतिनिधयों ने इस ओर ध्यान नही दिया जिसका परिणाम यह है की विश्व में पन्ना जिले में ही मिलने वाला अमूल्य रत्न हीरा कारोबार बन्द होने की कगार में पहुच गया है। जबकी पन्ना जिले का विकास हीरा एवं पर्यटन पर ही हो सकता है यदि हीरा व्यवसाय को बढावा दिया जाये तो इस जिले की तकदीर एवं तसवीर बदल सकती है।

वन विभाग हीरा व्यवसाय बन्द कराने में सबसे बडा बाधक वन एवं राजस्व की सीमा का निर्धारण न होने के चलतें वन विभाग द्वारा लगातार राजस्व की जमीन पर कब्जा किया गया तथा जिन जमीनो पर हीरा की खदाने संचालित होती थी वहां पर वन विभाग ने खकरी बनाकर अपने कब्जे में कर लिया गया जब की उक्त स्थानो पर इमारती पेड आज भी उपलब्ध नही है। वेशकीमती हीरा हर जगह नही निकल सकता जबकी वन एवं जगल कही भी लगाये जा सकते है इस लिए हीरा खदानो को प्राथमिता होनी चाहिए जबकी इस जिले में उल्टा काम चल रहा है हीरा खदाने बन्द हो रही तथा वन विभाग हीरा धारित खदानो पर कब्जा कर रहा है। ऐसा भी नही है जंगल के अन्दर अवैध रूप से हीरा खदाने संचालित हो रही है।

और यह सब अवैध कारोबार वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी की मिलीभगत से चल रहा है यदि पन्ना जिले का लोग विकास चाहते है तो जिले के जिम्मेवा जन प्रतिनिधियों को हीरा खदानो के लिए जमीन उपलब्ध कराने के लिए प्रद्रेस स्तर पर पहल करनी होगी तथा वन राजस्वसीमा का निपटारा करा कर हीरा खदानो के लिए अवैध रूप से जंगल द्वारा हथियाई गई जमीन वापिस करानी होगी। जिससे उथली तथा गहरी हीरा खदाने संचालित हो सके। वर्ष 2018 में बडे बडे हीरे गरीब लोगो को खदान खोदते हुए प्राप्त हुए है जिससे आम लोगो की रूची इस ओर बढी है दिसम्बर माह में चार करोड 36 लाख 8 सौ 28 की राशि के हीरे नीलाम हुए है। 

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