बाँदा-चित्रकूट सांसद भैरों प्रसाद मिश्रा "/>

भैरों मिश्रा बने पूरे देश मे नम्बर वन सांसद

बाँदा-चित्रकूट सांसद भैरों प्रसाद मिश्रा ने अपने क्षेत्र के साथ-साथ पूरे बुन्देलखण्ड का नाम रोशन किया है। जनता के हितों की आवाज संसद में उठाना हो तो भैरों प्रसाद मिश्रा का कोई सानी नहीं। ये हम नहीं कह रहे बल्कि संसद भवन में उनके प्रयास खुद ही यह कहानी कह रहे हैं।

 

एक आदर्श सांसद के तीन पैमाने होते हैं सदन में अधिक से अधिक उपस्थिति, जनहित के सवाल पुछना और मुद्दों पर बहस। इस पैमाने पर बुन्देलखण्ड के बाँदा चित्रकूट सांसद भैरों प्रसाद मिश्रा ने पूरी तरह खरे उतरते हुए देश के बाकी सांसदों को पीछे छोड़ दिया है। सौ फीसदी संसद में उपस्थिति और सबसे ज्यादा बहस करने के साथ सवाल पूंछने में बाँदा सांसद नंबर वन साबित हुए हैं।

पीआरएस रिसर्च की रिपोर्ट में सदन में सौ प्रतिशत उपस्थिति वाले जिन सात सांसदों की लिस्ट जारी की गई है, उसमें भैरो प्रसाद मिश्रा नंबर वन हैं। सवाल और बहस का हिस्सा ज्यादा होने के कारण भैरों प्रसाद ने अन्य छः सांसदों को पीछे छोड़ पहला स्थान प्राप्त किया है।

पीआरएस के आंकड़ों के मुताबिक सौ फीसदी उपस्थिति तो है ही इसके अलावा भैरों प्रसाद मिश्रा ने 1468 डिबेट में हिस्सा लेने के साथ-साथ 342 सवाल भी पूंछे। इस प्रकार उपस्थिति, बहस में सहभागिता और सवालों की संख्या का औसत निकालें तो सबसे अव्वल भैरों प्रसाद निकलते हैं। इसके अलावा 9 प्राइवेट बिल भी उनके खाते में हैं।

दूसरे स्थान पर हैं महाराष्ट्र की मुंबई नाॅर्थ सीट से सांसद गोपाल शेट्टी। तीसरे स्थान पर अमृतसर के कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला। चैथे स्थान पर अहमदाबाद वेस्ट से भाजपा सांसद किरीट प्रेमजी भाई सोलंकी। पांचवे स्थान पर ओड़िसा के जगतसिंहपुर सीट के बीजद सांसद कुलमणि। छठे स्थान पर फतेहपुर सांसद साध्वी निरंजन ज्योति। जबकि सातवें स्थान पर हरियाणा के सोनीपत सांसद रमेश चंद्र कौशिक रहे।

अपने क्षेत्र में रेलवे लाइन दोहरीकरण या इलेक्ट्रिफिकेशन का मामला हो अथवा अन्ना पशुओं, बिजली, पानी, सड़क जैसी मूलभूत आवश्यकतायें व समस्याओं का मामला, सभी में सांसद भैरों प्रसाद मिश्रा ने अपनी रुचि दिखाई और देश के अन्य सांसदों के लिए एक नजीर भी पेश की कि एक सांसद अपने क्षेत्र में लोकप्रिय कैसे हो सकता है। भैरों प्रसाद के विरोधियों के लिए भी एक तरह से जवाब है, जो उन्होंने काम करके साबित किया है। आज उन्ही के प्रयासों का परिणाम है कि विगत कई वर्षों से रेलवे लाइन दोहरीकरण व इलेक्ट्रिफिकेशन के लिए जो मांग उठ रही थी, उसे रेलवे ने स्वीकार कर मंजूरी दी।



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