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पुस्तकीय संस्कृृति को बढ़ावा देने वाला माध्यम है पाठक मंच पुस्तक परिचर्चा

विश्वविद्यालय पाठक मंच, सागर (इकाई-साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद,भोपाल) के तत्वावधान में पुस्तक परिचर्चा गोष्ठी तथा कवि चैपाल का आयोजन डाॅ. हरीसिंह गौर विष्वविद्यालय के आचार्य नन्ददुलारे वाजपेयी सभागर में किया गया। कार्यक्रम में विष्वविद्यालय पाठक मंच सागर के केन्द्र संयोजक डाॅ. शशि कुमार सिंह ने आगुन्तक अतिथियों का स्वागत किया तथा समीक्ष्य पुस्तकों से सभी को अवगत कराया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डाॅ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के कुलपति प्रो. आर.पी.तिवारी ने विश्वविद्यालय पाठक मंच को पुस्तकीय संस्कृति को बढ़ावा देने वाला श्रेष्ठ माध्यम बताया। उन्होनें कहा कि इस कार्यक्रम से निश्चित रूप से समीक्ष्य पुस्तक को पढ़ने के प्रति जिज्ञासा जागृत हुई है। यह पुस्तक परिचर्चा मात्र साहित्य अकादमी से प्राप्त पुस्तकों पर ही नहीं हमारे विश्वविद्यालय और सागर नगर के विद्वान लेखको के द्वारा लिखित पुस्तक पर भी होनी चाहिए।

विश्वविद्यालय प्रशासन इसमें अपेक्षित सहयोग करेगा। मुख्य अतिथि प्रो. संतेाष शुक्ला ने कहा कि वैचारिक धरातल पर समृद्धि को प्राप्त करना मानव के व्यक्त्वि विकास के लिए नितात आवष्यक है। जिसका अनिवार्य और सर्वथा उचित माध्यम है श्रेष्ठ पुस्तकों का समुचित अध्ययन। पाठक मंच इस दिशा में महत्वपूर्ण उपक्रम है। भारती ठाकुर द्वारा लिखित पुस्तक    ‘‘नर्मदा परिक्रमा’’-एक अन्तर्यत्रा’’ की समीक्षा करते हुए डाॅ. आर.वी.अनुरागी ने कहा कि नर्मदा परिक्रमा की प्रेरणा है नदियों के प्रति प्रेम भाव को समझना।

उन्होनें कहा कि यह पुस्तक नर्मदा के परिचायक के रूप में होते हुए उसके एतिहासिक, भौगोलिक और उसके सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करती है। जनसत्ता समाचार पत्र के  उपसम्पादक सूर्यनाथ सिंह की पुस्तक ‘‘नींद क्यों रात भर नही आती’’ की समीक्षा करते हुए डाॅ. सुजात मिश्रा ने कहा  इस पुस्तक का सबसे सशक्त पहलू है इसकी भाषा शैली जो एक सामान से कथनक को भी जीवन्त बना देती है।

उन्होनें कहा कि किस्सागाई के मूल्य भाव पर केन्द्रित ये उपन्यास का भी दिनों बाद हिन्दी के किसी आधुनिक लेखक की लेखनी से लिखी गई है। जो अपने पात्रानुकूल, परिवेशानुकूल और लच्छेदार भाषा में पाठक को बरबस बाध लेती है। कार्यक्रम के द्वितीय भाग में कवि चैपाल का आयोजन किया गया।

जिसमें सागर नगर तथा विश्वविद्यालय के कवियों ने अपने स्वरचित रचनाओं का पाठ किया। जिसमें निर्मल चन्द निर्मल, हरगोविन्द मिश्र, डाॅ. गजाधर सागर, पी.आर.मलैया, श्रीमती निरंजना जैन, डाॅ. अंकिता जैन, डाॅ. चंचला दबे- उस प्लेटफार्म पर जहाॅ मैं बैठी थी।, डाॅ. वर्षा सिंह-सरस्वती वंदना-मां तू कृपा कर दे लिपि लेखन वा दे।

मुकेश तिवारी, अक्षय अनुग्रह, नलिन जैन-तराने हर सफर में साथ जो हम गुनगुनाते है।, डाॅ. शरद सिंह-नये साल की धूप जब जब माथे को चूमें। अशोक तिवारी, श्रीमती निर्मला जैन-सुई ज्यों भोर चुभे रात ठिठुरे थर-थर काॅपे जो पीपर के पात।, प्रो. दिनेष-हव्वा कोई हव्वा तो नहीं। श्री लोकनाथ मिश्र ‘मीर’ अक्षर देवता अच्छा हुआ।

इस कवि गोष्ठी का संचालन डाॅ. अशोक मिजाज ने किया। तथा आभार हिन्दी विभाग के सहायक प्रध्यापक डाॅ. आशुतोष मिश्र ने किया। इस कार्यक्रम में उपस्थित सदस्य डाॅ. नौनिहाल गौतम, डाॅ. रामहेत गौतम, डाॅ. किरण आर्या, डाॅ. अरविन्द्र कुमार, डाॅ. अनिल जैन, रमेश दुबे, प्रो. अबिकादत्त शर्मा, राजेन्द्र प्रसाद, डाॅ. राघवेन्द्र प्रताप सिंह, डाॅ. आशीष द्विवेदी, डाॅ. आफरीन खान, विभिन्न विभागों के अध्यापक, शोध छात्र और छात्र आदि उपस्थित रहें।   
 

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