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खाद्य आत्मनिर्भरशीलता आवश्यक है- डाॅ0 त्रिलोचन महापात्रा

दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में भारत का विश्व में प्रथम स्थान - डाॅ0 महापात्रा

विकास की प्रक्रिया मूल से षिखर की ओर बढ़ा करती है, राष्ट्र जीवन का मूल ग्रामीण अंचल है, वहीं से देश और समाज के विकास की गंगा बढे़ यह चिन्तन था राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का। प्रकृति ने भारत को स्वयं पूर्ण बनाया है, कश्मीर से कन्याकुमारी तथा मणिपुर से कच्छ तक की इस भारत भू पर  समय -समय पर समाज को दिशा देने के लिये अनेक महापुरूषों ने जन्म लेकर तत्कालीन समाज को एक नई  दिशा देने का कार्य किया। 

एकात्म मानव दर्शन  के प्रणेता की स्मृति में राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख द्वारा स्थापित दीनदयाल शोध संस्थान कृषि विज्ञान केन्द्र, मझगवां, सतना एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के सयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय कृषि उद्यमी मिलन कार्यक्रम का शुभारम्भ डाॅ0 लोहिया सभागार उद्यमिता विद्यापीठ चित्रकूट में भारतीय अनुसंधान परिषद के महानिदेशक एवं कृषि विकास अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग नई दिल्ली के डाॅ0 त्रिलोचन महापात्रा, कृषि अनुसंधान परिषद जोन 09 जबलपुर के निदेशक डाॅ0 अनुपम मिश्रा, महात्मा गाॅधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 नरेश चन्द्र गौतम, दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन द्वारा दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया।

इस कार्यक्रम में मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ राज्य के 79 कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिकों के साथ ही एक-एक कृषि उद्यमियों ने प्रतिभाग किया। जिसमें आज प्रथम दिवस अतिथियों द्वारा सर्वप्रथम प्रदर्शनी का शुभारम्भ एवं अवलोकन किया गया तथा कृषि विज्ञान केन्द्रों द्वारा उनके क्षेत्रों में किये जा रहे कृषिगत विकास के कार्यों के माॅडल पर चर्चा की गयी।

प्रथम दिवस के तकनीकी सत्र में जबलपुर, बालाघाट, बैतूल, छतरपुर, छिन्दवाड़ा, दमोह, डिन्डौरी, हरदा, कटनी, मण्डला, नरसिंहपुर, पन्ना, रीवा, सागर, सिवनी, शहडोल, सीधी, टीकमगढ़, उमरिया, सिंगरौली,  रायसेन, सतना, बनखेड़ी, अनूपपुर, अशोक  नगर, बड़वानी, भिण्ड, दतिया, देवास, धार, गुना, ग्वालियर, झाबुआ, खण्डेहा, खरगौन, मंदसौर, मुरैना, नीमच, राजगढ़, शाजापुर,  उज्जैन, आगर मालवा, अलीराजपुर, बुरहानपुर, इन्दौर, रतलाम, सिहोर, भोपाल कृषि विज्ञान केन्दों के वरिष्ठ वैज्ञानिकों के साथ कृषि उद्यमियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में किये गये कार्यों का प्रस्तुतीकरण कर उन तकनीकों को एक-दूसरे के साथ साझा किया जिससे क्षेत्र के अन्य कृषि उद्यमियों को अधिक से अधिक लाभान्वित किया जा सके। 

महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 नरेशचन्द्र गौतम ने कहा कि पुरातनकाल से ही हमारी ग्रामीण बहने गोपालन करती थी वे स्वयं गाय का दूध दुह कर उससे विविध उत्पाद जैसे- दही, मखन, घी आदि तैयार कर घर की आवश्यकताओ की पूर्ती हेतु धनार्जन भी कर लेती थी। अतः हमें इन छोटी -छोटी तकनीकियों से प्रेरणा लेनी चाहिये इसी प्रकार  विदेशो में लोगों के पास समय का अभाव रहता है वे चूर्ण रूप में विविध उत्पादो को पसन्द करते हैं इसके लिये  हम प्याज, लहसुन, आंवला, मिर्चा आदि के चूर्ण बनाकर पैकेट तैयार कर निर्यात की व्यवस्था कर सकते हैं। 

डाॅ0 महापात्रा ने कहा कि चित्रकूट में विविध जिलों से आये हुये आप सभी बंन्धु भगनी परम सौभाग्यशाली  है जो आप दो दिवसीय कृषक उद्यमी मिलन कार्यक्रम में अपने-अपने क्षेत्रो में किये जा रहे विविध प्रयासों को साझा करेगें। पूरे समाज को अन्न देने के लिये आपके द्वारा जो अथक परिश्रम किया जाता है वह अत्यधिक महत्वपूर्ण कार्य है, क्योंकि सामाजिक स्थिरता के लिये खाद्य उत्पादन में आत्मनिर्भरता  आवश्यक  है।

जमीन दिन-प्रतिदिन कम हो रही है, लेकिन भोजन करने वालों की संख्या में लगातार वृद्धि हो़ रही है। इसके लिये हमें कम जमीन से अधिक उत्पादन के साथ-साथ उत्पादों का मूल्यवर्धन करके कृषकों की आय भी बढ़ानी है।  इस प्रगति से पर्यावरण में जो परिवर्तन आ रहे है, हमें उस दिशा मे भी ध्यान देना होगा। बाजार में किस उत्पाद की कमी है, उसके उत्पादन के बारे में यदि हम व्यवहारिक धरातल पर सोचेगें तो हमारी आय बढ़ेगी।

इसके साथ ही अलग-अलग क्षेत्रों से आये हुये उत्पादों में टैग लगाकर गुड एग्राीकल्चरल प्रेक्टिसेस (गैप) की जानकारी मिलेगी। टैग लगे ये उत्पाद जहां - जहां टैग के साथ जायेगा वहाँ-वहाँ आपकी पहचान बनती चली जायेगी। बियतनाम जैसा एक छोटा देश भारत से कृषि तकनीकी की पढ़ाई करने के बाद आज गैप के माध्यम से कृषि क्षेत्र में प्रगति कर रहा हैं।

दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन ने अपने विचार रखते हुये कहा कि राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख व्यक्ति के सर्वांगीण विकास की बात करते थे जिसे उन्होंने संस्थान के विविध प्रकल्पों के माध्यम से व्यवहारिक धरातल पर उतारने के साथ प्रयास किये, इन्हीं प्रयासों में कृषि के क्षेत्र में कृषि विज्ञान केन्द्र के माध्यम से क्षेत्र के किसानों को नवीन तकनीकियों की जानकारी देने के साथ उनकी आय में वृद्धि में सतत् प्रयास किया जा रहा है।

नरसिंहपुर, काकेर, नीमच, रतलाम, बुरहानपुर आदि विविध क्षेत्रों से आये हुये कृषि उद्यमियों ने अपने-अपने क्षेत्र में किये जा रहे विविध उत्पादों के द्वारा आय में वृद्धि पर अपने विचार रखे । कृषिगत विकास से सम्बन्धित विविध तकनीको के प्रकाशन का विमोचन भी अतिथियों द्वारा किया गया।
 

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