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महिला सुरक्षा बड़ा मुद्दा लेकिन कांग्रेस भुना नहीं पाएगी

मध्य प्रदेश की जिन हाई प्रोफाइल सीटों पर मीडिया की नजरें हैं उनमें बुधनी के बाद संभवत: सर्वाधिक चर्चित दमोह विधानसभा सीट है। इसका कारण यह नहीं है कि यहां प्रदेश के वित्त मंत्री और दिग्गज भाजपा नेता जयंत मलैया को कांग्रेस के अपेक्षाकृत कम अनुभवी और युवा नेता राहुल सिंह चुनौती दे रहे हैं, बल्कि यह सीट इसलिए भी चर्चित है क्योंकि भारतीय जनता पार्टी के बागी नेता और पूर्व मंत्री रामकृष्ण कुसमरिया भी मैदान में हैं।

कुमारिया की मौजूदगी से संघर्ष त्रिकोणीय हो गया है यह तो नहीं कहा जा सकता, लेकिन वे भारतीय जनता पार्टी को थोड़ा बहुत नुकसान पहुंचा सकते हैं, ऐसा यहां पर कुछ लोगों का मानना है। हालांकि कुछ का यह भी कहना है कि कुसमरिया के आने से एंटी इनकंबेंसी फैक्टर अब्सॉर्ब हो जाएगा।

यानी जो वोट सत्ता विरोधी होने के चलते कांग्रेस को मिल सकते थे वे अब कुसमरिया के पक्ष में चले जाएंगे। इस तरह भाजपा समर्थित कुसमरिया की एंट्री को वाइल्ड कार्ड की तरह देख रहे हैं जिसमें एडवांटेज और डिसएडवांटेज दोनों हो सकते हैं।
लेकिन जनता के बीच तो माहौल कुछ अलग दिखाई देता है।

बुंदेलखंड के क्षेत्रों की तरह पानी और जन सुविधाएं लोगों की प्राथमिकता में है, कुछ का मानना है कि वित्त मंत्री रहते हुए जयंत मलैया ने क्षेत्र में जन सुविधाओं का विस्तार किया है और खासकर पानी की समस्या को बहुत हद तक सुलझा लिया है। वहीं कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी पानी की समस्या को लेकर सरकार के प्रति नाराजगी देखने को मिल रही है।

प्रस्तावित जल परियोजनाओं पर भी जनता की नजर है और उन्हें उम्मीद है कि जैसे ही काम पूरा होगा पानी को लेकर उनका भटकाव और थोड़ा कम हो सकेगा। बेरोजगारी और पलायन भी बुंदेलखंड के अन्य क्षेत्रों की तरह यहां पर चिंता का विषय है। क्षेत्र में कोई बड़ा उद्योग धंधा स्थापित ना हो पाना भी कहीं ना कहीं चुनौती बना हुआ है, लेकिन सरकार की विभिन्न योजनाओं के चलते बड़ी संख्या में लाभान्वित होने वाले लोगों को उम्मीद है कि देर-सवेर उनकी समस्याएं खत्म अवश्य होंगी। 

अनेक उपनगरीय इलाकों के विपरीत दमोह में महिला सुरक्षा जैसे मुद्दे को प्रमुखता से देखा जा रहा है। बात करने पर लगता है कि मध्यप्रदेश में महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध के आंकड़े जनता को चिंतित करते हैं। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या इन आंकड़ों को लेकर जनता की नाराजगी का फायदा कांग्रेस को मिलेगा ?

इस बारे में बात करने पर बहुत से लोग निराशा प्रकट करते हुए कहते हैं कि कांग्रेस ने जिस प्रत्याशी को चुनावी टिकट दिया है वह स्वयं ही आरोपी रहा है और परिवार की एक महिला द्वारा ही उस पर दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए मुकदमा दायर किया जा चुका है। यद्यपि कांग्रेस प्रत्याशी राहुल सिंह इन आरोपों से बरी हो गए हैं, लेकिन जनता का यह मानना है कि राहुल पर आरोप लगना और फिर उसके बाद आरोपों से उनकी मुक्ति कहीं ना कहीं धनबल और बाहुबल का ही परिणाम है, इसीलिए राहुल को लेकर थोड़ी आशंका भी है। खासकर महिला वर्ग के बीच कांग्रेस प्रत्याशी का चेहरा उतना लोकप्रिय नहीं है, जितना होना चाहिए।

यहां पर भारतीय जनता पार्टी ने शिवराज सरकार द्वारा महिलाओं के लिए चलाई जा रही योजनाओं का व्यापक प्रचार किया है। अनेक योजनाओं से लाभान्वित महिला हितग्राहियों की संख्या भी क्षेत्र में अच्छी खासी है। इसलिए प्रदेश में महिला अत्याचार के बढ़ते आंकड़ों पर क्षेत्र में चिंता तो है लेकिन उनकी चिंता का समाधान कांग्रेस कर सकेगी ऐसा विश्वास उनको नहीं होता। 

चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद अब घर घर जाकर जन संपर्क करना और बूथ पर कार्यकर्ताओं को तैनात करने का कार्य शुरू हो गया है। चंद घंटे बचे हैं जब इस क्षेत्र में मतदान शुरू हो जाएगा। बुंदेलखंड की अनेक सीटों पर दमोह का चुनावी परिणाम असर डालेगा। देखना है ऊंट किस करवट बैठता है।

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