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धनतेरस पर बर्तन, सोना-चांदी की जमकर खरीदारी

मंहगाई ने छुआ आसमान तो पेट्रोल हुआ धड़ाम                                       

कार्तिक मास की कृष्ण त्रयोदशी पर सागर मंथन में अमृत कलश के साथ प्रकट हुये आयुर्वेद के प्रतिष्ठापक भगवान धनवंतरि के अवतरण उत्सव का प्रेरक क्षण है। आयु की अवधि श्वांसों पर निर्भर है न कि काल पर निर्धारित है। इसलिए आज भगवान धनवंतरि जयन्ती पर वर्तनों व सोने-चांदी खरीद करने का काफी महत्व माना जाता है। आयुर्वेद हमारा एक-एक श्वांस प्रश्वांस पर अर्जुन दृष्टि रखते हुये परिपूर्णता के साथ जीवन जीने का विज्ञान एवं कला का संयुक्त रूप है।

आयुर्वेद उक्ति के अनुरूप यदि हम रोटी को पीने व दूध को खाने की कला के मर्म को जान जायें तो हम दौड़ते हुये चल सकते हैं। एकांत गुनगुनाते हुये अपने मानसिक बोझ से सहज ही मुक्त हो सकते हैं। कहा कि जाता है कि हमारी संस्कृति में विपत्ति का सामना करने के लिए संपत्ति को जरूरी बताया गया है। आसन्न महालक्ष्मी पूजन से दो दिन पूर्व धनतेरस मनाने का विधान यह संदेश देता है कि अर्जित धन मेरा नहीं तेरा है।

अर्थात धरती, धूप, आग, पानी, हवा की वाहिका श्रम की देवी लक्ष्मी का है। शास्त्रों में धन को द्रव्य कहा गया है। नदी की तरह द्रवण शीलता, तरलता धन का प्राणतत्व है। लोक व्यवहार में धन को हाथ का मैल कहा जाना भी न्याय संगत है क्योंकि हाथ से काम करने पर श्रम को जो अर्क है, उसी का संचित पसीना है। इसी क्रम में आज धनतेरस के अवसर पर बाजारों में खूब रौनक दिखी। लोगों ने वर्तनों के अलावा सोने चांदी के वर्तनों व आभूषणों की जमकर खरीदारी की। सुरक्षा के लिहाज से पुलिस बल भी काफी संख्या में मौजूद रहा।
 

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