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बाजार में जमकर हुई खरीदारी, पांच दिवसीय दीपोत्सव का पर्व प्रारंभ

धनतेरस से पांच दिवसीय दीपोत्सव का पर्व शुरू हो गया है। शहर के बाजार सज धज कर तैयार हो गए हैं। सोमवार को बाजार में सुबह से ही काफी भीड़भाड रही। लोगों ने जमकर खरीदारी की। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस पर्व मनाया गया। लक्ष्मी का प्रथम वास धातु में माना गया है, ऐसे में धनतेरस के दिन बर्तन, सोना,चांदी, पीतल या तांबे का वर्तन की खरीदारी बेहद शुभ मानी गई है। बाजार में आटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक, सराफा, बर्तन, फर्नीचर और साड़ी सेंटरों, कपड़ों की दुकानों पर काफी भीड़ देखी गई। धनतेरस के दिन धन के देवता कुबेर महाराज की पूजा की गई।

धनतेरस के दिन भगवान धनवंतरी का जन्म हुआ था इसलिए इस दिन खासतौर पर उनकी पूजा की जाती है। मां लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा की गई। धनतेरस को लोगों ने वर्तनों की जमकर खरीदारी की वहीं सोने चांदी की दुकानों पर भी ग्राहकों की भीड़ लगी रहीं। सोमवार को सुबह से ही बाजार में काफी भीडभाड रही। दोपहिया वाहन भी बाजार में निकलना मुश्किल हो गया था। ग्रामीण क्षेत्रों से भी लोग खरीदारी के लिए जिला मुख्यालय पहुंचे। दीपावली का पावन पर्व 7 नवंबर को धार्मिक श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा।

पं. भगवत सहाय पटैरिया ने बताया कि धनतेरस के दिन धन के देवता कुबेर और देवताओं के चिकित्सक धन्वंतरि महाराज की पूजा की गई। इस त्योहार की सबसे बड़ी मान्यता यह है कि इस दिन की गई पूजा से व्यक्ति यम के द्वारा दी जाने वाली यातनाओं से मुक्त हो जाता है। हिन्दू धर्म में धनतेरस यश, वैभव, कीर्ति सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। सोमवार की शाम लोगों ने दीप दान किया, ऐसा करने से यमराज प्रसन्न होते हैं और इससे व्यक्ति की अकाल मृत्यु नहीं होती हैं। धनतेरस के मौके पर ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोगों ने अपनी अपनी आवश्यकतानुसार खरीददारी की।

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