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सांस के गंभीर मरीज़ों के लिए एम्स का दावा, ठीक हो सकता है अस्थमा

नई दिल्ली एनसीआर में दमघोंटू हवा में सांस ले रहे लोगों के लिए ये खबर राहत की सांसे लेकर आई है। अस्थमा के मरीज़ों का इलाज एम्स ने खोज निकाला है। अच्छी खबर ये है कि एम्स देश का पहला ऐसा अस्पताल है जहां ये इलाज मुफ्त में किया जाएगा। 

दिल्ली की हवा में सांस लेना मुश्किल है, एयर क्वालिटी जो 50 होनी चाहिए वो 400 के पार जाकर सीवीयर कैटेरगरी यानी खतरनाक स्तर को पार कर चुकी है। इसके कारण सेहतमंद लोग बीमार होने के कगार पर हैं। इसके बाद दमा के मरीजों का हाल क्या होगा, ये अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं है।

इसके बाद एम्स में इन मरीज़ों के लिए ब्रॉंकियल थर्मोप्लास्टी तकनीक से इलाज शुरु किया गया है, जिन पर दवाएं बेकार हो चुकी हों और इनहेलर से भी फायदा ना हो पा रहा हो। एम्स में इस तकनीक से अस्थमा के एक मरीज़ का इलाज कामयाबी से पूरा कर लिया गया है। 

इस इलाज में ट्यूब के ज़रिए एक कैथेटर में लगी वायर सांस की नली तक पहुंचाई जाती है। वायर से सांस की नली को गर्मी दी जाती है। एक बार की प्रक्रिया में एक घंटे का वक्त लगता है। तीन हफ्ते के अंतराल के बाद प्रक्रिया दोहराई जाती है। इस तरह कुल तीन बार ये प्रक्रिया की जाती है।

ये प्रोसीजर मरीज़ को बेहोश करके किया जाता है। एम्स में फिलहाल इलाज पूरी तरह फ्री किया जाएगा। अभी ये तकनीक देश भर में सिर्फ 6 से 8 प्राइवेट अस्पतालों के पास है लेकिन इसका खर्च 5 से 7 लाख रुपए तक आता है। इसमें कई मरीज़ों के लिए ये इलाज पहुंच बाहर है। ब्रांकियल थर्मोप्लास्टी की ये तकनीक उन मरीजों के लिए ही है जिनकी सांस की तकलीफ बर्दाश्त से बाहर है। 

 

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