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मातारानी की भक्ति में डूबा पूरा जनपद

मां के चतुर्थ स्वरुप मां कूष्माण्डा की भक्तों ने की आराधना
भजन कीर्तनों से गूंज रहे पण्डाल

शारदीय नवरात्रि पर्व के तीसरे दिन भक्तों का माता रानी के दरवार मे भारी जन सैलाव उमडा रहा। माता रानी के पण्डालों में भजन कीर्तनों का दौर देर रात्रि तक चलता रहा। भक्तों ने भारी संख्या में मन्दिर पहुंच देवी मां की पूजा आराधना कर मां को प्रसाद चढाया। मां की आरती के समय पर भक्तों का भारी जन सैलाव मन्दिर व मन्दिर परिसर में देखा गया। जगह-जगह पण्डालों में सजे मां के दरवार के दर्शनों के लिये भक्तों का हुजूम उमडा रहा। मां के स्वरुपों का दर्शन कर भक्तों ने पूजा अर्चना की।

शारदीय नवरात्रि के चैथे दिन भक्त मां की आराधना के लिये उमड पडे। हजारों की संख्या में भक्त मां के जयकारों के साथ मन्दिर पहुंच पूजा आराधना करते रहे। मन्दिर में माता रानी की एक झलक पाने के लिये भक्त लाईन में लगे रहे। मां के नौ स्वरुपों में से मां के चैथा स्वरुप मां कूष्माण्डा का है। माता कूष्माण्डा को ब्रम्हाण्ड की रचना करने वाली देवी भगवती के रुप में माना जाता है। माता रानी की कान्ति व आभा सूर्य के समान है।

देवी मां के कूष्माण्डा स्वरुप ने ही सृष्टि का विस्तार किया है। माता रानी सिंह पर सवार अष्टभुजा रुप में बहुत ही ममतामयी प्रतीत होती है। मां का यह स्वरुप अन्नपूर्णा का हैं शाकुंभरी रुप रख देवी मां ने शाक से धरती को पल्लिवित किया और शताक्षी बनकर असुरों का संहार किया। मातारानी प्रकृति व पर्यावरण की अधिष्ठात्री है। मातारानी की आराधना के बिना तप व ध्यान सम्पूर्ण नही होते है। इसलिये नवरात्रि की चतुर्थी को शाक सब्जी व अन्न का दान करना बहुत ही शुभ एवं फलदाई माना जाता है। 

शहर में एक सैकडा से अधिक पण्डालों में रात्रि मां के भजन और कीर्तन का दौर चलता रहा। पण्डालों में सजे मां के विभिन्न स्वरुपों में मां के दर्शनों के लिये बीती रात भक्तों का रेला उमडा रहता है। देर रात्रि तक विभिन्न पण्डालों में भजन कीर्तन व दैवीय गीतों के अयोजन चलते रहे। शहर मां की भक्ति में आकण्ठ डूबे हुये है। मां के पण्डाल पूरी रात रोशनी के से जगमगाते बहुत ही मनमोहक दिखाई देते है। शुक्रवार तडके से ही भक्त अपने अपने नजदीक स्थापित पण्डालों में मां की आरती के लिये उमड पडे।

मां की आरती के बाद विभिन्न फलों आदि मिष्ठानों का भोग लगा मां का भक्तिपूर्ण प्रसाद गृहण किया। इसी प्रकार जनपद के श्रीनगर, चरखारी, कबरई बेलाताल, कुलपहाड, पनवाडी व खरेला में भी सैकडों की संख्या में माता रानी की मूर्तियां विराजमान है। जहां रात्रि के समय माता रानी की आरती के दौरान ऐसा प्रतीत होता है कि मानों स्वर्ग धरती पर ही उतर आया हो। सैकडों की संख्या में भक्तगण माता रानी की आरती में उमडते है तथा वातावरण को माता रानी के जयकारों से गुंजायमान कर देते है। 
 

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