कम अंतर से हार-जीत वाली सीटों में होगा घमासान

बुन्देलखण्ड में सियासी पारा चढ़ने लगा है। यहां बीजेपी विकास, तो कांग्रेस पिछड़ेपन के मुद्दे को लेकर जनता के बीच है। लेकिन खासकर उन छह विधानसभा सीटों को लेकर घमासान है, जो कांग्रेस और बीजेपी ने कम अंतर से गवाईं थी। इस बार का मुकाबला भी रोमांच से भरा होगा।

2013 के आंकड़ों को देखें तो बुन्देलखण्ड में बीजेपी मजबूत स्थिति में है। इस बार कांग्रेस ने भी अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए सुरेंद्र चैधरी को कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष बनाया था। सात सीटों पर इसलिए भी घमासान है, क्योंकि इनमें से 6 सीट पर कांग्रेस कम अंतर से हारी थी। नये प्लान के तहत कांग्रेस इस बार बुन्देलखण्ड में बूथ स्तर पर सक्रिय है। बुन्देलखण्ड में 2013 के चुनाव में सागर, टीकमगढ़, छतरपुर, दमोह, पन्ना जिले की कुल 26 सीटों में से 20 पर बीजेपी ने परचम लहराया था और कांग्रेस के खाते में सिर्फ छह सीटें ही गई थीं।

बीजेपी ने बुन्देलखण्ड में चुनावी समीकरण देखकर निवाड़ी को जिला बनाया तो सागर को स्मार्ट सिटी और पन्ना को मिनी स्मार्ट सिटी घोषित किया। छतरपुर को मेडिकल कालेज की सौगात दी गई है...हालांकि, कांग्रेस के गणित के हिसाब से आज भी बुन्देलखण्ड पिछड़ेपन का शिकार है। इस बार कड़ा मुकाबला 7 सीटों पर है। सुरखी विधानसभा सीट पर पिछले चुनाव में बीजेपी विधायक पारुल साहू ने कांग्रेस के गोविंद सिंह राजपूत को महज 141 वोट से हराया था। इसी तरह छतरपुर में बीजेपी के ललिता यादव ने कांग्रेस के आलोक चतुर्वेदी को 2217 वोट से मात दी थी। सरकार में ललिता यादव मंत्री भी हैं। मलहरा में रेखा यादव ने कांग्रेस के तिलक सिंह लोधी को 1514 वोट से चित किया था।

दमोह में बीजेपी विधायक जयंत मलैया जीत तो गए लेकिन वो कांग्रेस के चंद्रभान भैया को सिर्फ 4953 वोट से हरा पाए थे। हटा विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी विधायक उमादेवी खटीक ने कांग्रेस के हरि शंकर चैधरी को 2852 वोट से हराया था। पन्ना की गुन्नौर विधानसभा सीट पर बीजेपी विधायक महेंद्र सिंह ने कांग्रेस के शिवदयाल को 1337 वोट से हराया था। इसी तरह जतारा में कांग्रेस के दिनेश कुमार अहिरवार, बीजेपी के हरिशंकर खटीक को महज 233 वोट से हरा पाए थे।

छतरपुर विधान सभा सीट परिसिमन के बाद से बीजेपी के लिए सबसे अनुकूल क्षेत्र बन गया था। इसके बावजूद पिछला चुनाव बीजेपी प्रत्याशी ललिता यादव महज 2217 मतों से जीत पायी थीं। बीजेपी इस सीट को हर कीमत पर जीतना चाहती है। इसलिए शिवराज कैबिनेट ने यहां के लोगों की सबसे बड़ी मांग मेडिकल कॉलेज को मंजूरी देकर बड़ा राजनैतिक एजेंडा पूरा कर लिया है।

कांग्रेस की बुन्देलखण्ड पर नजर है। वो अपने घोषणा पत्र में बुन्देलखण्ड के विकास के लिए कई मुद्दों को शामिल करने की बात कह रही है।