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कचरे के ढेर के पास पढ़ने में मजबूर छात्र छात्रायें

अजयगढ़/ भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा चलाया जा रहा स्वच्छता मिषन दुनिया का सबसे बड़ा जन आंदोलन बन चुका है। इस स्वच्छता अभियान के  4 साल पूरे हो गए हैं लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और बांया कर रही है। मध्यप्रदेश में स्कूल शिक्षा के लिए इस वर्ष बजट में 19,872.07 करोड़ का प्रावधान जो कुल बजट का 10.71 प्रतिशत है। 2 अक्टूबर 2018 को पन्ना जिले के सीओ साहब ने स्वच्छता अभियान को लेकर अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रोत्साहन राशि ,प्रमाण पत्र एवं पदक प्रदाय कर सम्मानित किया गया।

लेकिन उनको जमीनी हकीकत कुछ ही नहीं है। मालूम हो कि पन्ना जिले के सभी विद्यालयों में सत-प्रतिशत शौचालय बन  चुके हैं। लेकिन महात्मा गांधी जी के सपने साकार होने वाले नहीं है। क्योंकि इस ओडीएफ की सच्चाई कुछ और तस्वीर बांया करती है। जिले की वास्तविक स्थिति धरातल पर नजर आएंगे तो आपको बहुत ही आश्चर्य होगा।

क्योंकि पन्ना जिले के अजयगढ़ तहसील क्षेत्रों के विद्यालयों की हालत ऐसी स्थिति में है। कि छात्र छत्राओं को कचरे के ढेर के पास बैठ कर शिक्षा ग्रहण करने में मजबूर होना पड़ता है। स्वच्छता मिशन अभियान को लेकर पूरे पन्ना जिले के विद्यालयों में बच्चों द्वारा  रैलियाँ निकली गई जगह जगह सफाई अभियान चलाया गया। लेकिन जनपद अजयगढ़ क्षेत्र के विद्यालयों की हालात जस के तस बत्तर हालात बनी हुई है। जनपद पंचायत अजयगढ़ क्षेत्रों के अधिकांश विद्यालयों में आज भी सौचालयों का निर्माण 50 फीसदी भी नहीं हुए हैं।

इसी तरह से आपको अजयगढ़ क्षेत्र  50 फीसदी से ज्यादा विद्यालयों में यही हाल देखने को मिलेगा। अजयगढ़ क्षेत्रों के विद्यालयों को खुले में शौच  से मुक्त करने के लिए अकूत धन खर्च किया गया है। सबसे पहले तो प्रत्येक विद्यालयों में शौचालय निर्माण करने के लिए राशि दी गई ।

पन्ना जिले की प्रशासन ने चाहे भले ही एड़ी चोटी का बल लगा दिया हो लेकिन शिक्षा विभाग के लोगों ने लम्बा खेल किया है। अजयगढ़ में ऐसे ऐसे विद्यालय हैं जहाँ शौचालय बने तो है लेकिन अधिकांश शौचालय सिर्फ कागजों पर बने हैं।यदि उच्चस्तरीय जांच हो तो बहुत ही बड़ा खुलासा सामने आ सकता है।

अजयगढ़ क्षेत्र के कुछ ऐसे विद्यालय हैं। जहाँ सबसे ज्यादा विद्यार्थियों की जनसंख्या पाई जाती है वहाँ पर एक भी सौचालय निर्माण नहीं पाया गया जो सही तरीके सौच के लिए उपयोग किया जा सके। लेकिन हकीकत यह है कि यह शौचालय सिर्फ कागजों की शोभा बढ़ा रहे हैं ऐसे में जो शौचालय कागजों पर बने हैं उनकी जांच प्रशासन के द्वारा होना आवश्क है।

अजयगढ़ के ऐसे भी विद्यालय है जो शौचालय निर्माण के नाम पर राशि आहरित कर ली गई है ,लेकिन शौचालय निर्माण विद्यालयों के स्थलों पर नहीं बना पाए ऐसे में प्रशासन को गहन छानबीन करने की आवश्यकता है तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने की सूत्रों के द्वारा मांग भी की  जा रही है।

एक ऐसा मामला सामने प्रकाश में आया जो अजयगढ़ क्षेत्र से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर स्तित ग्राम पंचायत चंदौरा के शासकीय हाई स्कूल में लगभग छात्र छात्राओं की जनसंख्या 588 बच्चे अध्ययन करते हैं। लेकिन यहाँ बहुत ही ऐसी अनिमियतायें पाई गई हैं।जाकर देखोगे तो आपके पैरों के नीचे की जमीन खिसक जायेगी।

ग्राम पंचायत जिगनी के माजरा बल्दूपुरवा शासकीय माध्यमिक शाला स्कूल में मध्यान्ह भोजन मवेशियों के विचोंबीच मिंट्टी के चूल्हे से खाना बनाया जाता है। शासकीय हाई स्कूल चंदौरा संकुल बीरा विकास खण्ड अजयगढ़ के अंतर्गत आता है।

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