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सिंडीकेट के दबाव में बिना मेडिकल के मुकदमा लिखा: विधायक

बालू सिंडीकेट के दबाव में पुलिस ने बिना किसी मेडिकल जांच व साक्ष्य के मेरे खिलाफ फर्जी मुकदमा दर्ज कराया। अगर मेरे ऊपर लगाये गये आरोपो से सम्बंधित कोई सबूत हो तो पुलिस बताये और उन गरीब रिक्शा चालको की तहरीर पर पुलिस मुकदमा दर्ज करें जिनके साथ खनिज अधिकारी ने मारपीट कर हर सप्ताह 15 हजार प्रति रिक्शा की मांग की। यह बात गुरूवार को अपने आवास में तिंदवारी विधायक ब्रजेश प्रजापति ने पत्रकारों से कही। प्रजापति ने कहा कि जनपद में गरीबों, मजदूरों, शोषितों-पीड़ितो व बेरोजगारों और किसानों  की आवाज उठाना अपराध है।

गत 9 अक्टूबर को मेरे व मेरे प्रतिनिधि नीरज सिंह पटेल व अन्य के खिलाफ खनिज माफियाओं व जिला प्रशासन की मिलीभगत से खनिज अधिकारी शैलेन्द्र सिंह द्वारा संगीन धाराओं में दर्ज कराया गया, मुकदमा जीता जागता उदाहरण है। इतना ही नही फर्जी मुकदमें को सच साबित करने की नियत से मेरी बिना सहमति के मेरे साथ लगे तीन सरकारी गनरों को वापस पुलिस लाइन बुलाकर उनके स्थान पर दूसरे गनर भी भेजे जा रहे है, ताकि तीनों पुलिस जवानों कोे अपने दबाव में लेकर अपनी मनमर्जी के बयान पुलिस अधिकारी ले सकें। 

खनिज अधिकारी द्वारा कराये गये मुकदमें का फर्जीवाड़ा इस लिये भी सिद्ध होता है कि मेरे साथ मेरे प्रतिनिधि नीरज सिंह पटेल को भी नामजद किया गया है। जबकि वह मेरे साथ घटना स्थल सर्किट हाउस में थे ही नही। इसलिये भी मुकदमा फर्जी सिद्ध होता है। उनकी टेलीफोन काल डिटेल व लोकेशन की भी जांच की जा सकती है। जिस तरह से दबंग खनन माफिया और सम्बंधित अधिकारियों द्वारा मुझे क्षति पहुंचाने का चक्रव्यूह रचा जा रहा है ऐसी स्थिति में मुझे सुरक्षा व्यवस्था की सख्त आवश्यकता है। वूंकि पहले भी मुझे आतंकवादियों से जान से मारने की धमकी भी दी जा चुकी है।

जिसकी एफआईआर हरजतगंज लखनऊ में दर्ज है। इसके अलावा मेरे व मेरे परिवार के किसी भी सदस्य के नाम पर एक भी शस्त्र लाइसेंस नही है। उन्होने कहा कि अवैध खनन के कारोबार में संलिप्त खनिज माफिया और सम्बंधित अधिकारी मेरे ऊपर फर्जी मुकदमें दर्ज कराकर मेरी आवाज को दबाना चाहते है। पीड़ित रिक्शा चालाको  की बात मानें तो  गत दिनांक 09 अक्टूबर को खनिज अधिकारी ने उनके बालू की बोरियों से भरे रिक्शो के सामने बाईपास में अपनी गाड़ी लगाकर रूकवाया और 10 से 15 हजार रूपये प्रति रिक्शे की मांग की।

जिसे देने से इन्होने इन्कार कर दिया तो खनिज अधिकारी शैलेन्द्र सिंह ने दर्जनों मोटर साइकिलों व रिक्शों को चालको सहित भूरागढ़ और  कृषि विश्वविद्यालय पुलिस चैकी में दिन भर बंद रखा पुलिस ने मारपीट भी की। पीड़ितो की शिकायत पर उन्ही की मौजूदगी में ही मैने खनिज अधिकारी को बुलाया था और रिक्शा व मोटर साइकिल छोड़ने व प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी के निर्देशों का पालन करने की बात कही थी और खनिज अधिकारी ने पकड़े गये रिक्शों व मोटर साइकिलों को छोड़ने तथा अब इन्हे न पकड़ने का आश्वासन भी दिया था।

लेकिन उन्होने सम्बंधित अधिकारियों व खनिज माफियाओं ने षडयन्त्र कर बिना किसी जांच और सबूत और बिना मेरे पक्ष जाने केवल खनिज अधिकारी के कह देने मात्र से  मारपीट व लाखों रूपये की मांग करने का फर्जी मुकदमा पुलिस ने दर्ज कर लिया तो फिर इनका मुकदमा क्यों नही लिखा जा रहा है ?

 

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