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मां भुवनेश्वरी का दरबार: जहां से लूले लंगडे़ अपने पैरों से चलकर जाते हैं

बुन्देलखण्ड के जनपद हमीरपुर में एक ऐसा पवित्र स्थान हैं, जहां की मात्र मिट्टी से ही गठिया, (वात) जैसे रोग पल में दूर हो जाते हैं, जो लोग किसी न किसी सहारे उस स्थान पर पहुंचते हैं, लेकिन भुवनेश्वरी मां की कृपा से अपने पैरों पर चलकर घर वापस लौटते है।

यह स्थान कुरारा विकास खण्ड अन्तर्गत ग्राम झलोखर में स्थित है जिसे भुवनेश्वरी या भुइयारानी का दरबार कहा जाता है। इसकी महिमा निराली है। यह भारत का एक मात्र ऐसा स्थान है जहां बिना किसी डाक्टर या इलाज के गठिया (वात) रोग का मिट्टी (रज) के लेपन से ठीक हो जाता है।

यहां पर उ0प्र0 के अलावा देश के अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में गठिया (वात) के मरीज आते हैं , ऐसे मरीजो को किसी न किसी साधन से मंदिर तक पहुंचाया जाता हैं, लेकिन मिट्टी के लेपन से वह मरीज ठीक हो कर बिना किसी सहारे के अपने पैरों पर चल कर गंतव्य को रवाना होता है। इसी मंदिर के पास वह तालाब है जिसकी मिट्टी से लोग ठीक हो जाते है। मां के दरबार में हर शनिवार को भण्डारा होता है। दूर-दराज से आने वाले मरीजो को गांव के लोग ठहरने की व्यवस्था भी करते है। दिन-प्रतिदिन इस क्षेत्र की ख्याति देश विदेश में फैल रही है।

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