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बच्चे का जन्म क्यों ? मृत्यु से पूर्व तक !

प्रत्येक जीव का जन्म व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। जन्म को लेकर हिन्दू और ईसाई धर्म में पूर्व जन्म ( past birth ) को मान्यता प्रदान की है। हालांकि विज्ञान इसे नहीं मानता , फिर भी तय है कि विज्ञान अभी अपने शुरूआती स्तर पर है। आध्यात्मिक आधार पर पूर्व जन्म की मान्यता है और समय-समय पर कुछ किवदंतियों से पूर्व जन्म प्रमाणित हुआ है। 

इसलिये जन्म होना एक तय प्रक्रिया है और मृत्यु तक की सफलता भी कुछ हद तक निश्चित कही जा सकती है , पर श्रीमद्भगवत गीता के अनुसार कर्म प्रधान है। कर्म से किस्मत का बदलाव संभव है और बड़ा से बड़ा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। लेकिन सवाल भारत की माताओं से है ? पिता से है ? , कि बच्चे का जन्म क्यों ? ज्यादा कुछ नहीं वर्तमान परिदृश्य में यही पूंछा जा सकता है कि क्या किसी माँ ने इस उद्देश्य के साथ जन्म दिया कि जन्मने वाली संतान को वह भारत देश का प्रधानमंत्री बनाएगी ? 

जन्म के बाद ऐसा माहौल प्रदान किया जाएगा कि वह देश का अच्छा नेता बन सके और राजनीति के द्वारा राष्ट्र हित में सशक्त निर्णय ले , काम कर सके ! ऐसा प्रतीत नहीं होता कि भारत के किसी पिता ने भी यह सोचकर संभोग किया होगा कि संतानोत्पत्ति होगी और उस संतान द्वारा सामाजिक - राजनीतिक क्षेत्र पर उत्कृष्ट कार्य कराए जा सकेंगे ? राजनीतिक क्षेत्र में बहुत दूर की बात है पर यह भी हद तक सत्य है कि प्रयोजन से बच्चों का जन्म नहीं हो रहे हैं। बल्कि बहुत बार सिर्फ सुखानुभूति हेतु बनाए गए रिश्ते से संतानोत्पत्ति का द्वार खुल जाता है , इस प्रकार का जन्म ही बहुतायत हो रहा है। एक बड़ी आबादी राष्ट्र के सामने है। 

यह परीक्षण का विषय है कि देश की आबादी कितनी सक्षम है ? अनेको बार ऐसे दृश्य दिखते हैं , जिनमें लोग अपनी समस्या ही अधिकारी के सामने नहीं रख पाते हैं। कैमरे के सामने बोल नहीं पाते हैं। बड़ी भीषण समस्या से सामना कर रहे हैं परंतु विभीषण बन रावण रूपी समस्या का अंत नहीं करवा सकते। इतनी अक्षम आबादी है और देन किसकी है ? बिन प्रयोजन के एक अक्षम आबादी सिर्फ अक्षम आबादी ही बढ़ाएगी। फलस्वरूप भ्रष्टाचार बढ़ेगा , अपराध बढ़ेगा !

यही मूल समस्या है , यदि एक राष्ट्र अपने अच्छे सशक्त नेतृत्वकर्ता के लिए जूझता हुआ दिखे। नौकर तैयार हो जाते हैं , ट्रेनिंग देकर तैयार किए जा सकते हैं और यह सब आसान सी प्रक्रिया से हो जाता है। किन्तु नेतृत्वकर्ता को जन्म देना और नेतृत्वकर्ता को तैयार करना आसान प्रक्रिया नहीं है। अब्राहम लिंकन सिर्फ एक बार चुनाव जीतते हैं और वह भी पहला सामना हार से होता है फिर हारते रहते हैं। उपराष्ट्रपति का चुनाव हार जाते हैं। लेकिन वह मन से नहीं हारते , इसलिए अमेरिका के राष्ट्रपति का चुनाव जीत जाते हैं। एक नेतृत्वकर्ता के सामने जीवन भर चुनंतियां आती हैं। नौकर बनना , बनाना आसान है पर माता-पिता वही हैं जो नेतृत्वकर्ता बनाएं। 

नेतृत्व के लिए सोचकर बच्चों को जन्म नहीं दिया जाता। बच्चे यूं ही हो जाते हैं और यूं ही होगें तो हालात देश के सामने हैं , बस आबादी बढ़ाओ योजना है। इसलिये कम ही लोग बाय डिफाल्ट आ जाते हैं और जीवन भर संघर्ष कर एक बड़ी आबादी के लिए कुछ ना कुछ करते रहते हैं , अपनी मृत्यु से पूर्व तक ! 

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