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जिला चिकित्सालय के गार्डों को महीनो से नहीं मिली वेतन

पीएफ व ईएसआई के नाम हर माह काट लिए जाते हैं हजार रुपए

नहीं दिया पीएफ व ईएसआई नंबर, निजी एजेंसी कर रही बेरोजगारों का शोषण

पन्ना/ जिले में उद्योगों की कमी के कारण बेरोजगारों की भरमार है। रोजी-रोटी की तलाश में हजारों बेरोजगार युवा महानगरों की ओर पलायन कर गए हैं। और कुछ मजबूरी वष यहीं रहकर अल्प वेतन में ठेकेदारों के अंडर में कार्य कर रहे हैं। जहां उनका जमकर शोषण किया जा रहा है। जिसका जीता जागता उदाहरण वर्तमान में पन्ना जिला चिकित्सालय में देखा जा रहा है। लगभग 6 सालों से जिला चिकित्सालय की सुरक्षा व देखरेख में कामथेन सिक्योरिटी के माध्यम से तैनात सिक्योरिटी गार्ड जिन्हें प्रतिमाह केवल 51 सौ रुपए देकर 8 घण्टे स्टैंडिंग ड्यूटी करवाई जाती है। जिसमें नौ पुरुष और 3 महिलाएं हैं।

जो 3 शिफटों में 3 महिला और 1 पुरुष गार्डं मिलकर 3 अलग-अलग षिफटों में 24 घंटे ड्यूटी पर तैनात रहते हैं। जिन्हें वेतन स्वरूप 6100 रुपए बताकर 5100 रुपए मासिक दिया जाता है और 1000 रुपए प्रतिमाह पीएफ और ईएसआई का हावला देकर काट लिया जाता है। जिसका उन्हें 6 वर्ष गुजर जाने के बाद भी आज तक ना ही पीएफ नंबर दिया गया और ना ही ईएसआई कार्ड उपलब्ध कराया गया और ना ही ईएसआई के तहत परिवार के किसी व्यक्ति को उपचार सुविधा उपलब्ध कराई गई, मतलब प्रतिमा सिक्योरिटी गार्डों के पसीने के 1000 रुपए हड़प लिए जाते हैं।

गार्डों के पसीने के लाखों रुपए हड़प चुकी है एजेंसी कामथेन सिक्युरिटी एजेंसी ने अभी तक 6 सालों से लगातार हड़पते हुए प्रति गार्ड 72000 रुपए हड़पा जा चुका है। जो सभी 12 गाडों का अभी तक 8 लाख 64 हजार की भारी-भरकम राशि निजी सिक्योरिटी एजेंसी द्वारा हड़पी जा चुकी है। इसके अलावा वर्तमान में उन्हें लगभग 3 महीनों से वेतन नहीं दी गई वेतन मांगे जाने पर उन्हें चिकित्सालय की ओर से पेमेंट नहीं होने की बात कही जा रही है।

मगर निजी सुरक्षा एजेंसी से एग्रीमेंट में इस बात का भी एग्रीमेंट होता है कि सुरक्षा एजेंसी अपने क्लाइंट से पेमेंट का इंतजार करने के बजाए वर्करों का भुगतान समय पर करता रहेगा, मगर जिला चिकित्सालय में 6 सालों से संदिग्ध तरीके से टेंडर पास करवाकर कामधेनु सुरक्षा एजेंसी कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए मनमानी पर उतारू है। अस्पताल प्रबंधन इस विषय पर ध्यान नहीं दे रहा सिक्योरिटी गार्डों ने सिविल सर्जन से लेकर सीएमएचओ तक को इस विषय से अवगत कराया मगर अभी तक उनकी वेतन दिए जाने का प्रयास नहीं किया गया दाने-दाने को मोहताज हुए गार्ड जिला चिकित्सालय में तैनात एक गार्ड ने डर के मारे नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हम गरीब लोग हैं, कई महीनों से वेतन न मिलने से राशन भी नही ले पा रहे और बच्चों के स्कूल की फीस, मकान का किराए के लिए आए दिन ताने सुनने पढ़ रहे हैं।

कुछ दिनों में नवरात्रि, दशहरा, दिवाली और शरद पूर्णिमा जैसे महत्वपूर्ण त्यौहार आने वाले हैं जिनमें पैसों की कमी के कारण हम अपने परिवार के सामने जाने में भी हिचकिचा रहे हैं क्योंकि घर की जरूरतें पूरी न कर पाने के कारण हमें शर्मिंदगी उठानी पड़ रही है

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