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झांसी-कानपुर हाईवे है या फिर अन्ना जानवरों का बाड़ा

झांसी-कानपुर हाईवे जहां हिचकोलों के लिए बदनाम है, वहीं अन्ना जानवर अलग मुसीबत बनते जा रहे हैं। रात गहराते लगता ही नहीं है कि यह हाईवे है या फिर अन्ना जानवरों का बाड़ा। सैकड़ों की संख्या में छुट्टा जानवर रास्ता घेर बैठे रहते हैं। चालकों के लिए बड़ी मुसीबत का सबब बने हुए हैं। गल्ला मंडी से जोल्हूपुर मोड़ चौराहे तक आवारा जानवर यातायात तो अवरुद्ध करते हैं। जिसमें इन जानवरों की जान भी चली जाती है लेकिन प्रशासन इस ओर बिल्कुल ध्यान नहीं दे रहा है।

शहर व उसके आसपास बड़ी संख्या में आवारा जानवर प्रमुख चौराहों, तिराहों पर डेरा जमाए देखे जा सकते हैं। स्थिति यह है कि इन जानवरों के बेखौफ विचरण से अक्सर आवागमन प्रभावित रहता है। इन जानवरों के पालकों के खिलाफ कार्रवाई न होने से लोगों में नाराजगी है। नगर की गल्ला मंडी के सामने से लेकर जोल्हूपुर मोड़ चौराहे तक सैकड़ों की संख्या में अन्ना जानवर सड़क पर देखे जा सकते हैं। समाजसेवी अंकुर द्विवेदी, अर¨वद शुक्ला, अपर्णा शर्मा, परेवज कुरैशी ने बताया कि कई बार इन पशु पालकों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर शिकायती पत्र दिए कोई कार्रवाई नहीं हुई।

नगर पालिका प्रशासन की मानें तो रोजाना एक से तीन अन्ना जानवर मरने के बाद फेंके जाते हैं। अन्ना जानवरों का नजारा शाम 6 बजे के बाद हाईवे पर साफ दिखाई देता है लेकिन, इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

अन्ना जानवर दिन में किसानों के खेतों में पहुंचकर उनकी फसलों को खाकर अपनी भूख मिटाते हैं। इस समय ज्वार, बाजरा, तिली, उर्द, कुम्हेड़ा, मूंग सब्जी आदि की फसलें खेतों में लगी हैं। किसान रमाशंकर, रामनरायन, महेंद्र, सरवन आदि बताते हैं कि जरा सी निगाह चूकी तो दर्जनों की संख्या मे अन्ना जानवर खेत में घुसकर फसल चौपट कर देते हैं। प्रशासन को इनका इंतजाम करना होगा।

इस संबंध में एसडीएम सुनील शुक्ला का कहना है कि अन्ना जानवरों का जल्द ही इंतजाम किया जाएगा, जिससे किसानों की फसलें बर्बाद न हो सकें।

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