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दंगे के बाद नहीं लगा ऐतिहासिक कंश मेला

जनपद के मौदहा में कंश मेला के दौरान हुए दंगे के बाद आज शुक्रवार को चौथे दिन बाद भी पूरी तरह से  शांति और अमन बहाली नहीं हो सकी।भले ही प्रशासनिक आला अधिकारी स्थिति नियंत्रण में दर्शाते हुए अपनी पीठ थपथपा रहे हों लेकिन सच्चाई कुछ और ही बयाँ कर रही है।

बताते चलें कि बीते लगभग डेढ़ सौ सालों से आयोजित होता आ रहा कंश मेला इस साल विवाद और दंगे की भेंट चढ़ गया।परम्परा के अनुसार तीन दिवसीय ऐतिहासिक कंस वध मेले का आयोजन होता आ रहा है। अनंत चतुर्दशी की शाम भगवान कृष्ण का डोला अपने निर्धारित स्थान गुड़ाही बाजार में सजाया जाता है यहां से अपने तय रास्ते नेशनल चौराहा होते हुए निकाला जाता है।बीते सोमवार को पूर्णिमा पर कंस वध लीला का आयोजन था। जिसके चलते दो दर्जन से अधिक देवी देवताओं की झांकियों को सजाया गया। शाम करीब तीन बजे देवी चौराहा पर अलाव मैदान के पास मुस्लिम समुदाय के कुछ युवकों ने इस मार्ग से झांकियां निकालने का विरोध किया। इसके बाद माहौल गरमा गया और दोनों पक्ष आमने सामने आ गए।

हालांकि दोनों पक्षों के कुछ बुद्धिजीवियों ने माहौल को शांत कराने का प्रयास किया।वहीं सूचना पर पुलिस व प्रसाशनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए।मामला संवेदनशील होता देख बीती 24 सितम्बर का आयोजन स्थगित कर दिया गया।अगले दिन डीआईजी चित्रकूट मण्डल मनोज तिवारी,जिलाधिकारी राजेन्द्र कुमार पाण्डेय व पुलिस अधीक्षक अजय कुमार सिंह ने दोनों समुदाय के लोगों के साथ कई चरण में बातचीत कर मामले को सुलझाने की कोशिश की।जिसके बाद 25 सितम्बर की शाम  मेला का आयोजन व झाकियाँ निकालना तय हो गया।लेकिन शाम के वख्त न तो झांकियाँ निकली और न ही कार्यक्रम का आयोजन हो सका, बल्कि पुलिस और लोगों के बीच झड़पें होने लगी और पुलिस ने लाठियाँ भाँजनी शुरू कर दीं और आँसू गैस के गोले छोड़े।

देखते-देखते घटना ने हिदू-मुस्लिम दंगे का रूप ले लिया और पुलिस बस लाठियाँ ही भाँजती रही और पब्लिक ने भी पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया।जबकि हमीरपुर -महोबा से सत्ता पक्ष के सांसद पुष्पेन्द्र सिंह चन्देल भी घटना के दौरान शांति बहाली के वास्ते मौके पर ही थे और उन्होंने सीधे-सीधे इसे प्रसाशनिक विफलता बता दिया। साथ ही पुलिस अधीक्षक और अन्य सक्षम अधिकारियों पर मेला आयोजन कर्ताओं के साथ सौतेला बर्ताव करने का भी आरोप लगाया।और यह भी कहा कि पुलिस ने खुद इसे जबर्दस्ती दंगे का रूप दिया है और अब पैसे उगाही के लिए बेकसूर लोगों को गिरफ्तार कर रही है।

बाद में दो दिनों तक पुलिस और अर्धसैनिक बल के सिपाहियों ने कस्बे में फ्लैग मार्च किया और स्थिति नियंत्रण में बता दी ,लेकिन डेढ़ सौ सालों से होते आ रहे कंश मेला के आयोजन के रद्द होने से हिन्दू समुदाय के लोगों में अब भी खासा असंतोष व रोष है।जिसके चलते लगातार बीते 25 सितम्बर से ही मौदहा का बाजार बंद है। लोगों ने अधिकारियों को काले झंडे दिखाए और रामलीला मैदान पर अपनी तीन माँगों को लेकर हिन्दू स्वाभिमान संघर्ष समिति बुन्देखण्ड के बैनर के साथ धरने पर बैठ गए।

धरना पर बैठे हिन्दू संगठन के लोगो की माँगें हैं कि दोषी अधिकारियों को तत्काल निलंबित कर गिरफ्तार किया जाए,जिन निर्दोष लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है उन्हें तुरंत छोड़ा जाए और उनके मुकदमे वापस लिए जाएँ और मेले का फिर से आयोजन कराया जाए व झांकियाँ उसी तय मार्ग से निकाली जाएं।

वहीं कस्बा के लोगों और व्यापारियों का कहना है कि प्रसाशन इसे बहुत ही हल्के में ले रहा है लेकिन इसके परिणाम गम्भीर हो सकते हैं।धरना स्थल में एसडीएम व सीओ पहुँचे पर कोई बात नहीं बनी।

धरने पर पूर्व एमएलसी व भाजपा नेता युवराज सिंह,सुनील चौहान,जगदीश व्यास,शशिकान्त गुप्ता,मनीष पाठक,अशोक सिंह,कौशल गुप्ता,अजय गुप्ता जगदीश धुरिया,डॉ सरस्वती चन्द शिवहरे,उत्तम सिंह आदि मौजूद रहे।

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