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खूब की प्रशासन ने मेहनत, फिर भी अव्यवस्थाओं का रहा बोलबाला

पूरे बुन्देलखण्ड में 81 बूथ ऐसे रहे जहाँ पर बिजली ही नहीं थी। प्रशासन की लाख कोशिशें भी इन अव्यवस्थाओं के आगे बौनी रह गईं। इसी प्रकार पेयजल की व्यवस्था, जोकि बेहद जरूरी है, पूरे बुन्देलखण्ड में 2 पोलिंग बूथ ऐसे भी रहे जहाँ पीने के पानी की कोई व्यवस्था ही नहीं थी। यहाँ तक कि आम जरूरतों के लिए भी पानी उपलब्ध नहीं था। ऐसे में सवाल यह उठता है कि पोलिंग बूथों की मूलभूत सुविधाओं में आखिर इतनी बड़ी कमी कैसे रह गई?

ये आंकड़े चुनाव आयोग ने स्वयं अपने पोर्टल पर दे रखे हैं। इसीलिए इन पर शक नहीं किया जा सकता। हालांकि काफी पहले से ही चुनाव आयोग की यही मंशा थी कि इस विधानसभा चुनाव के पहले पोलिंग बूथों की अव्यवस्थाओं को दूर किया जाये और मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा किया जाये। परन्तु फिर भी लापरवाही कहें या इच्छाशक्ति की कमी, अव्यवस्थायें तो रह ही गईं।

यहाँ हम उन व्यवस्थाओं की बात कर रहे हैं, जो पोलिंग बूथों में नदारद रहीं। किस विधानसभा में और कितने बूथों में क्या-क्या व्यवस्थायें नदारद रहीं, आईये जानते हैं -
माधौगढ़  में 2 बूथों में पेयजल, 4 में शेड, 4 में रैम्प व 8 में बिजली नदारद रही।
कालपी में 3 बूथों में टेलीफोन, 1 में फर्नीचर, 6 में शेड व 12 में बिजली नदारद रही।
उरई में केवल 1 बूथ में रैम्प नहीं था।
बबीना में 79 बूथों में शेड, 1 में रैम्प व 1 में बिजली नहीं थी।
झांसी नगर में 1 बूथ में टेलीफोन, 35 में शेड व 1 में रैम्प नहीं था।
ललितपुर में 396 बूथों में टेलीफोन व 3 में बिजली नदारद रही।
महरौनी में 370 बूथों में टेलीफोन व 5 में बिजली की व्यवस्था नहीं रही।
राठ में 3 बूथों में नहीं रही बिजली।
महोबा में 253 बूथों में टेलीफोन व 24 में बिजली की सुविधा रही नदारद।
चरखारी में 375 बूथों में टेलीफोन व 14 में नही रही बिजली।
बबेरू  मेें मात्र 1 बूथ में नही रही बिजली।
नरैनी में 8 बूथों में नही थी बिजली की व्यवस्था।
चित्रकूट  में 1 बूथ में टेलीफोन व 1 बूथ में बिजली की व्यवस्था नही रही।
मानिकपुर में 1 बूथ पर शेड और 1 बूथ पर बिजली की रही समस्या।

 



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