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फर्जी चल रहे रायल किड्स प्ले स्कूल, नही की जा रही कार्यवाही

दो-दो योजनाओं का लाभ लेकर शाषन को लगाया जा रहा चूना

जिले मंे निजी विद्यालय लगातार मनमानी कर रहे है तथा शाषन प्रशासन एवं शिक्षा विभाग द्वारा जारी नियम निर्देशो को कचरे की टोकरी मंे डालतें हुए मनमाने ढंग से संचालित कर रहें है। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा कैबनेट में नियम पास करके सभी जिलो के कलेक्टरो को कडे निर्देश जारी करतंे हुए कार्यवाही करने के आदेश दिये गये थें। उसके बावजूद निजी विद्यालय संचालको पर शासन के आदेशो की धज्जियां उडाते हुए अपने मन मुताबिक कार्य किये जा रहे है तथा अभीभावको को लूटा जा रहा है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रो मंे संचालित निजी विद्यालयों की तो बात ही अलग है जिला मुख्यालय मंे प्रशासन के नाक के नीचे बिना मान्यता के विद्यालय संचालित हो रहें हैं। तथा शासन के नियम निर्देशो की धज्जिया उडाई जा रही है। जिला मुख्यालय मंे जिला अस्पताल के सामने पुलिस लाईन के पीछे संचालित रायल किड्स प्ले स्कूल विगत 3 वर्ष से बिना मान्यता के लगातार संचालित हो रहा है।

जबकी शासन तथा शिक्षा विभाग द्वारा उक्त विद्यालय के संचालक द्वारा कोई मान्यता नही ली गई है। उक्त विद्यालय का भवन शाषन से लीज प्राप्त जमीन पर संचालित किया जा रहा है उक्त भवन भी रहवासी क्षेत्र मंे बनाया गया जबकी शासन द्वारा निर्धारित नियम है की कामर्सियल उपयोग के लिए दी जाने वाली जमीन मुख्यालय से दूर अलग स्थान पर दी जा सकती है लेकिन यह लीज शहर के बीचो बीच दे दी गई। साथ ही विद्यालय के संचालक द्वारा एक अन्य विद्यालय रायल पब्लिक हाई स्कूल के नाम से स्टेट बैंक रोड पर संचालित किया जा रहा है। जिसमंे शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत मिलने वाली फीस का भी लाभ उठाया जा रहा है जबकी नियमानुसार शासन से एक ही लाभ प्राप्त किया जा सकता है उक्त विद्यालय द्वारा शासन के नियम निर्देशो की धज्जिया उडाई जा रही है। इसके अलावा हर वर्ष गणवेश बदलकर कपडा व्यापारी से कमीश्न तय कर गणवेश खरीदने के लिए मजबूर किया जाता हैं पुस्तके भी मनमाने दामो में विद्यालय से ही छात्रो को दिये जाने की जानकारी प्राप्त हुई है इसके अलावा टाई, बेल्ट सहित अन्य सामग्री मनमाने दामों पर छात्रो के विक्रय की जाती है।

विद्यालय में पर्याप्त कमरा नही होने के बावजूद छात्रो को ठूस ठूस के भरा जाता है तथा डीएड, बीएड शिक्षक न होने के बावजूद 10वी, 12वी यूवक यूवतीयों से शैक्षणिक कार्य बहुत की कम पगार दे कर कराया जाता है। इस प्रकार का आलम पूरंे जिले मंे निजी विद्यालय संचालक कर रहंे है बिना मान्यता के जिला मुख्यालय मंे हास्टल भी संचालित किये जा रहें है। जिन मंे भारी भरकम राशि ले कर विद्यालय संचालक पर्याप्त सुविधाये न होने के बावजूद भी संचालित कर रहें है। शासन द्वारा इस वर्ष स्पष्ट निर्देश दिये गये थे की 10 प्रतिशत फीस बढाने के पूर्व जिला स्तरीय कमेटी से अनुमति ली जाये लेकिन निजी विद्यालयों द्वारा बिना अनुमति के फीस बढाकर वसूली की जा रही है।

शासन द्वारा प्रत्येक निजी विद्यालय संचालक को आदेश दिये गये थे की विद्यालय के बाहर मान्यता संबंधी शाईन बोर्ड लगाया जाये तथा उसमें मान्यता अवधि एवं अन्य सभी सुविधाओं के संबंध मंे उल्लेख किया जाये लेकिन शासन के आदेश के बावजूद शिक्षा विभाग के अधिकारीयों द्वारा विद्यालय संचालको को नियम निर्देश जारी नही किये गये और न ही निजी विद्यालयांे के निरीक्षण किये जा रहें है जिससे निजी विद्यालय लगातार मनमानी कर रहे है। 

इनका कहना हैः- बिना मान्यता के जो भी विद्यालय संचालित हो रहे है उनके खिलाफ कडी कार्यवाही की जायेगी तथा एक मान्यता पर एक ही विद्यालय संचालित किया जा सकता है यदि संचालक द्वारा दो विद्यालय संचालन किये जा रहे है तो उनके खिलाफ फाइल देख कर दोनो विद्यालय की मान्यता समाप्त करने की कार्यवाही की जाएगी उनके द्वारा लीज पर जमीन ली गई उसके बावजूद आर टी ई का लाभ लिया जा रहा है तो यह नियम के विपरीत है वसूली की कार्यवाही की जायगी।

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