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शंकराचार्य जी से महारानी जीतेश्वरी ने की बद्सलूकी

पुलिस ने नही किया मामला दर्ज 

राज्यपाल के नाम कलेक्टर को सौपा ज्ञापन

आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार मठों में से एक ज्योर्तिमठ बद्रिकाश्रम उत्तराखण्ड के शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी के साथ गाली गलौंज व बद्सूलकी का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। पन्ना राजपरिवार की बहू महारानी जीतेश्वरी कुमारी ने नन्दीग्राम लक्ष्मीपुर स्थित श्री रामचरण पादुका न्यास की सम्पत्ति हड़पने की नियत से आश्रम में घुसकर गाली-गलौंज की है। अपमान से दुखी शंकराचार्य ने एक प्रेस कान्फ्रेंस कर आपबीती सुनाई है। लक्ष्मीपुर में शंकराचार्य जी ने कहा कि यह सम्पत्ति राज परिवार के सभी वरिष्ठ सदस्यों की जानकारी में अपने हिस्से की सम्पत्ति चंद्रकुमारी रघुवंशी ने आश्रम का ट्रस्ट बनाकर उनके सुपुर्द कर दी है। जहां मानस वृक्ष की सेवा के साथ धार्मिक गतिविधियां संचालित की जा रहीं हैं। उनकी इच्छा के अनुरूप ही आश्रम का संचालन किया जा रहा है। पर राजपरिवार की महारानी जीतेश्वरी कुमारी इस सम्पत्ति को हड़पने की नियत से आकर उन्होने ताला लगा दिया और उनके साथ जूते चप्पल पहनकर मंदिर में घूमते रहे। जिससे मुझे दुख पहुंचा है। यह सम्पत्ति एकल न्यास की सम्पत्ति है। जो चंद्रकुमारी जी के अपने अधिपत्य की रही है।

इस संबंध में श्री रामचरण पादुका न्यास के शिवार्चन प्रसाद उपाध्याय ने लिखित आवेदन में कहा है कि एकल न्यास की सम्पत्ति छीनने के लिए जानलेवा हमला करने की तैयारी के साथ आश्रम में प्रवेश कर अश्लील अपमानजनक शब्द और गाली का उच्चारण कर मारपीट कर हमले की तैयारी से जीतेश्वरी कुमारी 3 जुलाई को करीब 10 बजे आश्रम पहुंचीं और उन्होने आश्रम में रह रहे संत और कर्मचारियों को गालियां दीं और महाराज श्री शंकराचार्य जी को अपमानजनक शब्द कहे हैं। जिससे हम सभी दुखी हैं। घटना के समय पुलिस 100 डायल भी बुलाया गया था। पर पुलिस ने आज तक कोई कार्यवाही नहीं की है।

शिवार्चन प्रसाद उपाध्याय ने कहा कि महाराज जी को अपमानित करना अमानवीय दुख कारक है। पुलिस को तत्काल जीतेश्वरी कुमारी को गिरफ्तार करना चाहिए। साथ ही पूज्यपाद ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी के शिष्य रामलखन त्रिपाठी ने बताया कि बार-बार पुलिस को फोन से सूचना दी, लिखित आवेदन दिया, इसके बावजूद पुलिस जीतेश्वरी कुमारी पर एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तार नहीं कर रही है। हमारे गुरू के अपमान से हमारी धार्मिक भावनायें आहत हुईं हैं। पुलिस जब इतनी बड़ी सख्सियत से दुव्र्यवहार और गाली-गलौंज पर कार्यवाही नहीं कर रही तो समाज में अप्रिय स्थिति निर्मित होगी। तत्काल पुलिस को न्याय संगत कार्यवाही करनी चाहिए। वहीं जीतेश्वरी कुमारी का व्यवहार चोरी और सीना जोरी जैसा है। जो इसे पैतृक सम्पत्ति का विवाद बता रहीं हैं, जबकि चंद्रकुमारी रघुवंशी द्वारा ट्रस्ट को दी गयी सम्पत्ति उनको यादवेन्द्र सिंह जी से प्राप्त थी और वही सम्पत्ति धार्मिक काम के लिए शंकराचार्य जी के ट्रस्ट को दी थी।

राज्यपाल के नाम सौंपा गया ज्ञापन जगद्गुरू शंकराचार्य जी के साथ महारानी जीतेश्वरी देवी द्वारा की गयी बद्सलूकी से धार्मिक भावनायें आहत हुईं हैं। आज स्थानीय श्रद्धालुओं द्वारा महामहिम राज्यपाल को सम्बोधित एक ज्ञापन कलेक्टर को सौंपा गया, जिसमें जीतेश्वरी देवी व उनके साथ आये गुण्डों पर तत्काल मामलादर्ज कराते हुए अपराधियों को गिरफ्तार किये जाने की मांग की गयी है। ज्ञापन में उल्लेखित है कि 3 जुलाई को लगभग 10 बजे जीतेश्वरी देवी व कुछ गुण्डों द्वारा शराब पीकर जूता चप्पल पहनकर नन्दीग्राम लक्ष्मीपुर स्थित पर्णकुटी मंदिर में जबरन प्रवेश कर पूजा में व्यवधान डालते हुए पूज्य महाराज श्री को अश्लील अपमानकारी शब्द बोलते हुए मंदिर के पीछे के ऊपर के कक्ष का ताला तुड़वाकर उसमें रखी हुयी पूज्य अनन्द विभूषित महाराज श्री के फोटो चित्र व मूल्यवान सामान फेंककर तोड़ा गया तथा उन पर हमला करने का प्रयास धार्मिक ट्रस्ट की सम्पत्ति पर जबरन छीनने की नियत से कराया गया, जिससे वहां उपस्थित पूज्य महाराज श्री एवं उनके शिष्य व भक्तगणों की धार्मिक भावनायें आहत हुयीं हैं।

पुलिस का गैर जिम्मेदाराना रवैया उजागर नन्दीग्राम लक्ष्मीपुर स्थित पर्णकुटी मंदिर में जिस तरह से घटना प्रकाश में आई है, उससे पन्ना पुलिस का गैर जिम्मेदाराना रवैया उजागर हुआ है। उक्त घटना की सूचना दूरभाष से पुलिस कोतवाली पन्ना को दी गयी व लिखित सूचना भिजवायी गयी, बावजूद इसके कोतवाली पन्ना में पदस्थ प्रधान आरक्षक लेखक शिवेन्द्र प्रताप सिंह ने शिकायत लेने से ही इन्कार कर दिया। कोतवाली पुलिस के इस रूख को देखते हुए पुलिस अधीक्षक पनना को लिखित सूचना उनके मुख्यालय के बाहर होने से उनके कार्यालय में दी गयी।

इस दौरान शंकराचार्य जी महाराज को अपमानित करते हुए धमकाया जाता रहा। भक्तगणों द्वारा पुलिस के रवैये से परेशान होकर जिला कलेक्टर से सम्पर्क किया गया, इसके बाद रात्रि लगभग सवा नौ बजे पुलिस ने शिकायती आवेदन लिया व तहसीलदार द्वारा जीतेश्वरी देवी से वहां से जाने को कहा गया। सवाल यह उठता है कि जब शंकराचार्य जी व उनके भक्तांे के साथ पुलिस का यह व्यवहार है तो आमजनों की क्या स्थिति होती होगी।

इनका कहना है -

शंकराचार्य जी के शिष्य ने लिखित आवेदन दिया है। मैं स्वयं आश्रम गया था, आवेदन की जांच की जा रही है, वैधानिक कार्यवाही की जायेगी - अरविंद कुजूर, टीआई कोतवाली, पन्ना

मेरे द्वारा शंकराचार्य जी से कोई बदसुलूकी नही की गई, लक्ष्मीपुर मंदिर मंे मेरे द्वारा ताले लगवाये गये थे क्योकी वहां पर कोई भी देख रेख करने वाला नही था जिससे वहां की संपत्ती उजडने का डर था जबरजस्ती मामले को तूल दिया जा रहा है -  महरानी जीतेश्वरी राजमन्दिर पैलेस पन्ना

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