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अब नहीं रहे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी घनश्याम नायक

राजकीय सम्मान के साथ दी गयी अंतिम विदाई

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के साथ कुशल शिक्षक एवं होम्योपैथिक चिकित्सक थे

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी घनश्याम नायक नहीं रहे। राजकीय सम्मान के साथ छतरपुर मध्यप्रदेश में उनकी अंतिम यात्रा निकाली। प्रशासन के साथ ही भारी संख्या में लोगों ने उन्हें अंतिम विदाई दी। जनपद ललितपुर के लोहर्रा गांव निवासी स्वतंत्रता संग्राम घनश्याम नायक पहले तो गांव में रहे किन्तु बाद में फिर मड़ावरा कस्बे में आकर रहने लगे। जनपद ललितपुर के मड़ावरा तहसील अंतर्गत ग्राम लोहर्रा निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी घनश्याम नायक का जन्म 15 मई 1924 को हुआ तथा 3 जुलाई 2018 को प्रातः 6 बजे छतरपुर मध्यप्रदेश में अंतिम सांस ली। वे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के साथ ही कुशल शिक्षक एवं होम्योपैथी चिकित्सक भी थे। उनके पढ़ाये छात्र आज अच्छे पदों में होने के साथ ही अच्छे विचारों के धनी हैं।

उल्लेखनीय है कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी घनश्याम नायक के दो बेटे हैं। जिनमें से बड़ा बेटा  ब्रजेन्द्र नायक मड़ावरा में रहते हैं जिनके दो बेटे हैं एक बेटा बिजली विभाग मे है तथा दूसरा बेटा किराने की दुकान किये हुए हैं। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी घनश्याम नायक के दूसरे बेटे जीवन कुमार नायक छतरपुर मध्यप्रदेश में रहते हैं जो कि बाँदा उत्तर प्रदेश में जूनियर इंजीनियर हैं। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी घनश्याम नायक के छोटे बेटे जीवन कुमार नायक ने बताया कि को यूरिनल में समस्या थी जिसका इलाज भी चल रहा था। कोई विशेष बीमार भी नहीं थे। मंगलवार 3 जुलाई 2018 को प्रातः 6 बजे उनका निधन हो गया। उनका निधन से क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। उनको देखने के लिये सुबह से ही रिस्तेदार, उनके परिजन, इष्टमित्र, शुभचिंतकों सहित आसपास के लोग भारी संख्या में पहुंचे। इसके साथ ही मध्यप्रदेश एवं उत्तर प्रदेश से भी प्रशासनिक अधिकारी उनकी अंतिम यात्रा में पहुँचे। उनकी अंतिम विदाई राजकीय सम्मान के साथ हुई।

इनका क्या कहना है-

हरप्रसाद राय, मड़ावरा---स्वतंत्रता संग्राम घनश्याम नायक के बारे में जब मड़ावरा निवासी हरप्रसाद राय से बातचीत की गयी तो उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता संग्राम  घनश्याम नायक हमारे गुरु रहे हैं उन्होंने हमें जूनियर हाईस्कूल मड़ावरा में कक्षा 6 से लेकर आठवीं तक पढ़ाया है वे जूनियर हाईस्कूल मड़ावरा एवं साढूमल में तैनात रहे। उनका मड़ावरा जूनियर हाईस्कूल में कार्यकाल लगभग 1958 से 1960 के मध्य रहा।  वे साढूमल जूनियर हाईस्कूल से सेवानिवृत्त हुए।  वे एक कुशल शिक्षक थे तथा हमेशा देश भक्ति की चर्चा करते थे एवं देश के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देते थे। उनकी विचार धारा तथा अच्छी शिंक्षण शैली से सभी प्रभावित थे। उनके समय मे शिक्षक मूरत सिंह, नैनवारा व शिक्षक प्रभुदयाल श्रीवास्तव, बानपुर भी तैनात थे। सभी शिक्षक कुशल शिक्षक थे तथा अच्छी कार्यशैली के धनी थे। वे बच्चों को  पीटी एवं व्यायाम आदि भी कराते थे।

तुलसीराम सोनी, निवासी कस्बा मड़ावरा---स्वतंत्रता संग्राम  घनश्याम नायक हमारे गुरु रहे हैं आज उनके निधन की खबर मिली बहुत दुःख हुआ। उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता संग्राम  घनश्याम नायक एक कुशल शिक्षक के साथ ही होम्योपैथिक चिकित्सक भी थे। वे बहुत ही कम खर्चे में लोगों का उपचार कर देते थे। उनकी छोटी गोलियों की एक खुराक से बीमार व्यक्ति को तुरंत राहत मिल जाती थी। उनकी जितनी भी प्रशंसा की जाये उतनी कम है।
 

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