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कंकरीट के जंगलों ने स्वार्थवश तालाबों की काया ही बिगाड़ दी

कंकरीट के जंगलों में खोए तालाब

स्वार्थवश तालाबों की काया ही बिगाड़ दी। पानी से लबरेज रहने वाले तालाब समय के साथ कंकरीट के जंगल से घिरने लगे। आम जनमानस की ¨जदगी से नजदीकी रिश्ते रखने वाले यह पोखर समय के साथ उन्हीं की नजरों में चढ़ गए। मकान से लेकर कल कारखानों तक की अंधी दौड़ ने तालाबों की तस्वीर ही बदसूरत बना दी। कुल मिलाकर कंकरीट के बढ़ते बेतहासा जंगलों से तालाब बेबस हो गए और अंतत: उसमें डूबने लगे हैं।

कभी निर्मल जलधारा से जेल तालाब के चारो ओर लोगों का मजमा शाम होते ही जुटने लगता था। आसपास बस्ती न होने से साफ सफाई भी रहती थी। नहाने से लेकर कपड़ा धुलने और अन्य कार्यो के लिए लोगों का एक मात्र सहारा था मुख्यालय का जेल तालाब। अब वह सब समय के गर्त में विलुप्त हो गया। तालाब का रूप ही नहीं उसका आकार भी बदल गया। जमीन पर कब्जा करने की अंधी दौड़ से वह भी नहीं बच सका। जेल प्रशासन ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया।

इस समय हालात यह हैं कि तालाब की अधिकांश जमीन पर मकान खड़े हो गए हैं। कुरारा कस्बे में नाग तालाब करीब पांच बीघे का था। अब मात्र तीन बीघा की चौड़ाई ही बची है। दूसरा कजिलिया तालाब है, यह चार बीघे का था। अब आधे से अधिक गायब हो चुका है। पानी है ही नहीं। तीसरा झंडा तालाब, यहां भी अतिक्रमण चारों ओर है। चौथा भगत तालाब भी अतिक्रमण से घिरा है।

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