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जल, जंगल, जमीन के अधिकार को लेकर देवराभापतपुर में लगी चैपाल

काबिज किसानों की बेदखली को लेकर वन महकमे का हुआ विरोध

जिले के अजयगढ़ तहसील क्षेत्रांतर्गत जल, जंगल और जमीन के अधिकार को लेकर समाज सेवी जयराम यादव के नेतृत्व में किसानों द्वारा अपनी आवाज बुलंद करनी शुरू कर दी है। वन विभाग व नेशनल पार्क प्रबंधन द्वारा वर्षो से काबिज हो कर खेती किसानी कर रहे किसानों को उनकी जमीन से बेदखल करने के लिये और किसानों को परेशान करने को लेकर ग्राम देवराभापतपुर में किसान बचाओं यात्रा के अंतर्गत चैपाल का आयोजन किया गया। जिसमें किसानों द्वारा अपनी बात रखते हुये कहा गया कि जो पुरखों से जिस जमीन पर काबिज होकर खेती कर रहा है उनकी भूमि से बेदखल करने के लिये पन्ना टाईगर रिजर्व के अधिकारी परेशान कर रहे है।

खेतों में लगी बारियों को हटाया जा रहा है तथा जंगल में भी किसान के जानवर चले जाते है तो उन किसानो के विरूद्ध झूठे प्रकरण दर्ज कर फसाने का कार्य किया जा रहा है। किसान जिस जमीन में खेती कर अपनी परिवार का भरण-पोषण कर रहे है वह उनसे छीन ली जायेगी तो वह कहा जायेगे। पशु जो किसानो के जीवन से जुड़े हुये है वह उन्हे लेकर कहा जाये। चैपाल में समाज सेवी तथा पन्ना विधानसभा क्षेत्र के पूर्व प्रत्याशी जयराम यादव ने कहा कि पन्ना विधानसभा क्षेत्र में जंगल के चलते इस क्षेत्र का गरीब मजूदर किसान, विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा की जा रही कार्यवाहियों से दुखी एवं प्रताड़ित है और अब हम सब गरीब मजदूर किसान एक हो कर अपने जंगल, जमीन और पानी के अधिकार को लेकर एक जुट हो कर लड़ाई लडऩे जा रहे है।

किसान यात्रा के माध्यम से गांव-गांव चैपाले आयोजित की जायेगी तथा सरकार तक अपनी बाते हम पहुंचायेगे। इसके बाद भी यदि सरकार हमे अपना अधिकार नही देगी तो हम लोकतंत्रिक तरीके से आंदोलन करेगे और हमारे अधिकारियों को लेकर खमोश सरकार को जनता चुनाव में सबक सिखाने का काम भी करेगी। आयोजित की गयी चैपाल में निर्णय लिया गया कि पुरखों से काबिज तथा पट्टे की कृषि भूमि में किसानी कर रहे किसानों को बेदखली को लेकर जिस तरह से वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी काम कर रहे है उन्हे स्थाई रूप से रोका जाये। अब तक वन विभाग द्वारा की गयी कार्यवाहियों के दौरान हल ट्रेक्टर व कृषि उपकरण जप्त किये गये है उन्हे वापस किया जाये तथा नुकसान की भरपायी की जाये। वन अधिकारियों एवं कर्मचारियो द्वारा किसानों गरीबों के विरूद्ध पंजीबद्ध किये गये प्रकरणों को समाप्त किया जाये। काबिज किसानो की भूमि का वन तथा राजस्व विभाग द्वारा संयुक्त सीमांकन कराते हुये जमीन के पट्टे किसानों को प्रदान किये जाये।

असर्वेक्षित जमीन का सर्वे कराकर काबिज किसानों को पट्टे दिये जाये। अनुसूचित जाति जन जाति व अन्य परम्परा गत वनवासियों, पिछड़ावर्ग गरीब व अल्पसंख्यकों के लंबित वनाधिकार प्रकरण मान्य करते हुये वनाधिकार पट्टे दिये जाये। चैपाल में यह भी निर्णय लिया गया कि किसानों के बेरोजगार पुत्र-पुत्रियों को उनकी योग्यता के अनुसार रोजगार के अवसर दिये जाये। आयोजित चैपाल में क्षेत्र के पिछड़ापन को दूर करने के लिये बुंदेलखण्ड राज्य की मांग का समर्थन किया गया। आयोजित चैपाल में किसानों तोढऩ सिंह, वीरेन्द्र द्विवेदी, देवराज, ज्ञानेन्द्र सिंह यादव, मुन्ना यादव, श्रीमती कमलेश शुक्ला, रामकिशुन कुशवाहा, लल्लू कोंदर, प्यारी कोंदर, रामप्रकाश यादव, विनोद यादव, अनिल यादव, राजू, गोपाल अहिरवार, राजू पाल, रामकली अहिरवार आदि द्वारा क्षेंत्र की समस्याओ को चैपाल में रखा गया।

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