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मेडिकल कॉलेज में अब नर्सिंगहोम डाका नहीं डाल पाएंगे

अब डाका नहीं डाल पाएंगे नर्सिंगहोम

महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में अब नर्सिंगहोम डाका नहीं डाल पाएंगे। कॉलेज प्रशासन ने इमरजेंसी में होने वाली एबीजी जांच कराने के लिए व्यवस्था बदल दी है। किसी भी मरीज की एबीजी जांच कराने के पहले उसका फॉर्म भरा जाएगा। इसके अलावा ओपीडी पर्चा या एमआरडी (मेडिकल रिकॉर्ड) नंबर दर्ज करने को अनिवार्य कर दिया गया है। इससे निजी अस्पताल अपने यहां भर्ती मरीजों की जांच नहीं करा सकेंगे।

कुछ प्राइवेट अस्पताल अपने यहां भर्ती मरीजों की एबीजी जांच मेडिकल कॉलेज में करा रहे हैं। यह जांच मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में सिर्फ 150 रुपये में होती है, जबकि निजी अस्पताल मरीजों से 900 से लेकर 1200 रुपये तक वसूलते हैं। एक बार जांच कराने पर नर्सिंगहोम को सीधे 750 से 1050 रुपये की बचत होती है। मेडिकल कॉलेज में एबीजी जांच के लिए कोई नियम-कानून नहीं बना है। कॉलेज में भर्ती जिस मरीज की ये जांच होनी होती है, उसके तीमारदार को ब्लड सैंपल लेकर इमरजेंसी भेज दिया जाता है। वहां न तो मरीज के बाबत पूछताछ की जाती है, न ही ओपीडी पर्चा अथवा फाइल नंबर नोट होता है। इसी का फायदा उठाकर प्राइवेट अस्पताल का स्टाफ भी अपने यहां भर्ती मरीजों की एबीजी जांच करा ले जाता है।

निजी अस्पतालों के खेल को उजागर किया, तब जाकर कॉलेज प्रशासन की नींद टूटी। अब मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने एबीजी जांच के लिए नियम बना दिए हैं। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हरीशचंद्र आर्या ने बताया कि इमरजेंसी में एबीजी जांच कराने पर मरीज का ओपीडी पर्चा या एमआरडी नंबर नोट किया जाएगा। ब्लड बैंक में होने वाली जांच के दौरान भरा जाने वाला पर्चा एबीजी जांच के दौरान भी भरकर लाना होगा। इसमें मरीज का नाम, उम्र, पिता/पति का नाम, कंसलटेंट का नाम, भर्ती स्थान आदि का उल्लेख होगा। यह सब जानकारी एबीजी जांच से पूर्व रजिस्टर में दर्ज होगी। इससे निजी अस्पताल अपने यहां के मरीजों की एबीजी जांच मेडिकल कॉलेज में नहीं करा पाएंगे।

ये होती एबीजी

एबीजी (आर्टियल ब्लड गैस एनालिसिस) जांच डायबिटीज, हृदय, पीलिया सहित अन्य गंभीर रोगों में की जाती है। इससे ब्लड में यूरिया, सोडियम, पोटेशियम, कैल्शियम सहित अन्य तत्वों की शरीर में मौजूदगी का आंकलन किया जाता है। उसी आधार पर मरीज का उपचार व दवाएं दी जाती हैं।

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