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कर्नाटक के समापन के बाद भी भारत के हालात पाकिस्तान जैसे हैं ?

कुछ की हुई बातें भविष्य में सत्य के रूप में सामने चुनौती बनकर खड़ी हो जाती हैं। दिन और तारीख मुझे याद नहीं पर एक मीठी जुबान वाले वामपंथी विचारक ने मुझसे कहा था कि देश में अगर कांग्रेस के जितना शासन भाजपा ने किया होता तो संघ और भाजपा का भारत "पाकिस्तान" की तरह होता है। भारत अपने वर्तमान हालात में पाकिस्तान की दशा को प्राप्त कर चुका होता। कांग्रेस की वजह से भारत अच्छी स्थिति में अभी भी है। ये वामपंथ की वह बातें हैं जो किसी भी माध्यम से जनता के समक्ष नहीं आईं। आज जब राहुल गांधी ने कहा कि भारत के हालात पाकिस्तान की तरह हैं अर्थात भारत की तुलना पाकिस्तान से कर दी तो सबसे पहले असहिष्णुता की अफवाह का समय याद आया फिर मुझे स्मरण हुआ कि यह बात तो वामपंथ के एक विचारक ने बहुत पहले कही थी ! 

मेरा तात्पर्य सिर्फ इतना सा है कि राहुल गांधी सचमुच एक इन्नोसेंट ब्वाय है , जैसाकि तमाम कांग्रेसी और समर्थक लोग कहते हैं कि राहुल गांधी एक अच्छा इंसान है। बेशक राहुल गांधी इतने अच्छे इंसान हैं कि वे स्वयं से स्वीमिंग और साइक्लिंग जैसे कार्य ही करते हैं बावजूद तमाम दिनचर्या आदि अनादि के सिवाय। राहुल गांधी वह प्राणी है , जिसका मशीनीकरण वामपंथ ने किया है। इट्स ए रोबोटिक मैन दैन ए प्रापर ह्यूमन। इनके अंदर जो कुछ भी डीकोड कर देंगे वही बोल देंगे। भारत की तुलना पाकिस्तान से राहुल गांधी की जुबान से वामपंथ की वह विचारधारा की आवाज है , जिसके बलबूते वे आज तक सत्ता सुख भोगते रहे और लेनिन व मार्क्स का चीरहरण करते रहे। वामपंथी दलों , कांग्रेस व वामपंथी पत्रकारों सत्ता इस तरह से छिनती चली गई , जिसका स्वप्न भी इन लोगों ने कभी देखा नहीं रहा होगा। इसलिये इनकी वह बातें मीडिया आदि के जरिए सामने आने लगीं , जिनके जरिए ये अपने मंसूबे कामयाब करते रहे हैं। 

राहुल गांधी को ये लोग आराम से डीकोड कर पाते हैं और गांधी परिवार का यही वह वारिस है , जो इनके छिने हुए सिंहासन एनकेन प्रकारेण उपलब्ध करवा सकता है। आखिर उम्मीद का चिराग इसलिये ही इतना फड़फड़ा रहा है कि दिया बुझने के वक्त ऐसे ही फडफडाता है। अस्तु भारतीयों को समझना होगा कि यह राहुल की भाषा नहीं है बल्कि उनसे यह सब बुलवाया जा रहा है ताकि कोई तरह का भ्रम व्यापक तौर पर पैदा कर सत्ता हथियाई जा सके और यह हिन्दुस्तान की जनता पर अपने वह सभी एजेंडे पुनः चला सकें जिनके बलबूते पर अभी तक इनकी सांसे चल रही हैं। किन्तु अब वैसा समय नहीं रहा किसी ना किसी माध्यम से सच सामने आ जाता है और षणयंत्र पर षणयंत्र असफल होने लगते हैं , भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी दल द्वारा ऐसा बोला जाने से बड़ा और षणयंत्र क्या हो सकता है। प्रधानमंत्री का सपना देखने वाले राहुल गांधी को देश की जनता से अतिशीघ्र माफी मांग लेनी चाहिए। 

( ये लेखक के निजी विचार हैं )

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