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पेट्रोल एवं डीजल के बढ़ते दामों से मध्यमवर्ग परिवार त्रस्त एवं परेशान

देश में पेट्रोल एवं डीजल की आये दिन मूल्य वृद्धि से आम मध्यमवर्गीय जनता त्रस्त एवं परेशान है। जहाॅ पेट्रोल एवं डीजल में पिछले 2 सप्ताहों में जो तेजी आई है, उससे लगता है इस बार पेट्रोल की कीमतें, तीन अंकों तक पहुॅच जायेगी। जब से पेट्रोल कंपनिओं ने फैसला किया हैं कि दिन प्रतिदिन कीमतें तय होगीं, तब हो इनके दामों में कमी कम एवं वृद्धि ज्यादा हुई है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कू्रड़ आॅयल की मूल्यवृद्धि के साथ के साथ ही भारत में बाजार आधारित वास्तविक मूल्य वृद्धि दैनिक आधार पर की जाती है।

पेट्रोल एवं डीजल की कीमतों में तेजी आने से ट्रांसपोर्टेशन में भी तेजी आती है, परिणामस्वरूप रोजाना जरूरत का सामान की वस्तुओं में वृद्धि होना आम बात है। घरेलू सामानों की कीमतों में वृद्धि एवं यात्रा करने पर भी, किराये में तेजी आ जाती है, यू कहें कि यात्रा भी महंगी हो जाती है, कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी।

भारत अपने पडोसी देश की तुलना में टैक्स की दर सर्वाधिक है। जहाॅ पडोसी देश पाकिस्तान एवं बाग्लादेश में पेट्रोल एवं डीजल की कीमतें बहुत कम है। जिस प्रकार भारत सरकार ने अधिकतर वस्तुओं पर जीएसटी लगाकर करों की दरों का सरलीकरण किया है वहीं पेट्रोल एवं डीजल को जीएसटी के दायरें से बाहर रखा हुआ है। पेट्रोल एवं डीजल की मूल्य वृद्धि पर सरकार का नियंत्रण नहीं है, क्योंकि अन्र्तराष्ट्रीय बाजार में इसकी माॅग पूर्ति/कीमतों के घटने या बढ़ने के आधार पर तय की जाती है।

जहाॅ भारत, पेट्रोल एवं डीजल की आवश्यकता का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। फिर भी सरकार को जनता का दर्द समझना चाहिये तथा करों में राहत देकर प्रेट्रो उत्पादों के बढ़ते मूल्यों पर अंकुश लगाया जा सकता है। अगर यहीं स्थिति बनी रहीं तो आने वाले समय पर पेट्रोल एवं डीजल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी, फिर इन अंकुश लग पाना सम्भव नहीं लगता। सरकार को उर्जा के अन्य वैकल्पिक श्रोत्रों सौर उर्जा एवं नाभकीय उर्जा के सतत उपयोग को बढा़वा देकर हम पेट्रो उत्पादों के लगातार बढ़ती माॅग को कुछ नियंत्रित कर सकते है।

अवधेश सिंह यादव

पीएसआईटी, कानपुर

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