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कर्नाटक के घटनाक्रम ने बदल दी भारत की किस्मत , जश्न मनाए जनता

पप्पू के ऊपर हत्या का मुकदमा दर्ज हो गया था। किन्तु पप्पू निर्दोष था। अब उसकी निर्दोषता को कोर्ट ही तय कर सकता था। पप्पू को पूर्ण भरोसा था कि उसके गवाहों की गवाही से निर्दोष सिद्ध हो जाएगा। उसे अपने वकील से लेकर जज साहब तक भरोसा था कि न्यायालय ही वह जगह है , जहाँ से निरीह - निर्दोष लोगों की जिंदगी बच जाया करती है। लेकिन पप्पू के मामले में नाटकीय फिल्मी परिवर्तन हुआ और कुछ गवाह खरीद लिए गए तो बिकने और ना बिकने वालों को बस में भरकर फंसाने वाले लोग दूर हैदराबाद की तरफ ले गए , यहाँ तक की परिवार को धमकियां दी गईं। जब इससे भी बात नहीं बनी तो पप्पू के वकील और जज को भी खरीद लिया गया। इस दुनिया में कीमत सबकी लग जाती है और लोग बिक भी जाते हैं। बस मौके की बात होती है। जज साहब भी विशेष विचारधारा के प्रभाव वाले व्यक्ति थे और वकील साहब भी लालची किस्म के व्यक्ति तो थे ही ! 

फिल्मों में देखा ही गया है कि किस प्रकार से निर्दोष व्यक्ति सलाखों के पीछे चला जाता है और इस मामले में भी कानून की आंखो पर पट्टी बंधी रही। निर्दोष पप्पू साजिश का शिकार हो गया। जब देश का आम नागरिक न्यायालय का गैर जिम्मेदाराना रवैया हकीकत में और कहानियों में देखता - सुनता और पढ़ता है तब उसे न्याय पाने की उम्मीद खत्म सी होने लगती है और इसे ही कहते हैं कि भयभीत हो जाना और जीने की इच्छा भी खत्म होने लगती है। भारत की दुनिया में कितनी भी बेइमानी हो परंतु सुप्रीम कोर्ट जैसी संस्था में आम आदमी का विश्वास कायम रहा है। जबकि सुप्रीम कोर्ट भगवान की तरह ही आम आदमी की पहुंच से दूर है। सुप्रीम कोर्ट भी सुप्रीम लोगों के लिए ज्यादा से ज्यादा है और सुप्रीम लोग आतंकी के लिए भी सुप्रीम कोर्ट के पट आधी रात को खुलवा लेते हैं। इसके बावजूद भी देश के सुप्रीम पर्सनैलिटी और सबसे पुरानी पार्टी का तमगा हासिल किए कांग्रेस के लोगों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट को नरेन्द्र मोदी मैनेज किए हैं या फिर सुप्रीम कोर्ट भी सरकार के इशारे पर चलता है।

एक राजनीतिक दल द्वारा इस प्रकार का भ्रम कायम करना देश की जनता और न्यायिक संस्था के मध्य विश्वास कम करने व खत्म करने का वह गुनाह है , जो अक्षम्य है।अपने निजी स्वार्थ के लिए संस्था पर शक की दुधारी तलवार चलाओ और जब न्याय तुम्हारे पक्ष में आ जाए तब संस्था नहीं व्यक्ति की ओर इशारा कर दो। इससे विपक्ष बच नहीं सकता। देश की जनता राहुल गांधी के पीएम बनने एवं न्यायपालिका पर अविश्वास की बात याद रखे ताकि देश हित में जनता सही फैसला कर सके।

भाजपा कर्नाटक में भले सरकार ना बना सकी परंतु इस पूरे घटनाक्रम से न्याय और न्यायपालिका से जो ग्रहण हटा है , वह देश के लिए इतना शुभ है कि भविष्य में बड़ा बवाल और दंगा होने तथा विपक्ष की घृणित राजनीति का खात्मा कर दिया। कल्पना करिए कि राम मंदिर का फैसला आया होता और विपक्ष फिर यही कहता अरे ये तो मोदी का फैसला है फिर धर्म विशेष को लाभ मिलता और एक बार फिर कत्लेआम हो जाता , विपक्ष इन्ही सबके लिए अपने चेलों से माहौल बनवा रहा था।

आज भारत की जनता को जश्न मनाना चाहिए कि देश से बहुत बड़ा ग्रहण छंट गया। पप्पू को भी अंत में न्याय मिल गया था। क्योंकि जज साहब बदल चुके थे , उसने अपना वकील भी बदल दिया था और रिब्यू पिटिशन में पप्पू को लाभ मिली , जिससे उसका न्यायपालिका पर विश्वास जिंदा हो गया। 

( मिश्रित कल्पना में लेखक के निजी विचार हैं )

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