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शिक्षक छात्रों में साफ्टवेयर डेवलप करते हैं

एक होटल में बैठा था। पीछे से तेज आवाज गूंज रही थी , जो मेरे कान से होते हुए सीने को चीर रही थी। मन किया कि कुछ बोल दूं फिर भी सिर्फ सोचता रहा कि जाने दो , यह भी एक अजीब नशा है। वो कह रहे थे , 3 करोड़ 50 लाख की बिल्डिंग है और कोई भी अध्यापक 25 हजार से कम का नहीं है और प्रिंसिपल तो 35000 ₹ लेते हैं। वो शिक्षा और शिक्षक की गुणवत्ता महंगे इंफ्रास्ट्रक्चर और मंहगे शिक्षकों से सिद्ध कर रहे थे। प्रिंसिपल से मैं बखूबी परिचित हूँ कि वह आरएसएस के स्कूल से रिटायर्ड हो चुके हैं , अर्थात रिटायरमेंट की उम्र से गुजर कर आराम फरमाने वाली उम्र में पुनः प्रिंसिपल हो गए हैं। मेरे बचपन के समय और अब के डिजिटल युग में जितना फर्क है तब भी इतना ही नई पीढ़ी और पुरानी पीढ़ी के प्रिंसिपल के मध्य फर्क था। अनुभव बोलता है लेकिन यह राजनीति नहीं शिक्षा का क्षेत्र है और बच्चों के स्वर्णिम भविष्य के लिए पीढ़ियों के मध्य भी सामंजस्य स्थापित करना होता है। 

शिक्षा का क्षेत्र सबसे अधिक संवेदनशील क्षेत्र है। एक शल्य चिकित्सक आपरेशन करने के वक्त आटो एलर्ट रहता है , तनिक भी गलती हुई कि मरीज की मौत हो जाती है। एक शिक्षक शल्य चिकित्सक से ज्यादा जिम्मेदार होता है , शल्य चिकित्सक हार्डवेयर रिपेयर करता है , पार्ट भी लगाए जा सकते हैं। किन्तु शिक्षक साफ्टवेयर डेवलप करता है अर्थात मानसिकता का जिम्मेदार होता है और अच्छी मानसिकता से ही अच्छे व्यक्तित्व के छात्रों का निर्माण हो सकता है। बेशक डिग्रीधारी और रट्टू तोता बहुत से स्कूल - कालेज जन्म दे रहे हैं , लेकिन इससे देश के हालात सुधरते तो आज परिस्थिति कुछ और होती है। इसलिये हजारों का टैग लिए शिक्षक और हाईफाई बिल्डिंग से स्कूल की गुणवत्ता बताने वाले भी उतने ही दोषी हैं , जितने वे लोग जो ऐसी ही मानसिकता से अपने बच्चों के लिए स्कूल का चुनाव करते हैं , फिर आपका बच्चा इंसान कम मशीन ज्यादा बनकर निकलता है। 

एक शिक्षक के अंदर नौकरी के भाव से अधिक शिक्षक होने का भाव होना चाहिए , शिक्षा द्वारा राष्ट्र निर्माण का एहसास प्रबल होना चाहिए। शेष बिल्डिंग का क्या है ? वह तो निर्जीव है ! इसलिए माता-पिता अपने बच्चों का एडमिशन कराने से पहले विचार करें कि प्रिंसिपल से लेकर प्रत्येक शिक्षक के अंदर शिक्षा वाले भाव प्रबल हैं कि कुछ लोचा है और अगर लोचा होता है तब ही घटनाएं सामने आती हैं कि बच्चा हिंसक हुआ और प्रिंसिपल को सूट कर दिया। बच्चों के स्वर्णिम भविष्य के लिए परिवार और स्कूल सबसे अधिक जिम्मेदार हैं फिर सामाजिक माहौल का भी बड़ा योगदान है।

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