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प्रसव की पीड़ा देख भी नहीं पिघले रिश्वत मांगने वाले

सड़क पर बच्चे को जन्म देना पड़ा

मानवीय संवेदना पैसो के आगे घुटने टेक रही है। मोठ में एक ऐसा मामला सामने आया, जिसमें प्रसव के लिये परेशान महिला की पीड़ा देखने के बाद भी रिश्वत मांगने वालों का दिल नहीं पसीजा। नतीजा यह हुआ कि महिला को सड़क पर ही बच्चे को जन्म देना पड़ा। प्रशासन मामले की जांच की बात कह रहा है।

तहसील मोंठ क्षेत्र के ग्राम खिरिया घाट निवासी दीपक यादव अपनी गर्भवती पत्नी डोली को प्रसव कराने के लिए बीती 18 मई की रात को मोंठ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लाया था। जहां लगभग काफी देर तक एएनएम सुशीला द्वारा डिलीवरी में परेशानी बताते हुए 10 हजार रूपये की मांग की जाने लगी, तब उसने एएनएम सुशीला से गरीबी की दुहाई लगाते हुए 5 हजार रूपये में उसकी पत्नी की डिलीवरी कराने की बात कही | उसने दस हजार रुपए देने में अपनी असमर्थता जताई, लेकिन एएनएम का दिल नहीं पसीजा और उसने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में महिला की डिलीवरी करने से मना कर दिया | उन्होंने डिलीवरी रूम से बिना रेफर लेटर दिए उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया, जिससे वह महज चंद कदमों की दूरी पर स्थित मेडिकल तिराहा पर ही पहुंचा था, तभी उसकी पत्नी ने अचानक बाथरूम के लिए बोला तो परिजनों ने बाथरूम के लिए जैसे ही बैठाया तभी रोड पर ही उसने बच्चे को जन्म दे दिया। आनन-फानन में वह वापस फिर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचा और उसने अपनी पत्नी की बीच सड़क में डिलीवरी होने की बात बताई | जिस पर एएनएम ने कहा कि बच्चा हो गया तो मैं क्या करूं वापस ले जाओ अपने घर | दीपक ने एक प्राइवेट अस्पताल में जच्चा बच्चा को भर्ती कराकर सुरक्षित किया।

लापरवाही की हदें की पार

ऐसे में एक बड़ा सवाल यह पैदा होता है कि आखिर शासन द्वारा करोड़ों रुपए जच्चा-बच्चा योजनाओं के तहत बहाया जा रहा है। लेकिन स्वास्थ्य कर्मचारी अभी भी वही पुराने ढर्रे में चल रहे हैं और शासन की योजनाओं को पलीता लगाने का काम किया जा रहा है। ऐसे में एक बात और भी है कि अगर कहीं जच्चा-बच्चा की जान को खतरा हो जाता तो उसका जिम्मेदार आखिर कौन होता शासन,प्रशासन या स्वास्थ्य केंद्र के अधिकारी या कर्मचारी, यह कोई पहला मामला नहीं है ऐसे और भी कई बार मामले आए हैं लेकिन स्पष्ट न होने के कारण जब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ सुमित मिसूरिया द्वारा जब-जब इस बारे में जानकारी की जाती है तब तब उनका गोलमोल जवाब देकर टालमटोल कर दी जाती है। क्योंकि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डा सुमित मिसूरिया का निवास झांसी में है, तो वह दोपहर के 2:00 बजते ही अपने घर के लिए रवाना हो जाते हैं। फिर उनकी यहीं से स्वास्थ्य केंद्र की जिम्मेदारियां खत्म हो जाती है। जच्चा के पति दीपक ने बताया कि सरकारी अस्पताल में एएनएम सुशीला द्वारा दस हजार रुपये की माग की गई तो मैंने कहा कि मैं गरीब हूँ पॅच हजार रुपये तक दे दूंगा मगर वह नहीं मानी और मुझे बाहर का रास्ता दिखा दिया और मेरी पत्नी की डिलेवरी रोड पर ही हो गई।

कर्मचारियों के विरुद्ध सख्त कार्यवाही के आदेश

 

मामला संज्ञान में आने के बाद कमिश्नर कुदुमलता श्रीवास्तव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के दोषी कर्मचारियों के विरुद्ध सख्त कार्यवाही के आदेश दे दिए हैं | उन्होंने बताया कि ए डी हैल्थ को जाच के आदेश दे दिये गए हैं | कमिश्नर ने जोन डायरेक्टर डा रेखा को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर उनके समक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं | उन्होंने बताया कि जरूरत पड़ने पर मेरे स्तर से भी कार्यवाही कि जायेगी | जिससे दोषियों को किसी भी हाल में बचने का मौका ना मिल पाए |

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