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नेताओं की शोक संवेदना और शुभकामनाये एक सी

आप नेताओं से शोक व्यक्त करने की अपेक्षा क्यों रखते हैं ? नेताओं से शुभकामनाये प्राप्त करने की अपेक्षा क्यों रखते हैं ? क्या आपको उनका शोक वास्तविक महसूस होता है ? जनता के सोचने का वक्त है ! वे शोक भी व्यक्त करते हैं तो प्रसिद्ध होने के लिए। एक समय एक युवा नेता की जुबान से सुना था कि उनकी नेता प्रवृत्ति की माँ रात भर नहीं सोई , संभव है कि यह वक्तव्य सुनकर भारत की एक वर्ग वाली जनता प्रभावमय हुई होगी कि देखो हमारी नेता रात भर नहीं सोई। क्या कभी ये खबर बनती है कि एक गरीब जिंदगी की समस्या से जूझते हुए कई रात नहीं सोया ? उसके ना सोने और ना सो पाने की वजह कोई बहुत बड़ी घटना बनती है क्या ? अगर कोई आम आदमी किसी भी सरकार के समय जिंदगी में आई समस्या की वजह से नहीं सो पाता तो मानवाधिकार का हनन ही तो है। जाने कितने ऐसे लोग हैं , जो चार पैसा कमाने के लिए रात रात भर गार्ड की नौकरी से लेकर तमाम तरह के काम करते हैं , जबकि सारी दुनिया जानती है कि रात सोने के लिए है और दिन कर्म किए जाने के लिए है।

स्वेच्छा से हम रात में भी कर्म करें तो कोई बात नहीं पर जब रात का जागना मजबूरी वश होता है तब नेता और सरकार की विफलता है। इतना चिंतित कौन नेता हो सकता है कि उनके राज्य की जनता चैन की नींद ले सके ? इतनी जागरूक और सजग मानवीय किस्म की जनता कहाँ है ? , जो हर आदमी की सुख की नींद की वजह बन सके और चिंतित हो सके ! बहुत बार इस देश में बवाल मचता है कि देश के प्रधानमंत्री या बड़े नेता ने फला त्योहार पर जनता को शुभकामनायें नहीं दीं और इस पर ही समाज खतरे में नजर आने लगता है। कितनी हास्यास्पद स्थिति है कि नेता की शुभकामनाओं की भूख है आपको ? नेता जी की शुभकामनाओं से सभी के जीवन में शुभ शुभ होता तो छुटभैये से लेकर बड़े से बड़े नेतागण बड़ी - बड़ी होर्डिंग्स लगा रहे हैं और शुभकामनाये दे रहे हैं ? क्या हुआ अगर किसी एक ने शुभकामना नहीं दी तो क्या त्योहार अशुभ हो जाएगा ? एक दर्दनाक घटना पर नेता ने दुख नहीं जताया तो क्या हुआ ? उनके दुख जताने और ईश्वर से प्रार्थना करने से सबकुछ फौरन ही अच्छा होगा क्या ? 

प्रार्थना में ताकत होती है और एक आम आदमी सच्चे मन से ब्रह्मांड की समस्त शक्तियों से प्रार्थना कर ले तो भी बहुत अच्छा हो सकता है। क्योंकि शक्तियां हृदय के स्पंदन को महसूस करती हैं और सच्ची प्रार्थना को स्वीकार करती हैं। नेता तो सबकुछ खाली जुबान से और डिजाइनर शब्दों में बोल रहे हैं ? उनका शोक भी वैसा ही है जैसे उनकी शुभकामनायें फिर भी जनता ना समझे तो गलती नेता की नहीं जनता की है। आप स्वयं विचार करिए कि कब , कहाँ और कितनी गलती की , कि आज भी जिंदगी की सामान्य सुरक्षा की गारंटी और चैन की नींद सो पाने का अधिकार आम आदमी के पास नहीं है ? 

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