< कश्मीर में सेना के हाथ पूरी तरह से बंधे भी नहीं हैं Hindi News - Breaking News, Latest News in Hindi, हिंदी में समाचार, Samachar - Bundelkhand News केन्द्र सरकार द्वारा रमजान के मौके पर आपरेशन आल आऊट पर सशर्त सीज"/>

कश्मीर में सेना के हाथ पूरी तरह से बंधे भी नहीं हैं

केन्द्र सरकार द्वारा रमजान के मौके पर आपरेशन आल आऊट पर सशर्त सीज फायर की घोषणा की गई है। यदि आतंकी हमला करेंगे तो उन पर हमला किया जाएगा। जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने रमजान के अवसर पर रक्त ना बहाए जाने की मांग रखी थी , साथ ही हवाला दिया था कि अमरनाथ यात्रा भी शांति से हो सके। अब देखने योग्य है कि आतंकी रमजान के समय शांति रखते हैं या फिर आतंकियों का कोई धर्म नहीं होता कि कहावत चरितार्थ करेंगे अथवा शांति बनी रहने से आतंक के धर्म की परिभाषा तय होगी ? फिर तय हो सकता है कि आतंकी अपना धर्म मानते हैं और त्योहार भी मनाते हैं। खैर मानवता के दृष्टिकोण से आतंकवाद के खात्मे हेतु आतंक के धर्म को परिभाषित भी नहीं होना चाहिए , किन्तु अब तक आतंकी स्वयं को धर्म से अलग-थलग महसूस ही नहीं किए और ना ही अंत्योष्टि से लेकर किसी भी मामले में कोई बड़ी पहल हुई। छद्म मानवता के आका तो बुरहान वानी के भाई को भी कह रहे थे कि आतंकी भाई का भाई आतंकी कैसे ? जबकि एक माँ आतंकी ना हो फिर भी चलचित्र कश्मीर से ही प्रसारित हुआ कि मानवता पर धब्बा बनी माँ भी आतंकी बेटे को फायर कर सलामी दे रही है।

अगर रमजान के महीने में शांति बनी रहती है तो मैं अल्लाह से दुआ करूंगा कि हर महीना रमजान का हो और वजीरेआला नरेन्द्र मोदी से मांग करूंगा कि हर महीना रमजान घोषित हो ताकि अटल - शांति की स्थापना हो सके , जिसकी स्थापना स्वयं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी समस्त अपील व वीर रस से लेकर हास्य रस तक बस यात्रा द्वारा भी कायम नहीं कर सके। रमजान में शांति हो परंतु यह गठबंधन गेस्टहाउस कांड की तरह ही है कि लाख मुद्दते कोशिश कर लो यात्रा पर बम भी फटेगा और दे दना दन गोलियां भी चलेंगी और गारंटी तो रमजान की भी नहीं है। बशर्ते अल्लाह तो कुर्बानियों से खुश होते हैं और सबसे प्यारी चीज तो आतंकियों की मौत ही है , रमजान में ना सही महबूबा बकरीद के दिन चुन चुन कर मारने दें ताकि अल्लाह को कुर्बानी दे सकें और मुझे यकीन है कि आतंकियों की मौत से मानवता की स्थापना हेतु प्रयास से अल्लाह नामक एकमात्र ईश्वर खुश ही होगें। बेशक मम्मी - अम्मी को रात भर नींद ना आए और बेटा युवराज कहे कि माँ रात भर नहीं सो सकीं। बतौर सरकार मजबूरी ही कही जा सकती है फिर भी सशर्त शांति की स्वीकृति भी काबिलेतारीफ है कि आखिर विभाजन रेखा तो तय हो रही है। फिर भी सवाल बना रहेगा कि घुसपैठ कैसे रूकेगी एवं आतंकी संगठित नहीं होने पाएंगे। अपितु सेना के हाथ पूरी तरह बंधे भी नहीं हैं।

( लेखक के निजी विचार हैं)

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