< बीसीसीआई को झटका क्रिकेट बोर्ड के संविधान मे कोई परिवर्तन नही Hindi News - Breaking News, Latest News in Hindi, हिंदी में समाचार, Samachar - Bundelkhand News क्रिकेट संविधान मे संशोधन होने के लिए बीसीसीआई की मांग को नकार द"/>

बीसीसीआई को झटका क्रिकेट बोर्ड के संविधान मे कोई परिवर्तन नही

क्रिकेट संविधान मे संशोधन होने के लिए बीसीसीआई की मांग को नकार दिया गया है। यह बीसीसीआई के शीर्ष अधिकारियो के लिए झटका हो सकता है, क्योंकि न्यायमित्र गोपाल सुब्रमण्यम ने क्रिकेट बोर्ड के संविधान मे न्यायमूर्ति आरएम लोढ़ा समिति की अधिकतर सिफारिशो से छेड़छाड़ नही की है। न्यायमित्र ने सिर्फ एक बिंदु पर बदलाव का सुझाव दिया है और वह वर्तमान के तीन सदस्यीय चयन पैनल के बजाय पूर्व के पांच सदस्यीय पैनल पर लौटना है। बीसीसीआई के अधिकतर पदाधिकारीयों कुछ नियमो को विवादास्पद मानते हैं उनमे ये नियम शामिल है- एक राज्य एक मत, 18 साल का कार्यकाल, प्रत्येक तीन साल के बाद विश्राम, 70 साल की उम्र तक ही पदाधिकारी बने रहने की शर्त तथा पदाधिकारियों और वेतनभोगी कर्मचारियो के बीच कार्यों का आवंटन शामिल है।

न्यायमूर्ति ने सभी नियमो को बदलने के बजाय सिर्फ एक नियम मे कुछ बदलाव कर सकती है। बताते चले कि एक राज्य एक मत के मामले मे न्यायमित्र ने सुझाव दिया है कि रेलवे को महिला क्रिकेट मे उसके योगदान को देखते हुए संस्थानिक इकाइयो मे एक मतदाता सदस्य के रूप मे विचार किया जा सकता है। लेकिन मतदाता रेलवे का अधिकारी नही, बल्कि कोई पूर्व खिलाड़ी होना चाहिए. सेना, विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय क्रिकेट क्लब ( एनसीसी ) और क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया ( सीसीआई ) अपना मताधिकार वापस नही पा सकेंगे।

इन सब उपरान्त न्यायमित्र ने इसके साथ ही स्पष्ट किया कि कोई भी सदस्य नौ साल की संचयी अवधि के लिए बीसीसीआई और राज्य संघो का पदाधिकारी बन सकता है, जिसमे लोढ़ा सुधारो के अनुसार तीन साल का विश्राम का समय रहेगा।

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