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बसपा सरकार में काम शुरू , सपा में दो बार बनी और योगी सरकार में रफू कर रहा पीडब्ल्यूडी

इस सड़क का इतिहास बड़ा पुराना है। बसपा शासनकाल सेे पहले कम चौड़ी सड़क चित्रकूट जिले की कर्वी से राजापुर तक वाया पहाड़ी सबसे अच्छी सड़क मानी जाती थी। बहन जी सत्ता में आईं और विकास की आंधी चली तो सड़क को उखाड़ दिया गया। चौड़ीकरण को लेकर लंबा समय लिया गया। बसपा शासनकाल में बनने को शुरू हुई सड़क लगभग अधूरी ही रह गई और सत्ता परिवर्तन हुआ , तो समाजवादियों की सेवा शुरू हो गई। चित्रकूट के जिला स्तरीय नेता कम ठेकेदारों द्वारा सड़क निर्माण शुरू हुआ। नेता कम ठेकेदार जब डामरीकरण करते हैं , तब पहली ही बरसात से सड़क नेताओं की कुर्ते की तरह चिथड़े चिथड़े होना शुरू हो जाती है। देखते ही देखते कर्वी से राजापुर तक सड़क कम छोटे - बड़े गढ्ढे आकार लेने लगे और सड़क पर गढ्ढाराज हो गया।

एक बार फिर अखिलेश यादव को इस सड़क का ख्याल आया और बोले कि इस बार ऐसी सड़क बनाऊंगा कि फोर व्हीलर की बोनट में पानी भरा गिलास रखकर निकलिए पानी नहीं छलकेगा। तत्कालीन सीएम के इस वादे से गनता गदगद होकर कलींदा ( तरबूज) हो गई। कुछ ही समय में काम शुरू हुआ तो पता चला कि इस बार ठेका किसी कंपनी को दिया गया है और वह कंपनी बहुत बड़ी कंपनी है। सूर्खियां तेज रहीं कि अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल सिंह यादव के बड़े करीबी लोग हैं अथवा कहीं से कोई रिश्तेदार हैं। कुलमिलाकर के सड़क निर्माण हुआ। किन्तु अभी सड़क को बनकर एक वर्ष ही पूर्ण होकर वर्षगांठ मनाने को सोचा जा सकता था कि फिर एक बार जन्म के साथ ही मृत्यु के कगार पर बिछी हुई है। 

सपा शासनकाल में जो सड़क बनी , उस पर भाजपा शासनकाल में गढ्ढे भरे जा रहे हैं। जहाँ से सड़क के टूटने - फटने की जोरदार संभावना है। वहाँ पहले से रफू किया जा रहा है। पीडब्ल्यूडी की यह दर्जीगिरी आखिर सड़क को कब तक जिंदा रखेगी। जिलाधिकारी चित्रकूट युवा हैं और ईमानदार भी हैं। देश  के प्रति समर्पित व्यक्तित्व के स्वामी हैं , तब ऐसे में आशान्वित हुआ जा सकता है कि इस सड़क की गम्भीरता से जांच कराकर दोषी अधिकारी व संस्था को दंडित किया जाए। जिले में चर्चा का विषय बना है कि पीडब्ल्यूडी का एक सहायक अभियंता , जिसका स्थाई मकान भी चित्रकूट में ही बना हुआ है , उसके द्वारा धन का बंदरबांट एनकेन प्रकारेण किया जाता है। पूर्व में कुछ चक भूपत का पुरवा एवं ट्रांजिट हास्टल में गडबडी व धन डकारने की चर्चा भी सुनामी की तरह चली। 

अतः मेंटिनेंस आदि तमाम छोटे मोटे काम दिखाकर छोटे नेता व चहेते ठेकेदार आदि को मोटा बनाने व स्वयं को भी मोटा बनाए रखने जैसी भ्रष्ट कवायद पर लगाम लगनी चाहिए। जिलाधिकारी चित्रकूट से उम्मीद की जा सकती है कि जिले सुर्खीमय व्याप्त पीडब्ल्यूडी के भ्रष्टाचार पर इमानदारी का चाबुक अवश्य चलाएंगे।

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