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नैयर दमोही को मिला एमपी सरकार का निदा फ़ाज़ली सम्मान

शायर नैयर दमोही को मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी का प्रतिष्ठित "निदा फाज़ली" सम्मान भोपाल के संस्कृति कुटकुट भवन में आयोजित गरिमामय समारोह में दिया गया। वर्ष 2017-18 के पुरस्कारों से प्रदेश के प्रसिद्ध रचनाकारों, कलमकारों, साहित्यकारों को सम्मानित किया गया। इसी श्रृंखला के तहत मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी संस्कृति विभाग ने प्रदेश का प्रमुख सम्मान निदा फ़ाज़ली पुरस्कार उर्दू के महान शायर गीतकार दमोह निवासी नैयर दमोही को भोपाल के संस्कृति भवन में कल शाम आयोजित सम्मान समारोह में दिया गया। ये सम्मान उर्दू अदब की ख़िदमत करने और उर्दू साहित्य को आम जन मानस तक पहुँचाने के लिए सम्मानित किया गया। दमोह और मध्यप्रदेश को उर्दू शायरी से देश और दुनियाँ में पहचान दिलाने वाले प्रसिद्ध शायर नैयर दमोही को सम्मान हासिल होने पर साहित्य जगत में खुशी की लहर है और सभी साहित्य, कला जगत से जुड़े लोगों ने उन्हें शुभकामनाएं दी।

एक नजर नैयर दमोही पर

आज से  77 साल पहले मध्यप्रदेश की सरज़मी पर एक तुलु आफ़ताब  (सूर्य उदय) हुआ जिसकी रौशनी और चमक दमोह जिले से उठकर न सिर्फ मध्यप्रदेश बल्कि सारे हिन्दुस्तान में फैल गई और मुल्क के बाहर अपने देश का नाम रोशन किया जो आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है !

नैय्यर दमोही की पैदाइश 1 जुलाई 1940 में  मध्यप्रदेश के दमोह शहर में हुई , पूरा नाम नूर मोहम्मद है और तख़ल्लुस - नैय्यर दमोही के नाम से सारे देश में बड़े ही अदब सम्मान से लिया जाता है !

शायरी की शुरुआत सन 1960 से है आपने अपने शेरी कलामों में ज्यादातर नाते रसूल और गज़लें इसके अलावा गीत, रुबाई नज़्में, मनकबत लिखी है ।

नैय्यर दमोही साहब ने बुज़ुर्गाने दीन पर कलाम ज्यादा लिखे है जिसे आज भी हिन्दुस्तान का हर छोटा बड़ा फनकार, क़व्वाल बड़े ही शौक से पढ़ते है ! शेरो शायरी की तालीम अपने पिता मरहूम नबी मोहम्मद "आक़िल" से मिली जो अपने ज़माने के उस्ताद शायर थे !

नैय्यर साहब ने उर्दू शायरी की दुनिया में अपना अलग मुकाम हासिल किया है हिन्दुस्तान का कोई भी दिनी जलसा, ऑल इण्डिया मुशायरों की महफिल में बड़े ही अदब से सुना जाता है ! 

नैयर साहब ने उर्दू अदब की खिदमत में अपनी उम्र के 60 साल गुजार दिये , साथ ही एक उस्ताद शायर की है सियत से उर्दू अदब को अपने शहर में कायम रखने के लिए एक साहित्यिक  ''अदबी इदारा - ए - सलामी'' संस्था भी चला रहे है, जिसमे नए कलमकारों  के शौकीनों को उर्दू शायरी की तालीम देकर तैयार कर उनकी रहनुमाई कर रहे है ! आपने शायरी से मुल्क की अवाम को काफी मुतास्सिर प्रभावित किया है। सन 1982 में नैय्यर साहब को पडोसी मुल्क पाकिस्तान में आयोजित  ''आलमी नात कॉन्फ्रेंस'' में हिस्सा लेने का मौका मिला जहाँ 22 देशों के शायरों ने हिस्सा लिया। जहाँ  नैय्यर साहब को सेकेंड प्राइज़ से नवाज़ा गया तत्कालीन प्रधान मंत्री स्व श्रीमती इंद्रा गाँधी जी ने नैय्यर साहब को पत्र लिखकर मुबारकबाद देते हुए उनकी हौसला अफ़जाही की थी ! 
इसके अलावा राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर नैय्यर दमोही साहब को इनामों इकराम से भी नवाजा गया है ! 2006 में रायपुर छ्त्तीसगढ  में ''मुहफीजे उर्दू अवॉर्ड'' से नवाजा गया ! 

नैय्यर  साहब के अब तक { 7 -  मजमूअऐ कलाम } मंजरे आम पर आ चुके है , जिनमे एक ग़ज़ल संग्रह  
''शुआ - ए - नैय्यर'' मध्यप्रदेश उर्दू अकेडमी ने  प्रकाशित किया बाकी नात और मनकबत और गज़लों की किताबे भी प्रकाशित हो चुकी है !       

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अब तक प्रकाशित किताबें

अनवारे जमाल  - नात संग्रह  , सन 1983 में मुजफ्फरपुर यू पी से 

वारिशे नगमात - नातो मनकबत , सन 1994 में ग़ाज़ीपुर उत्तरप्रदेश से ,

शुआ - ए - नैय्यर - गज़ल संग्रह उर्दू  अकेडमी भोपाल से 

अक़ीदत का चमन - नात संग्रह  , सन  2004 में दमोह से 

दुरे अफ़्कार - गज़ल संग्रह  ,  सन  2010 में दमोह से 

तज़ल्ली  -  नात ,सलाम संग्रह  , 2015  में भोपाल से 
                       

अब तक मिला सम्मान

सन 1973 में सुहामुजद्दी गोल्ड मैडल सदर मंजिल भोपाल में मिला !

सन 1974 में रायपुर छत्तीसगढ़ में  अम्बेडकर जयंती पर आयुजित राष्ट्रीय मुशायरे में जिले का प्रतिनिधित्व किया

सन 1978 मद्रास चेन्नई के राष्ट्रीय मुशायरे में मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व ! 

सन 1980 उत्तर प्रदेश के स्टेट बैंक महोबा द्वारा सुलह कुल मैडल प्राप्त हुआ !

1982 '' आल वर्ड नात कॉन्फ्रेंस पाकिस्तान '' में आयोजित 22 देशो के शायरों के साथ प्रोग्राम में हिस्सा लिया !

पाकिस्तान कराँची में हुये प्रोग्राम में सेकेण्ड प्राइज़ लेकर भारत लौटे !

पाकिस्तान कराँची एयर पोर्ट ट्रस्ट द्वारा अक़ीक पत्थर की शील्ड प्राप्त !

कराँची पाकिस्तान बज़्मे रहमानी द्वारा नैय्यर दमोही को चाँदी मैडल प्राप्त !

सन 1996 ,20 सितम्बर  राजीव गाँधी मेमोरियल व कौमी एकता मंच सिवनी मध्यप्रदेश  द्वारा उर्दू शायरी की खिदमत के लिए सम्मानित !

सन 2002 , १९ जनवरी को देश की प्रख्यात संस्था '' स्पिक मैके " दमोह ने उर्दू शायरी की के छेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने पर सम्मानित किया !

सन 2002 , 31 जनवरी को दमोह में आयुजित ऑल इंडिया मुशायरा एवं नैय्यर दमोही के गज़ल संग्रह शुआ - ए - नैय्यर के इज़रा विमोचन के मौके पर देश  के मश्हूर शायरों ने सम्मानित किया , देश के प्रसिद्ध शायर पद्मश्री बेकल उत्त्साही , देश के प्रसिद्ध शायर पद्मश्री बशीर बद्र , और  शाबिर जबलपुरी सहित जिले भर की सामाजिक , साहित्यिक संस्थाओं ने नैय्यर दमोही के उर्दू शायरी की खिदमत करने और प्रदेश का  नाम रौशन करने के लिए इनामों इकराम से नवाजा और सम्मानित किया !

सन 2004 , 14 अगस्त को बुन्देल खण्ड पुरूस्कार से ललितपुर उत्तरप्रदेश में  नवाज़ा गया !

सन 2006 , 12 अप्रैल राजिस्थान कोटा में आयुजित आलमी जश्ने ईद मिलादुन नबी की गोल्डन जुबली में दुनियाँ भर के शायरों और आलिमो , मौलानाओ के बीच मध्यप्रदेश की नुमाइंदगी की !

सन  2006 - 15 अप्रैल  - मुहाफिजे उर्दू  अवॉर्ड से नैय्यर दमोही को साहब को नवाज़ा गया रायपुर छत्तीसगढ़ में !   
सन 2009 में  दमोही को मध्यप्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मलेन साखा जिला सागर में  '' वहाज़ उद्दीन सागरी '' सम्मान से नवाज़ा !    इसके अलावा नैय्यर दमोही साहब को उर्दू अदब के कई मंचों पर सम्मानित किया जा चुका है।

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