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सीसी रोड़ पर डामरीकरण कर किया 18 लाख का गबन


डामरीकरण करा किया 18 लाख का गबन
फर्जी ठेकेदारों के नाम पर हो रहा भुगतान
कालिंजर फोर लेने निर्माण में भी किया गया घोटाला

बाँदा। पीडब्लूडी निर्माण खण्ड - 1 में कार्यरत जेई हनुमान प्रसाद चतुर्वेदी के खिलाफ पिछले दो महीने से टारगेट करके चलाये जा रहे धरना प्रदर्शन के पीछे सच्चाई कुछ और है। विभाग के कर्ता-धर्ता अधिशाषी अभियन्ता अमर सिंह अपने कारनामों पर पर्दा डालने के लिए इस तरह के षडयंत्र रच रहे है। इन्होंने अपनी तैनाती के दौरान करोड़ों रूपये का भ्रष्टाचार किया है। इनका एक कारनामा तो शिवबालक का पुरवा में देखा जा सकता है। जहां सीसी रोड में डामरीकरण कराकर अपने चहेतों को भुगतान किया गया हैं।

लोक निर्माण विभाग में तैनात अधिषाषी. अभियन्ता के इर्द-गिर्द तमाम चापलूस ठेकेदार की फौज जो अभियन्ता की कृपा से सरकारी धन में चूना लगा रहे है। वर्ष 2013 में निर्मित शिव बालक का पुरवा सम्पर्क मार्ग पर सीसी रोड के ऊपर वर्ष 2017 में डामरीकरण का कार्य दिखाकर 18 लाख का फर्जी भुगतान अधिशाषी अभियन्ता द्वारा कर दिया गया। इसी तरह बाँदा-नरैनी रोड़ में पडुई माहावपुर मार्ग का मरम्मत का कार्य वर्ष 2016 में कराया गया था। यह मार्ग खराब नही था। फिर भी खराब दर्शाकर पुनः 2016-17 में बिना कार्य कराये ही करीब 22 लाख का फर्जी भुगतान कर दिया गया। इतना ही वर्ष 2017-18 मे लगभग 20 करोड़ रूपये को स्वीकृत समान्य विशेष मरम्मत में प्राप्त कर अधिशाषी अभियन्ता द्वारा बिना टेण्डर आमंत्रित किये आने चहेते ठेकेदारो से कार्यो का गोल-मोल कराते हुए बिल का भुगतान कर दिया गया है।

नरैनी  कालिंजर फोर लेने मे भी भारी भ्रष्टाचार किया गया है। 125 करोड़ रूपये के कार्य पर 42 किमी  से लेकर 45 किमी तक तक डस्ट एवं ग्रिट कबरई की खदान से अनुबंध होने के बाद भी नरेनी में ही मौजूद मटैरियल एवं डस्ट की जगह लाल मोरम का प्रयोग सड़क निर्माण कार्य में करवा दिया गया है। इसमें ठेकेदारों से करोड़ो रूपये अर्जित करके आधिशाषी अभियन्ता द्वारा करोड़ो रूपये की कमाई की गई है।

अधिशाषी अभियन्ता की इसी तरह भ्रष्टाचार की लम्बी फेहरिस्त है। लेकिन ऊपर से नीचे तक अफसरों की मुठ्ठी गरम करकें सरकारी धन का बंदर बाट किया जा रहा है। इस सम्बन्ध में विधायक से लेकर कई सामाजिक संगठन के लोगों ने डीएम कमिश्नर को ज्ञापन देकर जांच की मांग की लेकिन जांच आगे नही बढ़ सकी। यही वजह है कि अधिशाषी अभियन्ता पर जांच की आंच तक नही पहुंची अगर कभी जांच की नौबत आई तो अधिकारियों को गुमराह करने के लिए जेई के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया जाता है। 

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