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सूखे की तात्कालिक योजना तैयार, 28 करोड़ की डिमांड

बजट का इंतजार

आधा दर्जन से अधिक विभानों ने बना रखी योजना

बुन्देलखण्ड में सूखे का संकट यहां डेरा जमाए हुए है। कुछ एक सालों को छोड़कर सूखा दस्तक देकर किसान से लेकर आम लोगों को परेशान कर जाता है,तो कभी अतिवृष्टि भी किसानों को परेशान करती है। इस बार भी ऐसे ही हालात है‌,जिससे निपटने के लिए विभागों ने अपनी अपनी कार्ययोजनाओं को आकार दिया और बजट की डिमांड कर दी। सूखे से निपटने के लिए अल्प अवधि की कार्ययोजना में करीब 28 करोड़ की शासन से डिमांड की गई। लेकिन बजट अब तक नहीं आ सका, बता दें कि मई माह के 11 दिन बीत चुके है।

सूखे से पैदा होने वाली तमाम समस्याओं के लिए अल्प अवधि की कार्ययोजना बना ली गई है। विभागों ने अपनी अपनी योजनाओं को तैयार कर लिया है। इसमें आधा दर्जन से अधिक विभाग है। जिन्होंने खाका बनाकर प्रशासन को सौंप दिया और शासन को भेज दिया गया है।

सिंचाई विभाग व डाल नहर

नहरों के कटिंग के स्थलों को चिन्हित कर लिया है। जहां बारिश से बार- बार नहर कट जाती है। पेयजल और पशुओं के लिए पानी आरक्षित कर लिया। माताटीला बांध जून तक पानी देगा। पहुंज और पारीछा की भी यही स्थिति है। सिंचाई विभाग ने 1 करोड़ 3 लाख 38 हजार का बजट मांगा है। जिससे वह नहर प्रणाली का सुदृणीकरण करेगा। इस तरह के 25 काम है जिस पर करीब 45 लाख रुपया खर्च होगा। नहरों की रिपेयरिंग, डाल नहर लिफ्ट कैनाल का जीर्णोद्धार और नवीनीकरण 3 करोड़ 36 लाख से होगा। इससे 236 घंटे नहरों का संचालन और 25 पोखर भरे जाएंगे।

नलकूप विभाग

नलकूप विभाग ने 9 लाख रुपए का बजट मांगा है। इसमें जल स्तर गिरने से 10 सम्मर सेविल की विशेष मरम्मत, जली मोटर को ठीक कराना, 50 स्र्टाटर ठीक कराना, टीपी स्विच और पीवीसी पाइप शामिल है।

लघु सिंचाई विभाग

लघु सिंचाई विभाग ने निशुल्क बोरिंग योजना में 80 सामान्य वर्ग के लिए लक्ष्य रखा है। इसके लिए 4 करोड़19 लाख रुपया मांगा। इसमें 100 निशुल्क बोरिंग, 50 मध्यम गहरी बोरिंग, 20 गहरी बोरिंग, 10 चेकडैम मिलाकर कुल 180 कार्य है।

जल निगम

नगरीय में जल निगम ने 3 करोड़ 40 लाख और ग्रामीण क्षेत्र में 10 करोड़ 35 लाख रुपए का बजट मांगा गया है। इसमें 1 हजार हैण्डपंप है। जिसमें 400 रीबोर, 600 नए हैण्डपंप है। नगरीय क्षेत्र में 200 हैण्डपंप और 87 रीबोर है। पाइप पेयजल योजना में साढ़े सात किमी का विस्तारीकरण है।

जल संस्थान

जल संस्थान ने 3 करोड़ 5 लाख का बजट बनाया है। इसमें टैंकर और हैण्डपंप की मरम्मत शामिल है। समस्याग्रस्त इलाकों में टैंकरों से पानी की सप्लाई और दो ट्राली जनरेटर है।

स्वास्थ्य

निजी व नर्सिग होम के चिकित्सक के साथ शिविर लगने है। इन्हें सभी क्षेत्रों में लगाया जाना है।

पशुपालन

पशुपालन विभाग द्वारा 2 करोड़ 47 लाख का बजट मांगा गया है। इसमें पशु कैम्पों में चारा/ आहार उपलब्ध कराना है। पानी दवाओं को भी शामिल किया गया है। इसमें 200 बड़े पशु और 90 छोटे पशु शामिल है। इसी में 16 आश्रय केन्द्र भी शामिल है। जिले के कुल 953981 है।

मनरेगा

सूखे के दृष्टिगत 39.70 लाख मानव दिवस का लक्ष्य अलग से तय किया गया है। मनरेगा के तहत अलग से गांव गांव जाब कार्ड धारकों को गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराया जाना है।

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