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आंगनवाडी कार्यकर्ता एवं स्निप अमले ने निभाई सक्रिय भूमिका

कुपोषण के चक्र से बाहर निकल स्वस्थ हुई रागिनी

मजदूरी कर अपने परिवार का गुजर बसर करने वाले श्री मुन्ना चैधरी की तीसरी संतान है रागिनी। पन्ना जिले के अमानगंज में रहने वाले परिवार में रागिनी का जन्म 25 मई 2016 को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र अमानगंज में हुआ। रागिनी के जन्म के बाद आंगनवाडी केन्द्र की कार्यकर्ता श्रीमती अंजुला जैन द्वारा रागिनी को पंजीकृत किया गया। श्रीमती अंजुला अपने कर्तव्य का ईमानदारी से निर्वहन करते हुए प्रत्येक माह रागिनी का वजन लेती और उसे वृद्धि चार्ट में अंकित करती जाती। लेकिन जब रागिनी लगभग एक वर्ष 3 माह की थी तब रागिनी के वजन ने आंगनवाडी कार्यकर्ता की चिंता बढा दी। अगस्त 2017 में रागिनी का वजन 7.900 किलो ग्राम एवं एमयूएसी माप 11.4 होने से वृद्धि चार्ट में रागिनी लाल रेखा में आ गयी। यह लाल रेखा स्पष्ट कर रही थी कि रागिनी कुपोषण का शिकार हो चुकी है।

रागिनी को कुपोषण चक्र से बचाने के लिए तत्काल आंगनवाडी कार्यकर्ता एवं स्निप (सुदृढ़ीकरण एवं पोषण उन्नयन कार्यक्रम) के अमले द्वारा रागिनी के माता-पिता से सम्पर्क किया गया। बच्ची के कुपोषित होने की जानकारी से उसके माता-पिता घबरा गए। तब आंगनवाडी कार्यकर्ता एवं स्निप अमले ने रागिनी की माॅ श्रीमती अभिलाषा और पिता मुन्ना चैधरी को समझाईश देते हुए उनकी हिम्मत बांधी और  रागिनी को एनआरसी (पोषण पुनर्वास केन्द्र) में भर्ती कराने के लिए तैयार कर लिया। जिसके बाद रागिनी को 2 नवंबर 17 को एनआरसी केन्द्र में भर्ती कराया गया। रागिनी यहां 16 नंवबर 2017 तक भर्ती रही। जिसके बाद आगंनवाडी कार्यकर्ता द्वारा 30 नवंबर, 15 एवं 30  दिसंबर 2017 तथा 15 जनवरी 2018 को रागिनी के 4 फलोअप किए गए। इसके अलावा आंगनवाडी कार्यकर्ता एवं स्निप के अमले द्वारा रागिनी के माता-पिता को समय-समय पर घर में साफ-सफाई रखने, भोजन पूर्व हांथ धोने, बच्चे को रोज आंगनवाडी केन्द्र भेजने एवं नियमित वजन कराने की समझाईश भी दी जाती रही।

परिणाम यह हुआ कि अब रागिनी का वजन बढकर 8.800 किलो ग्राम एवं एमयूएसी माप  12.6 हो चुका है। महिला एवं बाल विकास विभाग के अमले के प्रयासों से रागिनी अब कुपोषण के चक्र से बाहर आकर एक स्वस्थ जीवन जी रही है।
 

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