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बदहाली की मार झेलता एतिहासिक कीरत सागर

गर्मी के मौसम मे पानी को तरसते नजर आ रहे है लोग | कइ जल श्रोत, सागर., कुऎ सूखते नजर आ रहे हैं | वही एतिहासिक धरोहर कीरत सागर भी सुखे एवं बदहाली की मार झेलता नजर आ रहा है | कीरत सागर का निर्माण चन्देल वंश के राजा कीर्तिवर्मन चन्देल के द्वारा 1060 से 1100 ई. पू. के मध्य कराया गया था | 1182ई. मे प्रथ्वीराज चौहान तथा राजा परमाल जो की स्थानीय चन्देल राजा थे, इन् दोनों के बीच एतिहासिक युद्घ हुआ था | तभी से लेकर आज तक इस स्थान पे हर वर्ष मेला लगता आ रहा है जो  कि कजली महोत्सव के रूप मे मनाया जाता है| शौर्य एवं पराक्रम का स्थल रहा कीरत सागर आज कब्जे और बदहाली एवं गंदगी का शिकार बनता नजर आ रहा है |

हालाकि पूर्व में समाजवादी पार्टी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के द्वारा इस तालाब की खोदाई कराई गयी थी, जिसमे लाखों रुपये की लागत से तालाब का कार्य पूरा हुआ था | जबकी खुदाई के नाम पे सिर्फ़ खानापूर्ती हुई थी, और लाखों के वारे न्यारे हुये थे | आज भी कीरत सागर सूखे की मार झेल रहा है, तालाब में साफ़ सफ़ाई ना होने के कारण इन्सान तो छोड़ो जानवर भी पानी पीने से हिचकते नजर आ रहे हैं| एतिहासिक कीरत सागर आज अवैध कब्जो से पटा पड़ा हुआ है | समाज के लोग जो की समाज सेवा की चादर ओढ़े हुए हैं आज तालाब की जमीनो पे अवैध कब्जा करने मे मस्त हैं| अगर इस ओर ध्यान नही दिया गया तो आने वाले कल में शौर्य एव पराक्रम का स्थल कहा जाने वाला कीरत सागर सिर्फ़ एक कहानी बन के रह जायेगा.... बुन्देली समाज के सयोजक तारा पाट्कर का कहना है की एतिहासिक धरोहरो को बचाने के लिये लोगों को आगे आना चाहिए और प्रशासन को भी इन धरोहरो का विषेश ध्यान देना चाहिए।

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