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बारिश से पहले हो मुख्यालय के जलश्रोतो की सफाई-तारा

पानी के लिये प्रत्येक वर्ष भटकना पडता है लोगों को

कोई स्थाई समाधान न होने के कारण समस्या विकराल रुप ले चुकी

बारिश से पहले नगर के सभी प्रमुख कुओं की सफाई करायी जाए और मुहल्लों में जल संकट कम करने व भूजल स्तर सुधारने के लिए उनको संरक्षित किया जाए। बुंदेली समाज ने गुरूवार को नगर के ऐतिहासिक कुओं की भारी उपेक्षा पर चिन्ता व्यक्त की एवं जिलाधिकारी सहदेव से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।

बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने कहा कि भारी जल संकट को देखते हुए शासन ने महोबा को सूखाग्रस्त जिला घोषित किया है। पूरे क्षेत्र में जलस्तर काफी नीचे चला जाने की वजह से जिले के सभी चारों ब्लाक डार्क जोन की श्रेणी में आ चुके हैं। ऐसे हालात में भू जलस्तर को सुधारने में कुएं महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि महोबा में चंदेलकाल से ही तालाबों के साथ-साथ कुओं के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया गया। लेकिन अब सभी कुएं तबाह होते जा रहे हैं। महोबा में मदनऊ, सदनऊ कुएं इसके मजबूत प्रमाण हैं जिनसे आधे महोबा को पानी की सप्लाई होती थी। इसी प्रकार ऊदल चैक, काजीपुरा, मलकपुरा, शिवतांडव आदि के कुएं प्रमुख जलस्त्रोत थे। ये सभी कुएं वर्षा जल संचयन का महत्वपूर्ण साधन हो सकते हैं लेकिन उपेक्षा का आलम यह है कि इन सभी कुओं की पिछले 20 साल से सफाई तक नहीं हुई है। ज्यादातर कुएं अब कूड़ाघर बनते जा रहे हैं।

बुंदेली समाज के संयोजक ने डीएम से आग्रह किया है कि वे बारिश से पहले ऊदल चैक के कुएं समेत नगर के सभी प्रमुख कुओं की सफाई कर उनको पुनर्जीवित कराने का प्रयास करें। बता दें कि जिले में हर वर्ष पानी का समस्या गर्मियों में विकराल रुप धारण कर लेती है। फिर भी किसी भी सरकार ने यहां पेयजल की स्थाई व्यवस्था कराने के लिये कुछ भी नही किया। करोडों रुपयों खर्च कर टेंकरों आदि से पानी की सप्लाई कराये जाने से आधा पैसा अधिकारियों व ठेकेदारों के पास पहुंच जाता है और बुन्देले प्यासे के प्यासे ही रहते है। इसलिये बुन्देली समाज ने प्राचीन जलश्रोतो को साफ करा इनका जीर्णोद्वारा कराये जाने की मांग की है। इससे काफी हद तक पानी की समस्या से निजात मिल सकता है।

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