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माध्यमिक शिक्षकों को भी आवश्यक है कला प्रशिक्षण

कला में सिद्धहस्त होने को सतत प्रयास आवश्यक: डीआईओएस

कलाविद ओ.पी.बिरथरे ने 80 बच्चों को किया कला में प्रशिक्षित

सिद्धनरोड स्थित कला भवन में प्रख्यात चित्रकार ओ.पी.बिरथरे द्वारा आयोजित निशुल्क कला शिविर का समापन मुख्य अतिथि डीआईओएस, अजय जैन की अध्यक्षता में दीप प्रजज्वलन एवं मां सरस्वती पूजन के साथ हुआ। एक माह से चल रहे निशुल्क शिविर की महत्तवताओं पर प्रकाश डालते हुये ओ.पी.बिरथरे ने कहा कि यह शिविर इसलिये विशिष्ट है कि चित्रकला के माघ्यम से पद पैसा और प्रतिष्ठिा तीनों प्राप्त किया जा सकता है। चित्रकला में दक्षता प्राप्त कर ऐनिमेशन, ड्राईंग और पेन्टिग, डिजाईनिंग, इलैस्ट्रेशन, एडवरटाईजिंग कम्पनी, विज्ञापन विभाग, अखबार और पत्रिका में रोजगार के तौर पर अपना सुनहरा भविष्य तराश सकते है। इस शिविर में गरीब बच्चों एवं वंचित बच्चों का ध्यान रखा गया।

मुख्य अतिथि डीआईओएस ने पाब्लो पिकासो एवं लियोनार्डो द विंची के जीवन की घटनाओं पर परिचर्चा करते हुये बच्चों को सिद्धहस्त होने के लिये सतत अभ्यास के लिये प्रेरित किया। उन्होनें कहा कि कला अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। उन्होनें इस तरह के प्रशिक्षण को माघ्यमिक शिक्षकों के लिये भी आवश्यक बताया। उन्होने कहा कि बिरथरे जी के द्वारा किये जा रहे प्रयास निश्चित रूप से सराहनीय है। जहां कला जीवन को सौन्दर्यपूर्ण द्रष्टिकोण देते हुये कुत्सित भावनाओं का दमन करती है। अध्यक्षता कर रहे अजय जैन ने शिविर में आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में चुने गये दस छात्र छात्रओं अनुराधा मोदी, चित्रंगना ठाकुर, श्रषभ दिनकर, सपना श्रीवास, शिवम राठौर, सत्येन्द्र कुमार, सौरभ यादव, कशिश साहू, आदि जैन, वियोम मालवीय, हरभजन सिंह को अपनी ओर से पुरस्कार वितरित करते हुये उनके चित्रों की भूरि भूरि प्रशंसा की। संतोष शर्मा ने कहा कि ये जीवन की कुन्ठाओं और निराशा को दूर तक सकारात्मकता की ओर ले जाकर आशावाादी बनाती है। चित्रकला के माघ्यम से भाव को अच्छे से उकेरा जा सकता है।

पर्यटन मित्र फिरोज इकबाल ने कहा कि चित्रकला में रंग रूप की अभिव्यक्ति प्रधान है और वह अन्य कलाओं से भिन्न हैं। इस तरफ के शिविर से कला साधकों को अपनी अभिव्यक्ति का पूर्ण अवसर मिलता है। जिस युग में कला का विकास हुआ वह युग इतिहास में स्वर्णयुग कहलाये। इस शिविर में जनपद के 80 छात्र छात्राओं ने प्रतिभाग करके अपनी कला कौशल को निखारा। इस शिविर में गुरूकुल जैसा वातावरण देखने को मिला। इस अवसर पर कला भवन की ओर से मुख्य अतिथि को समृति चिन्ह भेंट किया गया। समापन अवसर पर आनन्द त्रिपाठी, डा.रमेश किलेदार, गोविन्द राम सेन, पुरूषोत्तम नारायण गंगवानी, जयन्त चौबे, अवधेश त्रिपाठी, गोविन्द व्यास, सत्यनारायण तिवारी, देवेन्द्र जैन, परिवेश मालवीय, अशोक गोस्वामी आदि सहित अनेकों कला साधक उपस्थित रहे। संचालन भगवत दयाल सिंधी ने किया अन्त में आभार कलाविद ओ.पी. बिरथरे ने किया।

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  • मोहम्मद नसीम

    जनपद ललितपुर में पत्रकारिता का एक लम्बा अनुभव लिए मोहम्मद नसीम की पारिवारिक पृष्ठभूमि भी इसी क्षेत्र से सम्बन्ध रखती है। राजनीतिक व सामाजिक मुद्दों पर इनकी गहरी पकड़ है।, ग्रेजुएट

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