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नगर निगम पहले वसूली, फिर सिकमी किरायेदारों पर करेगा कार्रवाई

नगर निगम की आवंटित दुकानों,फड़,टट्टर पर जमें सिकमी किरायदारों पर जल्द ही नगर निगम का शिकंजा कसने जा रहा है। नगर निगम ने शहर में स्थित सभी दुकानों आदि को चिंहित कर पत्रावलियों की जांच शुरू कर दी है। अपर नगर आयुक्त रोहन सिंह ने बताया कि पहले चरण में सभी बकायादारों को छांटकर उनसे वसूली कराई जा रही है। इसके बाद दूसरे चरण में पत्रावालियों की जांच के बाद सिकमी किरायेदारों पर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

नगर निगम ने नेहरू मार्केट, शास्त्री मार्केट, तिलक मार्केट, पुराना बस स्टैण्ड, सुभाष गंज, सीपरी बाजार आदि में करीब 1234 दुकानें/फड़/टट्टर आवंटित किये हैं। वर्षों पूर्व आवंटन प्रक्रिया के बाद नगर निगम टैक्स विभाग उक्त सभी से किराया वसूली करता हैं। इस दौरान कई आवंटियों ने दुकानों,फड़,टट्टर आदि का सौदा कर दिया। यहीं नहीं उक्त दुकानों में नामांतरण प्रक्रिया न अपनाते हुये किराये पर संचालित करना दिखाया। इससे जहां नगर निगम को लाखों रुपये की क्षति पहुंची। वहीं सिकमी किरायेदारों ने नगर निगम में किराया नहीं दिया। हजारों के बकायादारों में शामिल होने के बावजूद नगर निगम प्रशासन ऐसे दुकानदारों पर न तो कार्रवाई कर सका और न ही शिकंजा कस सका।

पिछले दिनों इस प्रकार के मामलों पर नगर आयुक्त प्रताप सिंह भदौरिया के आदेश पर सिकमी किरायेदारों को चिंहित करने का काम शुरू हो गया। अपर नगर आयुक्त रोहन सिंह कहते हैं कि सर्किल के टैक्स अधीक्षक, टैक्स निरीक्षक एवं बिल कलैक्टरों को आदेश जारी किये गये थे कि वह सम्बंधित सर्किल में स्थित नगर निगम की दुकानों की जांच कर सिकमी किरायेदार चिंहित करें। इस मामले में सभी कर्मचारियों की रिपोर्ट आ गई है। पहले चरण में सभी बकायादारों से वसूली की जा रही है। इसके बाद सिकमी किरायेदारों पर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

दुकानों के बदल गये स्वरूप, फड पर बन गई दुकानें वर्षों पहले दुकानों के साथ फड़ एवं टट्टर आवंटित किये गये थे। नगर निगम की शिथिलता के कारण कई दुकानों का स्वरूप बदल गया। कोई दो मंजिल में तब्दील हो गई तो कुछ में बेसमेंट आदि बन गये। जहां फड़ आवंटित किये गये थे, वहां दुकानें बन गई और टट्टर गायब हो गये। नगर निगम ने कई रिकॉर्डों की खोजबीन कर ली तो कई रिकार्ड गुम बताये जा रहे हैं, जिससे सिकमी किरायेदार की जानकारी करना मुश्किल होगा। हालांकि अफसर कहते हैं कि नगर निगम के पास पूरा रिकॉर्ड मौजूद है।

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