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गुनौर विधानसभा में टिकट के होंगे अनेक दावेदार

पन्ना जिले में तीन विधानसभा है जिसमें से गुनौर विधानसभा में सर्वे किया गया तो सर्वे में यह बात निकल कर आई इस बार गुनौर की जनता किसी नए युवा चेहरे को विधायक बनाना चाहती है गुनौर में लगातार चार पंचवर्षीय से लगातार भाजपा का उम्मीदवार चुनाव जीतकर विधायक बन रहा है पर क्षेत्र की जनता की समस्याएं जैसी की तैसी हैं जो थोड़ा बहुत कुछ काम हुआ है तो केवल उन्हीं लोगों का काम हुआ है जो विधायकों के नजदीक रहे हैं इस तरह की बात क्षेत्र की जनता से चर्चा मे आई ।

2018 में मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं इसको लेकर चर्चा जोरों पर है और प्रत्याशियों के नामों पर चर्चा होने लगी है उन्हीं नामों से एक नाम युवा नेता जीतेंद्र सिंह जाटव का है उनका नाम क्षेत्र की जनता में सभी की जुबान पर है बहुत से उनके समर्थक भी है और कुछ उनके विरोधी भी हैं लेकिन चर्चा दोनों पक्ष करता है और जाटव जी चर्चा का विषय जरूर है जाटव जी के बारे में हम आपको यहां बता दें कि जितेंद्र सिंह जाटव अपनी 16 वर्ष की आयु से लगातार दलित पिछड़े गरीब कमजोर लोगों की लड़ाई लड़ने का काम कर रहे हैं। 

पन्ना में चाहे वह पोस्ट मेट्रिक छात्रावास खुलवाने की मांग हो या पर गुनौर विधानसभा में जसवंतपुरा में निर्दोष लोगों को जेल भेजने की कार्यवाही जैसे मुद्दों पर उन्होंने बड़े पैमाने पर जन आंदोलन कर लोगों को उनका हक अधिकार दिलाने का काम किया है गुनौर को नगर पंचायत बनाने के लीए आन्दोलन प्रमुख्य हे इस बात को उनके विरोधी भी मानते हैं कि जितेंद्र जाटव तेज तररात नेता हे और उनके साथ युवा लड़की लड़कियों की बहुत अच्छी टीम है जो हमेशा लोगों के अधिकारों के लिए लड़ने का काम करतें है।

दिनांक 12 अप्रैल को जीतेंद्र सिंह जाटव अपने 1000 साथियो के साथ कांग्रेस में सामिल हो गए अगर कांग्रेस पार्टी गुनोर से जितेंद्र सिंह जाटव को अपना उम्मीदवार बनाती है तो भाजपा को कड़ी टक्कर का सामना करना पड़ेगा जाटव जी गुनोर में एक मजबूत उम्मीदवार हे जिसका मुख्य कारण हे उनके साथ युवा लड़के लड़कियों छात्रों की अच्छी टीम हे साथ ही गुनौर विधान सभा में उनके समाज का लगभग पचास हजार वोट हे जो सबसे अधिक वोट हेयह वोट उनके नाम पर कॉग्रेस को मिल सकता हे साथ ही पिछडे वर्ग हे बड़े नेता भी जीतेन्द्र जाटव के साथ सपोट में उनके आंदोलनों कार्यक्रमों साथ नजर आते हे ।

गुनौर में कांग्रेस को रोकने का काम बसपा करती है ज्यादातर बसपा में दलित समाज का वोट चला जाता है जिससे कांग्रेस चुनाव हार जाती है पिछले 2013 चुनाव में कर्ग्रेस पार्टी के उम्मीदवार शिवदयाल बागरी लगभग हजार वोट वोटों से चुनाव का हार का सामना करना पड़ा इसकी मुख्य वजह थी की गुनौर में बागरी समाज का मात्र लगभग दो हजार ही वोट हे दूसरा कारण बहुजन समाज पार्टी के जो उम्मीदवार थे देवीदीन आशु वह बहुत ही कमजोर उम्मीदवार साबित हुए है बसपा का वोट जो पिछले चुनाव में लगातार बढ़ता जा रहा था इस बार के चुनाव में कम हो गया बसपा का उम्मीदवार के कमजोर होने के कारण दलित वोट कांग्रेस में डायवर्ट हुआ जिस से कांग्रेस को फायदा मिला अगर वही बसपा से कोई मजबूत उम्मीदवार चुनाव लड़ता है तो कांग्रेस का वोट बैंक घटेगा जिसका फायदा भाजपा को मिलेगा और पूर्व में भी मिलता आ रहा है।

अगर कांग्रेस अपना उम्मीदवार जीतेन्द्र सिंह जाटव को बनाती है तो बहुजन समाज पार्टी का बहुत हद तक दलित वोट जाटव जी के नाम पर कांग्रेस में आ जायेगा जिसकी प्रमुख वजह हे जाटव जी के साथ दलित युवाओं का साथ दूसरी तरह कांग्रेस पार्टी को भी बुंदेलखंड में एक दलित युवा चेहरा मिल जायेगा जिसका फयदा अन्य सीटों में कांग्रेस को मिलेगा फिलहाल इस बार 2018 में विधानसभा चुनाव है और गुनौर विधानसभा के सभी प्रत्याशियों में जितेंद्र सिंह जाटव का नाम सबसे आगे आ रहा है क्षेत्र की जनता भी किसी नए युवा चेहरे को विधायक बनाने की बात कह रही है देखना है कि चुनाव में क्या होता है क्योंकि चुनाव में संभावनाओं को कभी नकारा नहीं जा सकता है।

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