< संघर्षो से ही अब तक हक हासिल किये हैं - अंजना Hindi News - Breaking News, Latest News in Hindi, हिंदी में समाचार, Samachar - Bundelkhand News संघर्षों से ही हमने अब तक हक हासिल किए हैं |आज दुनिया में शोषण"/>

संघर्षो से ही अब तक हक हासिल किये हैं - अंजना

संघर्षों से ही हमने अब तक हक हासिल किए हैं |आज दुनिया में शोषण का दायरा बढ़ा है गरीब मजदूर की हालत बहुत खराब है |हमने जब-जब संघर्ष किया है कभी कुछ पाया है अपने हक के लिए हम सबको मिलकर आगे आना होगा आज आंदोलनों की धार धीमी हुई है इसीलिए  शोषण बढ़ रहा है उक्त विचार प्रगतिशील लेखक संघ द्वारा आयोजित मजदूर दिवस पर रेल यूनियन दमोह की महासचिव मजदूर नेत्री अंजना राय ने व्यक्त किये |

इस अवसर पर प्राचार्य नन्हें सिंह ठाकुर ने कहा कि आज कारपोरेट और नेताओं के अलावा तमाम वर्गों की स्थितियां बेहद निराशाजनक है |मार्क्स और लेनिन के विचार आज के संदर्भ में प्रासंगिक है | सामाजिक कार्यकर्ता विजय दिवाकर करमरकर ने दो टूक कहा कि कर्मचारी मजदूर हितेषी तमाम नीतियां चंदनेताओ,अधिकारियों और कर्मचारी नेताओं की मिलीभगत से कारगर नहीं हो पा रही है |सुसंस्कृति परिहार ने स्पष्ट किया जब तक हम संगठित होकर प्रतिकार करने सड़कों पर नहीं आते  तब तक फासिस्ट ताकते हमारा शोषण करती रहेंगी हमें धर्म वर्ग जाति को भूलकर संगठित रूप में आगे आना होगा |

प्रारंभ में युवा साथी रंजीत पारोचे ने मजदूर दिवस की शुभकामनाएं देते हुए मई दिवस के रक्त रंजित इतिहास और भारत में मजदूर दिवस की स्थापना के संदर्भ में अपनी बात कही |युवा मजदूर नेत्री अंजना राय का सभी साथियों ने मिलकर अभिनंदन किया |बुलंद आवाज में अमृता जैन, पंकज चतुर्वेदी ,प्रिंस चौरसिया, प्रताप सिंह चौहान ,हरि ओम हरि ,विवेक विश्वकर्मा, रंजीत, वैशाली ,साक्षी सोनी, शिवानी बाल्मीकि ,आकाश सोनी ,संजय रजक पी एस परिहार एवं विजय दिवाकर करमरकर ने रंगकर्मी राजीव अयाची के निर्देशन में जोशीले जन गीत गाकर एक नई ऊर्जा का संचार किया |

द्वितीय चरण में विषयांतर्गत कवि गोष्ठी का आगाज बी एम दुबे ने श्रमिकों के दर्द में डूबी कविता 'जिनके श्रम से रोशन दुनिया से हुआ , डा०गणेश राय ने मार्क्स की अनुभूतियों को छूते हुए श्रमिकों को संदेश देती रचना पढ़ी वहीं बबीता चौबे ने महिला मजदूर की तमाम पीड़ाओं को दर्ज कराती भावभीनी समकालीन रचना का पाठ  किया | नन्हें सिंह ठाकुर ने राजनीतिक और कर्म जगत के द्वंद पर ,आराधना राय ओजेंद्र तिवारी, रंजीत पारोचे ,पी एस परिहार के अलावा नाट्यकर्मी राजीव अयाची ने भी मजदूर वर्ग को अपनी कविताओं का विषय बनाया |महेंद्र श्रीवास्तव ने इस दौरान बड़ी ही मासूम ग़ज़ल पढ़कर माहौल को एक अलग रंग दिया 'मजदूर की झोपड़ी में झीने झीने उजाले हैं |बड़ी मुश्किल से मिलते तो जून के निवाले हैं' 

इंकलाब जिंदाबाद और मई दिवस अमर रहे नारों के साथ पंकज चतुर्वेदी ने आभार जाहिर  किया शिल्पी नाट्य में आयोजित इस कार्यक्रम में रंगमंच के कलाकारों का विशेष सहयोग रहा |

About the Reporter

अन्य खबर

चर्चित खबरें