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हरदौल और लव यू जिन्दगी का हुआ मंचन

शादी-ब्याह में बुन्देलखण्ड में पूजे जाने वाले ‘लाला हरदौल’ और अपनी जिंदगी से ऊब चुके युवाओं को जीने की नई राह दिखाने वाले नाटक ‘लव यू जिन्दगी’ का मंचन रविवार की रात जब लखनऊ के कलाकारों ने किया तो हर किसी की आंखों से आंसू छलक पडे़। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी एवं पुलिस कप्तान शालिनी रहीं।

स्थानीय रामलीला मैदान में पुलिस प्रशासन, टीम इनोवेशन, जिला उद्योग व्यापार मंडल, बचपन प्ले स्कूल, आराधना गैस सर्विस, बांदा अर्बन बैंक व अन्य सहयोगी संगठनों के सहयोग से आयोजित नाट्य मंचन के पहले चरण में ‘लाला हरदौल’ का मंचन कलाकारों ने बखूबी किया। घर में शुभकार्यों में लाला हरदौल की समाधि पर जाकर लोग उन्हें आमंत्रित करते हैं। दरअसल बुन्देलखण्ड के इस अनोखे पात्र की जिंदगी की कहानी ही कुछ ऐसी है जिसे बार-बार रंगमंच के पर्दे पर अलग-अलग तरीके से मंचित करने की कोशिश होती रही है। इस नाटक में कई बार जहाँ लाला हरदौल का चरित्र दर्शकों को रोमांचित करता है तो कई बार दर्शकों को रुला देता है।

यह है लाला हरदौल की कहानी

मंचित किया गया नाटक ‘हरदौल’ बुन्देलखण्ड के एक प्रसिद्ध लोकदेवता हैं। यह कथानक लगभग 1684 ई. के आसपास का माना जाता है। ओरछा नरेश वीर सिंह जूदेव के सबसे छोटे पुत्र लाला हरदौल इस नाटक के मुख्य पात्र हैं। जूदेव के बड़े पुत्र जुझार सिंह अपने छोटे भाई हरदौल को बेटे की तरह मानते हैं। हरदौल अपने भाई और भाभी को पिता-माता की तरह स्नेह करते हैं। मंझला भाई पहाड़ सिंह हरदौल से नफरत करता है क्योकि जुझार सिंह हरदौल को अधिक स्नेह देते हैं। इस समय साम्राज्य विस्तार में लगे मुगल शासक बुन्देलखण्ड पर आक्रमण करते हैं। हरदौल बहादुरी से मुगल सेनाओं को परास्त कर देते हैं। जब मुगल शासक युद्ध में सफल नहीं हो पाता तो अपने सिपहसालार हिदायत खान की मदद से हरदौल के भाई पहाड़ सिंह के साथ मिलकर राजा जुझार सिंह के कान भरता है। जुझार सिंह की पत्नी चम्पावती और हरदौल के संबंधों पर लांछन लगाया जाता है।

राजा जुझार सिंह बहकावे में आ जाते हैं और रानी को पतिव्रता होने की परीक्षा देने को कहते हैं। रानी को अपने हाथ से जहर मिला खाना लाला हरदौल को खिलाने को कहा जाता है। जब हरदौल को यह बात पता चलती है तो वह भाभी के चरित्र पर लगे दाग को धोने के लिए जहर मिला खाना खा लेता है। जनश्रुति है कि हरदौल की मौत के बाद उसकी बहन कुंजा अपनी बेटी की शादी का न्यौता देने लाला हरदौल की समाधि पर जाती है और खूब रोती है। हरदौल अपनी भांजी की शादी में हिस्सा लेने पहुंचते है और परंपरा का निर्वाह करते हैं। तभी से हरदौल को बुन्देलखण्ड में देवता के रूप में पूजे जाने की परम्परा शुरू हो गई।

इस नाटक का लेखन और निर्देशन रंगकर्मी चन्द्रभाष सिंह ने किया। चन्द्रभाष सिंह बांदा के ही निवासी हैं और वर्तमान में लखनऊ में रहते हैं। मंच पर चन्द्रभाष सिंह, राघव मिश्रा, नैनिका रमोला, गीतिका वेदिका, अभिनव मिश्रा आदि ने दर्शकों को अपना अभिनय दिखाया। 

लव यू जिन्दगी का मंचन

इस नाटक के बाद लव यू जिन्दगी का मंचन भी सफल रहा। इस नाटक में माता-पिता की संवाद हीनता से अपने राह से भटक कर पुत्र आत्महत्या करने को ठान लेता है। इसी तरह कुछ युवक जीवन का लक्ष्य हासिल करने के लिए जो अपना मुकाम तय करते हैं। उन्हें उस रास्ते पर जाने से रोका जाता है जिससे अपने आपको उपेक्षित युवक आत्महत्या करने को विवश होते हैं। बदलते युग में आपसी मनमुटाव के चलते अपनी जिन्दगी को गंवा देने का रास्ता चुनने वालों को लव यू जिन्दगी ने आइना दिखाने का काम किया है। इस नाटक में कलाकारों ने अपने-अपने अभिनय से नाटक में जान डालने की कोशिश की है। दोनों नाट मे कलाकारो के सफल मंचन का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लगभग 4 घंटे तक चले इस नाट्य मंचन में वहां मौजूद दर्शक सांस बांधकर इसे देखते रहे। 

कार्यक्रम के आयोजन में श्याम निगम, सचिन चतुर्वेदी, मनोज जैन, अमित सेठ भोलू, दिनेश कुमार दीक्षित, अरूण निगम, संजय निगम अकेला, अभिषेक सिंह, सुरेश कान्हा, रामेन्द्र शर्मा, संजय काकोनिया आदि प्रमुख रहे।

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